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स्वास्थ्य: अब घर बैठे होगी आयरन की जांच,पीएम एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत तैयार होगी स्वदेशी किट

Tue, 21 Jan 2025 04:02 AM IST
शिव शुक्ला परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 21 Jan 2025 04:02 AM IST
सार

आईसीएमआर ने बताया कि अमेरिका से तकनीक हस्तांतरित होने के बाद अब भारत में ही इसके जरिए जांच किट्स का उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए आईसीएमआर ने देश की प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगा है। हालांकि इसमें शर्त यह है कि इन किट्स का व्यवसायीकरण नहीं किया जाएगा।

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Iron test will be done at home, indigenous kit will be prepared under PM Anemia Mukt Bharat program
एनीमिया की समस्या - फोटो : istock

विस्तार

कोरोना वायरस की जांच की तरह ही जल्द ही लोग घर बैठे आयरन की जांच भी कर सकेंगे। इसे इस्तेमाल करना न सिर्फ आसान होगा बल्कि काफी सस्ता भी होगा। अमेरिका ने एक समझौते के तहत यह नई तकनीक एनीमियाफोन आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को सौंप दी है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह कोरोना महामारी के समय लोगों के पास घर बैठे जांच की सुविधा पहुंची, उसी तरह आयरन और हीमोग्लोबिन की जांच भी संभव होगी। उन्होंने बताया कि सात नवंबर, 2024 को भारत ने अमेरिका के साथ समझौते के सभी दस्तावेजों को पूरा कर लिया है। अब हम इस तकनीक से किट्स का उत्पादन करने की प्रक्रिया में है। हमारे इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों से लेकर महिलाएं, गर्भवती महिलाएं और युवा वर्ग को कवर करना है। ताकि जल्द से जल्द इस चुनौती को पूरा किया जाए। जानकारी के अनुसार, अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय ने करीब एक दशक की मेहनत के बाद इस नई तकनीक एनीमियाफोन को खोजा है। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने रक्त में आयरन और हीमोग्लोबिन की मात्रा माप सकता है।
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भारत में बनेगी स्वदेशी किट
आईसीएमआर ने बताया कि अमेरिका से तकनीक हस्तांतरित होने के बाद अब भारत में ही इसके जरिए जांच किट्स का उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए आईसीएमआर ने देश की प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगा है। हालांकि इसमें शर्त यह है कि इन किट्स का व्यवसायीकरण नहीं किया जाएगा।
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80% तक होगी सस्ती
आईसीएमआर के मुताबिक, आयरन डेफिसिएंसी (आईडी) परीक्षण के लिए एक व्यक्ति को करीब 500 से लेकर एक हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही रिपोर्ट आने में भी समय लगता है। अमेरिकी तकनीक ने इन दोनों ही बाधाओं का समाधान दे दिया है। यह बाजार में मौजूद अन्य जांच की तुलना में करीब 80 फीसदी तक सस्ती होगीं।


ग्लोबल न्यूट्रिशन असेसमेंट के अनुसार, भारत आयरन की कमी की उच्चतम दर वाले देशों में से एक है, जो महिलाओं को एनीमिया के मामले में 180 में से 170 वें स्थान पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ पोषण, शिशु और युवा पोषण पर केंद्रित प्रधानमंत्री एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को इस तकनीक के जरिए सफलता तक पहुंचाया जा सकता है।
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