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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : आज है भाषायी विविधताओं का उत्सव मनाने का पर्व

Thu, 21 Feb 2019 04:59 PM IST
Gaurav Pandey गौरव पाण्डेय, अमर उजाला
गौरव पाण्डेय, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 21 Feb 2019 04:59 PM IST
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International Mother Language Day : today is the day to celebrate linguistic diversity
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : दि डेली स्टार

आज के समय में दुनिया भर में करीब 6500 भाषाएं बोली जाती हैं। अलग-अलग स्थानों पर लोगों के संवाद करने के तरीके में बदलाव को ही भाषायी विविधता है। आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। आज का दिन दुनिया भर के विभिन्न देशों, राज्यों की मातृभाषाओं का सम्मान करने को और भाषायी व सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता का प्रसार करने को समर्पित है। 

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साल 2000 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे) घोषित किया था। इससे पहले यूनेस्को ने सन 1952 में हुए भाषा आंदोलन में अपनी मातृभाषा के लिए जान लुटा देने वाले युवाओं की स्मृति में 1999 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का एलान किया था। हर साल यह दिवस अलग थीम पर मनाया जाता है, इस बार इसकी थीम 'विकास, शांति और संधि में देशज भाषाओं के मायने' है। 
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कहते हैं कि भाषा किसी बंधन, सीमा, धर्म, जाति  की गुलाम नहीं होती। भाषा उसकी होती है जो उसे बोलता है। विभिन्न भाषाएं अपने भौगोलिक, सांस्कृतिक इतिहास को बयान करती हैं। किसी भी स्थान के असल महत्व को समझने के लिए वहां की मातृभाषा से बेहतर माध्यम कुछ नहीं हो सकता। आज का दिन हमें इस बात के लिए प्रेरित करता है कि हम अपनी मातृभाषा से प्रेम करें और दूसरी भाषाओं को भी उतना ही सम्मान दें। 

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क्या था भाषा आंदोलन

सन 1952 में पाकिस्तान सरकार मे पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में उर्दू को राष्ट्रीय भाषा बनाने की घोषणा की। ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने सरकार के इस फैसले के विरोध में विश्विविद्यालय परिसर में सभा शुरू की। वहां पहले से ही धारा 144 लागू थी। यहां विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी के साथ सशस्त्र पुलिस बल ने परिसर को घेर रखा था। 

वहां मौजूद छात्रों में से 11 ने विश्विविद्यालय के द्वाक पर पुलिस की दीवार को पार करने का प्रयास किया, पुलिस ने इसपर आंसू गैल के गोले दाग कर छात्रों को चेतावनी दी। छात्रों का एक वर्ग को वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा लेकिन अन्य को पुलिस ने घेर लिया। पुलिस ने कई छात्रों को धारा 144 का उल्लंघन करने के अपराध में गिरफ्तार कर लिया। 

गिरफ्तारी से गुस्साएं छात्रों ने पूर्वी बंगाल विधानसभा में विधायकों का मार्ग रोककर उन्हें इस मामले को विधानसभा में पेश करने का आग्रह किया। इसी दौरान आक्रोशित छात्रों का एक दल विधानसभा की इमारत में चढ़ने लगा। छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने आग के गोले फेंकने शुरू कर दिए। पुलिस की इस कार्रवाई में कई छात्रों की मृत्यु हो गई। 

इस घटना के बाद से सरकार के भाषा संबंधित फैसले का विरोध विश्वविद्यालय से निकल कर आम जनों कर पहुंच गया। लोगों ने शहर की सभी दुकानों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन आदि को बंद कर दिया और हड़ताल शुरू कर दी। 

यह आया प्रभाव

इस घटना के बाद सात मई 1954 में संविधान सभा ने बंगाली भाषा को यहां की आधिकारिक भाषा घोषित कर दिया। इसके साथ ही 29 फरवरी 1956 को बंगाली भाषा को पाकिस्तान की दूसरी आधिकारिक भाषा होने की मान्यता मिली। आज के दिन बांग्लादेश में सार्वजनिक आवास होता है। इस आंदोलन ने पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश बनने में भी अहम भूमिका निभाई थी।

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