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भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर इजराइल के इस सिस्टम की मदद से नहीं बच सकेंगे घुसपैठिये
Wed, 06 Mar 2019 05:45 PM IST
तिवारी अभिषेक
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Wed, 06 Mar 2019 05:45 PM IST
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को असम के धुबरी जिले में बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी का शुभारम्भ किया
- फोटो : amar ujala
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भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर घुसपैठ रोकने के लिए अब इजरायली सिस्टम की मदद ली जाएगी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद इजरायल जाकर इस सिस्टम की खासियत देखकर आए थे। उन्होंने मंगलवार को असम के धुबरी जिले में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) की शुरुआत की है। सीआईबीएमएस के तहत बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी के जरिए बॉर्डर की सुरक्षा को पुख्ता किया जाएगा।
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बता दें कि बांग्लादेश के साथ लगती 4,096 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपी गई है। इस बॉर्डर पर कई इलाके ऐसे हैं, जहां भौगोलिक बाधाओं के कारण फेंसिंग (बाड़) लगाना संभव नहीं है। खासतौर पर असम के धुबरी जिले का वह 61 किलोमीटर लंबा सीमा क्षेत्र, जहां से ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में प्रवेश करना आरंभ करती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियों का विषम परिक्षेत्र सीमा निगरानी को एक मुश्किल और चुनौती भरा कार्य बना देता है।
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विशेष रूप से बरसात के मौसम में बीएसएफ को घुसपैठ रोकने के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पशु तस्कर और दूसरे घुसपैठिये भी बरसात का इंतजार करते रहते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए गृह मंत्रालय ने दो साल पहले तकनीकी मदद लेने का निर्णय लिया था।
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पिछले साल पहली जनवरी से बीएसएफ की सूचना और प्रौद्योगिकी विंग ने बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नोलॉजी पर काम शुरू किया था। इसे विभिन्न निर्माताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के तकनीकी सहयोग से रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है। चूंकि इसमें सेंसर प्रणाली और कमरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, इसलिए बीएसएफ को ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलीय क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश की बिना बाड़ वाली सीमाओं की प्रभावी निगरानी में काफी मदद मिलेगी। कैमरे व सेन्सर सिस्टम हर मौसम में 24 घंटे काम करते हैं।
इस पूरे क्षेत्र को डाटा नेटवर्क पर काम करने वाली संचार प्रणाली यानी ओएफसी केबल्स, डीएमआर कम्युनिकेशन, दिन और रात निगरानी करने वाले कैमरों और घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली द्वारा कवर किया गया है। ये आधुनिक उपकरण बॉर्डर पर बीएसएफ कंट्रोल रूम को फीडबैक प्रदान करते हैं। क्रॉस बॉर्डर और सीमा क्षेत्रों में अपराधों की किसी भी संभावना को विफल करने के लिए बीएसएफ की क्विक रिएक्शन टीमों को इन उपकरणों से खासी मदद मिलेगी।