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कौन है जाकिर नाईक, कैसे बना मुस्लिम युवाओं का चहेता?

Thu, 07 Jul 2016 09:55 AM IST
सुरेंद्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 07 Jul 2016 09:55 AM IST
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Islamic cleric Zakir naik

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकवादी हमले के बाद एक बार फिर मुस्लिम धर्मगुरु डॉ. जाकिर नाईक विवादों में है। इस्लाम के अलावा अन्य धर्मों की आलोचना नाईक की फितरत है। वह अपने भाषण में हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित कर मुस्लिम युवाओं का दिमाग बदलता है। गीता के श्लोक की गलत व्याख्या कर कट्टरवाद को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई है।

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मुस्लिम युवाओं का चहेता बना डॉ जाकिर नाईक कभी दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार की गलियों में एक छोटे से कबाड़खाने जैसे घर में रहता था। लेकिन, कट्टरवादी सोच के साथ इस्लाम का प्रचार कर उसने इतनी दौलत और शोहरत कमा ली है कि आज वह मुंबई के बेहद पॉश इलाके नेपियंसी रोड पर आलीशान कोठी में रहता है।
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डॉ. नाईक पीस टीवी नामक एक इस्लामी चैनल का संस्थापक है जिसका अनेक देशों में प्रसारण होता है। 18 अक्तूबर 1965 में जन्मा जाकिर को बचपन में ही कुरान की आयतें कंठस्थ हो गई थीं। उसके बाद उसने मेडिकल की पढ़ाई की।

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Islamic cleric Zakir naik
अपने पिता अब्दुल करीम नाईक की मदद से डोंगरी में एक इस्लामिक स्कूल की नींव रखी। डॉ. जाकिर के पिता का महाराष्ट्र के बड़े नेता शरद पवार और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अब्दुल रहमान अंतुले से जान पहचान थी।

इसके बल पर जाकिर का इस्लामिक स्कूल चल निकला। उसके बाद उसने कई मदरसे खोले। साल 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना कर वह मदरसों में मुस्लिम युवाओं को कट्टरता की ट्रेनिंग देने लगा।

उसके बाद जाकिर कुछ ही दिनों में खुद को इस्लाम का स्कॉलर कहलवाने लगा। इस तरह जाकिर का मजहबी दायरा बढ़ता गया। वह बीते 20 सालों में 30 से ज्यादा देशों में दो हजार से अधिक व्याख्यान दे चुका है।

उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार अजीज एजाज बताते है कि इस्लामिक व्याख्यान देने वाले जाकिर के पास सऊदी अरब, बहरीन आदि इस्लामिक देशों से बड़ी रकम पहुंचने लगी। उसके बाद उसने इस्लामिक धर्मगुरु के रूप में खुद को स्थापित कर लिया।
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