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Railway:क्या रेलवे निजी कंपनी को देने जा रहा पार्सल ऑफिस का ठेका? इस आदेश से हजारों मजदूरों का रोजगार संकट में
Tue, 11 Feb 2025 07:45 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 11 Feb 2025 07:45 PM IST
सार
मजदूरों का आरोप है कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं, लेकिन रेलवे बोर्ड का ये निर्णय इसके विपरीत है। रेलवे अधिकारी बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब मजदूरों को बेरोजगार करने पर तुले हैं।
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भारतीय रेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रेलवे के लोडिंग-अनलोडिंग वर्कर्स यूनियन के हजारों मजदूरों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। यूनियन ने रेलवे बोर्ड के 21 जनवरी 2025 को जारी आदेश (फाइल नंबर 2025/TC(FM)/10/04) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन का कहना है कि, इस आदेश से हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे, क्योंकि रेलवे अधिकारी पार्सल ऑफिस का ठेका किसी बड़ी कंपनी को देने की योजना बना रहे हैं। रेलवे बोर्ड के इस फैसले के विरोध में मजदूर 14 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पार्सल ऑफिस से रेलवे बोर्ड तक कैंडल मार्च निकालेंगे। इसका नेतृत्व यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार इंदोरिया करेंगे।
यूनियन का कहना है कि, रेलवे स्टेशनों पर पार्सल की लोडिंग और अनलोडिंग करने वाले ये मजदूर पिछले 40-50 सालों से रेलवे के लिए काम कर रहे हैं। इन मजदूरों को भारतीय रेलवे से कोई वेतन या सुविधा नहीं मिलती बल्कि उनकी रोजी-रोटी प्राइवेट कंपनियों से मिलने वाली मजदूरी पर निर्भर है। अगर रेलवे बोर्ड का यह नया आदेश लागू हुआ तो हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। भारतीय रेलवे पहले भी इस तरह के फैसले ले चुका है। इससे मजदूरों को हड़ताल करनी पड़ी थी। हालांकि तब मजदूरों के संघर्ष की वजह से वे अपनी नौकरी बचाने में कामयाब रहे थे। अब एक बार फिर रेलवे बोर्ड ने मजदूरों को हाशिए पर लाने की तैयारी कर ली है ,जिससे उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
मजदूरों का आरोप है कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं, लेकिन रेलवे बोर्ड का ये निर्णय इसके विपरीत है। रेलवे अधिकारी बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब मजदूरों को बेरोजगार करने पर तुले हैं। यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार इंदोरिया ने स्पष्ट किया कि यदि रेलवे बोर्ड अपना फैसला वापस नहीं लेता तो मजदूर संघर्ष को और तेज करेंगे। सभी मजदूर 14 फरवरी को कैंडल मार्च के जरिए विरोध दर्ज कराया जाएगा और यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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यूनियन का कहना है कि, रेलवे स्टेशनों पर पार्सल की लोडिंग और अनलोडिंग करने वाले ये मजदूर पिछले 40-50 सालों से रेलवे के लिए काम कर रहे हैं। इन मजदूरों को भारतीय रेलवे से कोई वेतन या सुविधा नहीं मिलती बल्कि उनकी रोजी-रोटी प्राइवेट कंपनियों से मिलने वाली मजदूरी पर निर्भर है। अगर रेलवे बोर्ड का यह नया आदेश लागू हुआ तो हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। भारतीय रेलवे पहले भी इस तरह के फैसले ले चुका है। इससे मजदूरों को हड़ताल करनी पड़ी थी। हालांकि तब मजदूरों के संघर्ष की वजह से वे अपनी नौकरी बचाने में कामयाब रहे थे। अब एक बार फिर रेलवे बोर्ड ने मजदूरों को हाशिए पर लाने की तैयारी कर ली है ,जिससे उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
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मजदूरों का आरोप है कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं, लेकिन रेलवे बोर्ड का ये निर्णय इसके विपरीत है। रेलवे अधिकारी बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब मजदूरों को बेरोजगार करने पर तुले हैं। यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार इंदोरिया ने स्पष्ट किया कि यदि रेलवे बोर्ड अपना फैसला वापस नहीं लेता तो मजदूर संघर्ष को और तेज करेंगे। सभी मजदूर 14 फरवरी को कैंडल मार्च के जरिए विरोध दर्ज कराया जाएगा और यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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