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सहारनपुर बवाल: मोबाइल इंटरनेट, मैसेजिंग और सोशल मीडिया पर रोक के आदेश
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 25 May 2017 06:42 AM IST
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मोबाइल इंटरनेट, मैसेजिंग और सोशल मीडिया पर रोक के आदेश
- फोटो : Amar Ujala
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जातीय संघर्ष को सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से हवा मिल रही है। ऐसे में संघर्ष की यह आग लगातार सुलगती ही जा रही है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को देखते हुए जिला प्रशासन ने मोबाइल पर उपलब्ध इंटरनेट सेवा, मैसेजिंग और सोशल मीडिया की सुविधाओं पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री डालने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें एफआईआर तक दर्ज हुई हैं। प्रशासन का मानना है कि जनपद के वर्तमान हालात के लिए सोशल मीडिया पर डाले जा रहे भड़काऊ और भ्रामक सामग्री भी जिम्मेदार है।
डीएम ने सीआरपीसी की धारा 144 दंड प्रक्रिया सहित 1973 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जनपद में लोक व्यवस्था कायम रखने हेतु दूर संचार सेवा प्रदाता कंपनियों को मोबाइल नेटवर्क में उपलब्ध सभी इंटरनेट, मैसेजिंग और सोशल मीडिया की सुविधाओं पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। मगर यह आदेश पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों के लिए लागू नहीं होगा। आदेश की अवहेलना करने वाली कंपनी के विरुद्घ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की गई है। उधर, एडीएम-प्रशासन एसके दूबे ने इस तरह के आदेश की जानकारी न होने की बात कही है।
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सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री डालने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें एफआईआर तक दर्ज हुई हैं। प्रशासन का मानना है कि जनपद के वर्तमान हालात के लिए सोशल मीडिया पर डाले जा रहे भड़काऊ और भ्रामक सामग्री भी जिम्मेदार है।
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डीएम ने सीआरपीसी की धारा 144 दंड प्रक्रिया सहित 1973 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जनपद में लोक व्यवस्था कायम रखने हेतु दूर संचार सेवा प्रदाता कंपनियों को मोबाइल नेटवर्क में उपलब्ध सभी इंटरनेट, मैसेजिंग और सोशल मीडिया की सुविधाओं पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। मगर यह आदेश पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों के लिए लागू नहीं होगा। आदेश की अवहेलना करने वाली कंपनी के विरुद्घ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की गई है। उधर, एडीएम-प्रशासन एसके दूबे ने इस तरह के आदेश की जानकारी न होने की बात कही है।
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