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What is Qutub Minar Controversy: क्या 27 मंदिरों को तोड़कर बनी कुतुब मीनार, कहां से आईं परिसर में देवताओं की मूर्तियां?
Tue, 24 May 2022 06:05 PM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Tue, 24 May 2022 06:05 PM IST
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कुतुब मीनार
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी की ज्ञानवापी औ मथुरा की ईदगाह मस्जिद के बाद अब कुतुब मीनार का मामला भी कोर्ट पहुंच गया है। कुतुब मीनार में पूजा के अधिकार को लेकर दिल्ली के साकेत कोर्ट में एक याचिका डाली गई है। याचिका में 27 जैन और हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग की गई है। याचिकाकर्ता परिसर में पूजा का अधिकार देने की भी मांग कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसका विरोध किया है। कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ASI ने कहा है कि कुतुब मीनार एक निर्जीव स्मारक है और इस पर किसी भी धर्म पूजा-पाठ के लिए दावा नहीं कर सकता। एएमएएसआर एक्ट 1958 के तहत किसी भी निर्जीव इमारत में पूजा शुरू नहीं की जा सकती। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी अपने 27 जनवरी 1999 के आदेश में ये बात कही है।आखिर कुतुब मीनार से जुड़ा विवाद क्या है? क्या ये सच में हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है? कुतुब मीनार के अंदर पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग क्यों हो रही है? कुतुब मीनार का इतिहास क्या कहता है? मीनार के अंदर क्या है? आइये जानते हैं....
कुतुब मीनार को लेकर मौजूदा विवाद क्या है?
ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर धर्मवीर शर्मा ने हाल ही में दावा किया कि कुतुब मीनार को राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था न कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने। उनके मुताबिक ये मीनार सन टावर है जिसे 5वीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के विक्रमादित्य ने बनवाया था। उन्होंने कहा कि ये मीनार 25 इंच झुकी हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे सूर्य का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था। इस क्षेत्र को विष्णु पद पहाड़ी के रूप में जाना जाता था, जहां उस समय के अवशेष हैं जब चौहान, तोमर, प्रतिहार राज्यों ने शासन किया था। 21 जून को जब सूर्य आकाश में जगह बदलता है तो भी कुतुब मीनार की उस जगह पर आधे घंटे तक छाया नहीं पड़ती। यह विज्ञान और आर्कियोलॉजिकल फैक्ट है। इसके दरवाजे नॉर्थ फेसिंग हैं, ताकि इससे रात में ध्रुव तारा देखा जा सके।
इससे पहले 10 मई को हिंदू संगठन के नेताओं ने मीनार में हनुमान चालीसा का पाठ करने का एलान किया था। हालांकि, इसके पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कुतुब मीनार का नाम बदलकर विष्णु स्तंभ कर दिया जाए। विश्व हिंदू परिषद (VHP) का भी दावा किया है कि 73 मीटर ऊंचा स्ट्रक्चर विष्णु स्तंभ था। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दावा किया कि ऐतिहासिक स्तंभ हिंदू शासक के समय में भगवान विष्णु के मंदिर पर बनाया गया था। बाद में मुस्लिम शासकों ने 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़कर इसके कुछ हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया और नाम बदलकर कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद कर दिया।
विवाद कितना पुराना है?
दरअसल, मीनार की दीवारों पर सदियों पुराने मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई पड़ते हैं। इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर की वास्तुकला मौजूद है। इसे मीनार के आंगन में साफ देखा जा सकता है। मीनार के अंदर भगवान गणेश और विष्णु की कई मूर्तियां हैं। कुतुब मीनार के प्रवेश द्वार पर एक शिलालेख है। इसमें प्रयुक्त खम्भे और अन्य सामाग्री 27 हिन्दू और जैन मंदिरों को ध्वस्त करके प्राप्त की गई थी।
बीबीसी को दिए इंटरव्यू में इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं, 'इसमें कोई शक नहीं है कि ये मंदिर का हिस्सा हैं। ये जो मंदिर थे, ये वहीं थे या आसपास में कहीं थे, इस पर लंबे समय से चर्चा होती रही है।' हालांकि, इतिहासकार बीएम पांडेय की राय इस पर अलग है। उन्होंने कुतुब मीनार पर एक पुस्तक लिखी है। इसका नाम 'कुतुब मीनार एंड इट्स मोन्यूमेंट्स' है। इसमें वह लिखते हैं, 'जो मूल मंदिर थे वो यहीं थे। यदि आप मस्जिद के पूर्व की ओर से प्रवेश करते हैं, तो वहां जो स्ट्रक्चर है, वो असल स्ट्रक्चर है। मुझे लगता है कि असल मंदिर यहीं थे। कुछ इधर-उधर भी रहे होंगे, जहां से उन्होंने स्तंभ और पत्थर के अन्य टुकड़े लाकर उनका इस्तेमाल किया।'
कुतुब मीनार का इतिहास
भारत की सबसे ऊंची मीनार कुतुब मीनार दिल्ली के महरौली इलाके में छतरपुर मंदिर के पास है। यह विश्व धरोहर में शुमार है, जिसका निर्माण 12वीं और 13वीं शताब्दी के बीच में कई अलग-अलग शासकों द्धारा करवाया गया है। इसकी शुरुआत 1193 ई. में दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। कुतुबुद्दीन ने मीनार की नींव रखी, इसका बेसमेंट और पहली मंजिल बनवाई।
कुतुबद्दीन के शासनकाल में इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद कुतुबद्दीन के उत्तराधिकारी और पोते इल्तुमिश ने मीनार की तीन और मंजिलें बनवाईं। साल 1368 ई. में मीनार की पांचवीं और अंतिम मंजिल का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने करवाया। कहा जाता है कि 1508 ई. में आए भयंकर भूकंप की वजह से कुतुब मीनार काफी क्षतिग्रस्त हो गई। तब लोदी वंश के दूसरे शासक सिकंदर लोदी ने इसकी मरम्मत करवाई थी। इस मीनार के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। इसके अंदर गोल-गोल करीब 379 सीढ़ियां हैं।
दायर को चुकी है याचिका
कुतुब मीनार में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों की हालात को लेकर राज्यसभा के पूर्व सांसद और भाजपा नेता तरुण विजय ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को पत्र लिखा था। उन्होंने कुतुब मीनार परिसर में भगवान गणेश की उल्टी प्रतिमा और एक जगह उनकी प्रतिमा को पिंजरे में बंद होने की बात कही थी। विजय ने कहा था कि ऐसा करके हिंदू भावनाओं को अपमानित किया जा रहा है। विजय ने इन प्रतिमाओं को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखवाने की मांग की थी।
इसके पहले पिछले साल दिल्ली की एक अदालत में एक याचिका दायर हुई थी। इसमें मांग की गई थी कि जिन 27 मंदिरों को तोड़कर ये कुतुब मीनार बनाया गया था, उनका जीर्णोद्धार कराया जाना चाहिए। ये याचिका हिंदू देवता भगवान विष्णु, जैन देवता तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और अन्य की ओर से दायर की गई थी। दीवानी न्यायाधीश नेहा शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था, 'इस बात से सहमत हूं कि अतीत में कई गलतियां हुईं हैं, लेकिन ऐसी गलतियां हमारे वर्तमान और भविष्य की शांतिभंग करने का आधार नहीं हो सकती है।' इसके बाद कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी।