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AB-PMJAY: 'आयुष्मान भारत में अयोग्य परिवारों ने भी करोड़ों का लाभ उठाया', CAG ने संसद में पेश की ऑडिट रिपोर्ट

Wed, 09 Aug 2023 10:17 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 09 Aug 2023 10:17 PM IST
सार

AB-PMJAY: कैग ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के डाटाबेस में अमान्य नाम, अवास्तविक जन्मतिथि, डुप्लीकेट स्वास्थ्य पहचान पत्र और अवास्तविक परिवार के आकार सहित कई विसंगतियों को उजागर किया है।

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'Invalid names, unrealistic DOBs': CAG flags discrepancies in Ayushman Bharat database
PMJAY, Ayushman Bharat - फोटो : Social Media

विस्तार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के डाटाबेस में अमान्य नाम, अवास्तविक जन्मतिथि, डुप्लीकेट स्वास्थ्य पहचान पत्र और अवास्तविक परिवार के आकार सहित कई विसंगतियों को उजागर किया है। मंगलवार को संसद में पेश ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि अयोग्य परिवारों को पीएमजेएवाई लाभार्थियों के रूप में पंजीकृत पाया गया और उन्होंने योजना के तहत 0.12 लाख रुपये से 22.44 करोड़ रुपये के बीच लाभ उठाया।

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इस रिपोर्ट में सीएजी ने दावा किया है कि एक ही मोबाइल नंबर पर कई लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया। 7.49 लाख लोग तो सिर्फ एक मोबाइल नंबर 9999999999 पर लाभार्थियों के रूप में पंजीकृत हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि उसे डाटाबेस में कई अयोग्य परिवार पीएमजेएवाई लाभार्थी के रूप में पंजीकृत मिले हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, 7.87 करोड़ लाभार्थी परिवार पंजीकृत थे, जो 10.74 करोड़ (नवंबर 2022) के लक्षित परिवारों का 73 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पर्याप्त सत्यापन नियंत्रण नहीं होने के कारण लाभार्थी डाटाबेस में कई खामियां मिली हैं।

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'सत्यापन प्रक्रिया में मोबाइल नंबर की कोई भूमिका'
वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि सत्यापन प्रक्रिया और लाभार्थी की पात्रता तय करने में मोबाइल नंबर की कोई भूमिका नहीं है। मोबाइल नंबर सिर्फ जरूरत पड़ने पर लाभार्थियों से संपर्क करने के लिए है। यह धारणा गलत है कि कोई मोबाइल नंबर के जरिये उपचार का लाभ उठा सकता है।

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सूत्रों ने कहा, परफार्मेंस ऑडिट योजना के प्रारंभिक और आरंभिक चरणों के दौरान किया गया है। तब पंजीकरण प्रक्रिया स्वास्थ्य सेवा प्रदाता की साइट पर होती थी। डाटाबेस में मोबाइल नंबर की भी फील्ड थी और प्रधानमंत्री आयुष्मान मित्र समय बचाने और भीड़ को देखते हुए बिना सोचे समझे कोई भी संख्या दर्ज कर देते थे। इसी कारण रिपोर्ट में कई बेतरतीब नंबर सामने आए हैं।

सूत्रों ने कहा, लाभार्थियों का इलाज सिर्फ इस आधार पर नहीं रोका जा सकता है कि लाभार्थी के पास वैध मोबाइल नंबर नहीं है, या उनकी ओर से दिया गया मोबाइल नंबर बदल गया है। वैसे भी यह योजना पात्रता-आधारित है, न कि नामांकन-आधारित। यही नहीं एनएचए ने ओटीपी के साथ लाभार्थी सत्यापन के लिए तीन अतिरिक्त विकल्प यानी फिंगरप्रिंट,आईरिस स्कैन और फेस-प्रमाणीकरण भी प्रदान किए हैं। जिनमें से फिंगरप्रिंट आधार प्रमाणीकरण का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

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