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100 Days: क्या विकसित देश की राजधानी बनने को तैयार है दिल्ली, रेखा गुप्ता की सरकार कितनी मददगार?

Thu, 29 May 2025 03:29 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 29 May 2025 03:29 PM IST
सार

रेखा गुप्ता सरकार के पहले सौ दिन के कामकाज को देखें तो साफ संकेत मिलता है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को हकीकत बनाने के लिए सही दिशा में और एक सोची-समझी रणनीति के साथ कदम उठा रही है।

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Is Delhi ready to become the capital of a developed country, how helpful is Rekha Sharma government?
भाजपा विधायक रेखा गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया घूमने वाले भारतीयों के मन में एक कसक हमेशा रहती है कि काश उनके देश की राजधानी दिल्ली भी विकसित देशों की राजधानी जैसी होती। हरियाली, साफ-स्वच्छ यमुना, प्रदूषण से मुक्त हवा, ट्रैफिक जाम से मुक्त सड़कें, आवागमन के तेज सुविधाजनक सर्व सुलभ साधन, ऊंची-ऊंची इमारतें, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षा और खेल के परिसर, सुंदर और चमकदार एम्यूजमेंट पार्क, बड़े पांच सितारा अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त होटल इसकी पहचान होते तो बेहतर होता। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ऐसी ही दिल्ली बनाने का वादा किया था। क्या दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार इसी दिशा में काम कर रही है?

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रेखा गुप्ता सरकार के पहले सौ दिन के कामकाज को देखें तो साफ संकेत मिलता है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को हकीकत बनाने के लिए सही दिशा में और एक सोची-समझी रणनीति के साथ कदम उठा रही है। यमुना की सफाई हो या गरीबों को आवास सुविधा देते हुए झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का काम जारी है। बाजारों में अवैध रेहड़ी-पटरियों को हटाकर फुटपाथों-सड़कों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। 
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वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने, नए सुलभ देवी बसों का संचालन और मेट्रो के नए विस्तार को हरी झंडी मिल चुकी है। कूड़े के निस्तारण और हरियाली बढ़ाने के प्रयासों को भी शुरू किया जा चुका है। नए विश्वविद्यालय, शैक्षणिक परिसर खोलने को अनुमति मिल चुकी है। झीलों के पुनरुद्धार के लिए योजना पर काम चल रहा है। दिल्ली को पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम चल रहा है। इन कार्यों का जमीनी असर दिखाई देने में समय लगेगा, लेकिन रेखा गुप्ता सरकार ने हर समस्या को सुलझाने के लिए कदम उठाए हैं। 
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झुग्गियों की चुनौती
दिल्ली की सबसे बड़ी चुनौती यहां 1760 के करीब अवैध झुग्गी-बस्तियां हैं। दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए और यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए सरकार को इन बस्तियों का उसी तर्ज पर विकास करना होगा जिस तर्ज पर मुंबई की धारावी का विकास किया जा रहा है। यानी गरीब झुग्गी-बस्तियों की उन्हीं जगहों पर ऊंची-ऊंची बहुमंजिला इमारतें बनाई जाएं। उनमें गरीबों को आवास दिए जाएं, और शेष भूखंड का इस्तेमाल विकास के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाए। 

यमुना की सफाई की चुनौती
यमुना में गंदा पानी किसी भी कीमत पर न गिरे, ऐसा उपाय किए बिना यमुना को साफ नहीं किया जा सकता। दिल्ली सरकार ने नजफगढ़ नाले को लेकर एक योजना तैयार कर दी है। इस पर काम चल रहा है। लेकिन सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि वह एक साथ दिल्ली के सभी बड़े 22 नालों पर बड़े एसटीपी विकसित करे जो पानी को शोधित करने का काम करें।

