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योग की खुशबू से महका मजार ए शरीफ, अफगानिस्तान में इस तरह हो रहा लोकप्रिय

Fri, 21 Jun 2019 07:25 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Fri, 21 Jun 2019 07:25 PM IST
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International Yoga Day 2019: How Yoga become popular in an Islamic country
अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के अंदर योग करते लोग - फोटो : अमर उजाला

ऑस्ट्रेलिया के ‘इंस्टिट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस’ की हालिया रिपोर्ट में अफगानिस्तान को दुनिया का सबसे अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है। लेकिन योग की खुशबू इस अशांत पहाड़ी क्षेत्र में भी शांति पाने का एक अहम माध्यम बनकर उभरी है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2019) पर अफगानिस्तान के मजार ए शरीफ में योग का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के शीर्ष अधिकारियों के अलावा अफगानिस्तान सरकार के अधिकारियों, अफगानी युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग जनों ने भाग लिया। कार्यक्रम के योग प्रशिक्षक गुलाम असकर जैदी 2017 से यहां लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और अब तक हजारों अफगानी लोगों को योग सिखा चुके हैं। 

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जैदी से प्रशिक्षित युवा अब अपने स्तर पर भी अफगानी लोगों को योग का प्रशिक्षण देना शुरू कर चुके हैं। उनके कार्यक्रम मजार शरीफ और आसपास के इलाकों के स्कूलों में चलाए जा रहे हैं। इससे यहां की आने वाली पीढ़ी योग को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ रही है और भविष्य में उसके और अधिक लोकप्रिय होने की संभावनाएं खुल रही हैं। मजार शरीफ में योग की लगातार बढ़ रही लोकप्रियता देख जैदी को लग रहा है कि शीघ्र ही जीवन जीने की यह कला यहां के लोगों में रचबस जाएगी। 

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कैसे कराते हैं योग

गुलाम असकर जैदी ने अमर उजाला को बताया कि इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के माध्यम से 2017 में उनकी नियुक्ति अफगानिस्तान में योग सिखाने के लिए की गई थी। शुरुआत में भारतीय दूतावास के लोगों ने ही इसके प्रति अपनी इच्छा जताई थी, लेकिन धीरे-धीरे इसके प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा और आज वे हजारों लोगों को अफगानिस्तान में योग का प्रशिक्षण दे चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2015 में ही 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया था। इसके हर साल होने वाले कार्यक्रम और मीडिया में प्रचार के कारण इसके प्रति लोगों में जागरुकता पैदा हुई है। इससे अफगानिस्तान में भी उन्हें योग को बढ़ावा देने में मदद मिली।

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देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में योग और स्वास्थ्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गुलाम असकर जैदी ने बताया कि वे छोटे-छोटे ग्रुप में लोगों को योग सिखाते हैं। महिलाओं के प्रति विशेष संवेदनशील समाज होने के कारण वे महिलाओं के लिए अलग से योग कक्षाएं चलाते हैं। वे एक पारंपरिक लिबास में आकर योग करती हैं। कई महिलाओं का पूरा परिवार एक साथ आकर योग सीखता है। उनकी कोशिश किसी संस्था या टीम के हेड को योग सिखाने की होती है जिससे वे वापस जाकर अपनी संस्था/टीम के लोगों को योग सिखा सकें। वे अब तक सैकड़ों स्कूल के विशेष बच्चों, अध्यापकों, खेल की टीमों के कोच और कप्तानों को योग का प्रशिक्षण दे चुके हैं। आज यहां पर ‘मजार योग फेडरेशन’ की स्थापना हो चुकी है जिससे भारी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं।

 

International Yoga Day 2019: How Yoga become popular in an Islamic country
अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के अंदर योग करते लोग - फोटो : अमर उजाला

समस्याओं का खोजा निदान

योग और नमाज विषय पर शोध कर रहे गुलाम असकर जैदी ने बताया कि एक इस्लामिक देश होने के कारण यहां के मुस्लिम समाज में भी योग के प्रति अनेक पूर्वाग्रह हैं। लेकिन चूंकि वे स्वयं इस्लामिक स्टडीज में उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, वे लोगों को यह समझाने में सफल रहे हैं कि मानव शरीर एक है, इसके काम करने का एक विज्ञान होता है। इसमें आई परेशानियों का इलाज एलोपैथी से किया जाए या होम्योपैथी से, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। योग भी अनेक विधाओं में से एक है जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जैदी के मुताबिक उन्होंने ओम और योग मन्त्रों के उच्चारण के समान ध्वनि वाले कुरआन के शब्दों/आयतों से उनका समन्वय स्थापित कर लोगों को सिखाया। अजान की ध्वनि और नमाज की मुद्रा को योग से जोड़कर लोगों को दिखाया। इसका बड़ा व्यापक असर हुआ और अब लोग योग को ह्रदय से स्वीकार करने लगे हैं। 

अनेक भारतीय पुलिस सेवा के महकमे और भारतीय सेना के राजपूत रेजिमेंट के जवानों को योग सिखा चुके गुलाम अस्कर जैदी के मुताबिक योग के प्रवर्तक महर्षि पतंजलि ने कहा है कि जहां ध्यान लगे, वहीं लगाइए. एक शुरुआत कीजिए। धीरे-धीरे यह ईश्वर से सानिध्य स्थापित करने लगता है। उन्होंने इसी सूत्र वाक्य को अपनाया और इसका सकारात्मक परिणाम भी उन्हें मिला है। 

अफगानी छात्रों को भारत से उम्मीद

योग धीरे-धीरे अफगानी छात्रों के प्रिय विषय के रूप में स्थापित होता जा रहा है। प्राथमिक रूप से वे इसका प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। आज अफगानिस्तान में सैकड़ों की संख्या में ऐसे छात्र हैं जो योग का विशेष कोर्स करना चाहते हैं, योग पर डिग्री लेना चाहते हैं और इस पर शोध करना चाहते हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इन छात्रों के मंसूबे कामयाब नहीं हो रहे हैं। अगर सरकार या किसी संस्था के द्वारा इन्हें आर्थिक सुविधा मुहैया कराई जा सके तो ये छात्र भारतीय योग के भविष्य के राजदूत बन सकते हैं। 

इन्होने लिया कार्यक्रम में हिस्सा

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर के निवासी गुलाम असकर जैदी ने बताया कि मजार ए शरीफ में गुरुवार को ही अंतर्राष्ट्रीय दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को संपन्न कराने में काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया शिवजी तिवारी ने विशेष योगदान दिया। उन्होंने इस अवसर पर एक योग टी-शर्ट भी जारी की। उनके अलावा इस कार्यक्रम में बलख प्रोविंसियल काउंसिल के चेयरमैन डॉक्टर अफजल हदीद, डिप्टी गवर्नर शुजाउद्दीन शुजा, सूचना एवं संस्कृति निदेशक सालेह मुहम्मद खलीक और मिनिस्ट्री ऑफ फोरेन अफेयर्स के डिप्टी डायरेक्टर नूरुल हक और पॉलीक्लिनिक बल्क अस्पताल के हेड डॉक्टर अतिकुलाह अहदी ने भाग लिया। कार्यक्रम में दिव्यांग जनों के लिए अलग से विशेष योग कार्यक्रम कराए गए। 

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