वायु प्रदूषण को कम करने की चुनौती
सरकार ने पुराने वाहनों को सड़कों पर हटाने, उन्हें ईंधन न देने और नए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ाने की नीतियां बनाई हैं। मेट्रो, देवी बसों और ई-वाहनों को बढ़ावा देकर वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर आधे किलोमीटर पर सर्वसुलभ सस्ता और उपयोगी सार्वजनिक वाहन उपलब्ध कराकर ही निजी वाहनों को सड़कों से कम किया जा सकता है। सरकार को विशेष स्थानों पर नो वेहिकल जोन बनाने और निजी वाहन रखने पर बड़ा चार्ज लगाने से नहीं चूकना चाहिए। 

कूड़ा प्रबंधन अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी की आवश्यकता
कूड़ा प्रबंधन दुनिया के हर देश की समस्या बन चुका है। लेकिन यूरोपीय देशों ने यह दिखाया है कि यदि बेहतर प्रबंधन किया जाए तो इस समस्या को कम किया जा सकता है। कॉलोनी से कूड़ा इकट्ठा करने के स्तर पर ही सूखे-गीले कूड़े को अलग करने और इसके निस्तारण के लिए एजेंसियों को दक्ष किया जाना चाहिए। कूड़े से बिजली, सड़क और ईंटें बनाने की तकनीकी का बेहतर उपयोग करना चाहिए। 

साफ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा   
साफ-स्वच्छ नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देकर दिल्ली की बिजली निर्भरता कम की जा सकती है। सरकार के स्तर पर सभी सार्वजनिक और बड़ी निजी इकाइयों में जल प्रबंधन की तरह सौर ऊर्जा उपकरणों के उपयोग को अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को प्रोत्साहन देने वाली नीति को इस्तेमाल करना चाहिए।

स्वास्थ्य के मोर्चे पर बेहतर काम
रेखा गुप्ता सरकार ने लोगों को दस लाख रूपये तक का मुफ्त इलाज कराने की योजना पर अमल कर दिया है। अभी इसके दायरे में श्रमिकों को भी लाने का काम चल रहा है। रेखा गुप्ता ने अस्पतालों में बेड्स की सुविधा बढ़ाने और नए अस्पतालों के निर्माण को भी हरी झंडी दे दी है। हर गली-मुहल्ले तक आरोग्य मंदिर खोलने की दिशा में भी काम चल रहा है। स्वास्थ्य की दिशा में सरकार ने बेहतर काम किया है। 

जनभागीदारी सुनिश्चित हो
कोई भी शहर लोगों की सक्रिय भागीदारी के बिना साफ नहीं हो सकता। इसलिए लोगों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना होगा। ऐसा न करने वालों पर आर्थिक और सामाजिक दंड लगाया जाना चाहिए जिससे वे दिल्ली को साफ-सुथरा रखने के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। मेट्रो जैसे संस्थाओं ने यह दिखाया है कि इसी दिल्ली के लोगों में जिम्मेदारी से सेवाओं का उपभोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। यदि सरकार, पुलिस, नागरिक सोसाइटी और अन्य लोग समन्वित प्रयास करें तो दिल्ली की छवि को बदला जा सकता है। रेखा गुप्ता सरकार की कोशिशें इस दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं। 


जरूरतमंदों को ही मिले मदद, ये कुछ चुनौतियां बाकी
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने कई बड़ी योजनाओं पर अभी तक कोई काम नहीं किया है। होली-दिवाली पर मुफ्त गैस सिलेंडर देने की योजना पर अमल नहीं हुआ है। बिजली-पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। भाजपा ने चुनावों के समय महिलाओं-बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। इसी तरह महिलाओं-बुजुर्गों-छात्रों को मुफ्त परिवहन के पास देने और 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन इनमें कई योजनाओं पर अभी काम नहीं हुआ है। माना जा सकता है कि सौ दिन के अंदर में सरकार ने कई अहम मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया है। अन्य कार्यों को भी समय रहते पूरा किया जाना है।  

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