भारत में 'असुरक्षित' रोजगार का दबदबा, श्रमिक संगठन की रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल
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मोदी सरकार का कहना है कि वो देश में बेरोजगारी दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत है और लाखों युवाओं को रोजगार मिला भी है। लेकिन विपक्ष लगातार सरकार पर रोजगार को लेकर निशाना साध रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार नहीं दिया है बल्कि भ्रम फैलाया है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) की मौजूदा रिपोर्ट पक्ष और विपक्ष दोनों की ही पोल खोलती नजर आ रही है। संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस साल बेरोजगारी की दर 3.5 फीसदी पर तो बनी रहेगी, लेकिन चिंता की बात ये है कि देश में 77 फीसदी रोजगार 'असुरक्षित' रहेंगे।
पड़ोसी देश चीन की बेरोजगारी की दर को देखें तो वहां स्थिति कुछ अलग है। चीन में इस साल बेरोजगारी की दर 4.7 फीसदी से बढ़कर 4.8 फीसदी रहेगी। वहीं असुरक्षित रोजगार के मामले में चीन भारत से कहीं बेहतर है। वहां इस साल सिर्फ 33 फीसदी रोजगार ही असुरक्षित की श्रेणी में रहेंगे।
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती की ओर
अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) की ओर से जारी 'द वर्ल्ड एंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक- ट्रेंड्स 2018' रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में करीब 5.5 फीसदी का शानदार आर्थिक विकास जारी रहेगा। दक्षिण एशिया में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने में भारतीय अर्थव्यवस्था अपना अहम योगदान दे रही है। रिपोर्ट में इस साल (2018) भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.4 फीसदी बढ़ने का अनुमान जताया गया है, जबकि पिछले साल (2017) भारत की विकास दर 6.7 फीसदी रही थी।
रोजगार में असंगठित क्षेत्र का दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पिछले 10-15 सालों में सर्विस सेक्टर में काफी मात्रा में रोजगार सृजित हुए हैं। लेकिन असली चिंता ये है कि इस मामले में असंगठित क्षेत्र और असुरक्षित रोजगार का दबदबा बना हुआ है। पिछले कुछ सालों में जिस तरह से कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़े हैं, उससे भारत समेत नेपाल, बांग्लादेश और कंबोडिया में असंगठित क्षेत्र में कामगारों की संख्या 90 फीसदी हो गई है। कृषि के अलावा कंस्ट्रक्शन और रीटेल ट्रेड में भी असंगठित रोजगार बड़ी तादाद में हैं।
क्या होता है असंगठित क्षेत्र और क्यों है इसमें रोजगार की असुरक्षा ज्यादा
असंगठित क्षेत्र में वे सारे संस्थान आते हैं जो 1948 के फैक्ट्री एक्ट के अंतर्गत नहीं आते हैं। इसका मतलब ये है कि जो बिजली का उपयोग नहीं करते हैं और अधिकतम 20 लोगों को काम दे सकते हैं। इसमें घरेलू कामकाज, कृषि, मोटर वर्कशाप, परचून की दुकानें, साईकिल मरम्मत, छपाई प्रेस और सभी प्रकार की छोटी दुकानें आती हैं। ऐसे क्षेत्रों में रोजगार की असुरक्षा ज्यादा होती है, क्योंकि इसमें लोगों को ये नहीं पता होता कि उन्हें कब काम से निकाल दिया जाएगा या कृषि ठप पड़ जाएगी या दुकानें बंद हो जाएंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र में रोजगार ज्यादा होने की वजह से देश में असुरक्षित रोजगार की दर ऊंची बनी हुई है। हालांकि रिपोर्ट का ये भी कहना है कि यह 2017 से 2019 तक 77 फीसदी पर स्थिर रहेगी। अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन की मानें तो इस साल दुनियाभर में करीब 1.4 अरब लोग असुरक्षित रोजगार की श्रेणी में हैं। इनमें 39.4 करोड़ लोग अकेले भारत में ही हैं। यह असुरक्षित रोजगार की श्रेणी में कुल लोगों की संख्या का एक चौथाई से ज्यादा है।
असंगठित क्षेत्रों में सुरक्षा की दिशा में ठोस पहल की जरूरत
श्रम ब्यूरो ने हाल ही में एक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश किया था, जिसमें कहा गया था कि हाल के दिनों में स्व-रोजगार काफी घटा है। साथ ही केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत भी रोजगार कम हुए हैं। बेरोजगारी बढ़ने की ये भी एक बड़ी वजह है। अर्थशास्त्रियों की मानें तो असंगठित क्षेत्रों जैसे कृषि, खुदरा कारोबार और लघु उद्योगों की सुरक्षा की दिशा में ठोस पहल की जरूरत है। इन क्षेत्रों को सरकार के समर्थन की आवश्यकता है, वरना आने वाले दिनों में बेरोजगारी की समस्या और भयावह रूप ले सकती है।
रोजगार पर आईएलओ की रिपोर्ट से अलग है सरकार की राय
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोकसभा में रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए कहा था कि भाजपा सरकार ने अब तक के कार्यकाल में हर क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा था कि सितंबर 2017 से मई 2018 तक नौ महीने में संगठित क्षेत्र में 50 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्रों में भी एक साल में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन का कहना है कि देश में 77 फीसदी रोजगार 'असुरक्षित' रहेंगे।
तीन साल में मुंबई में 3 लाख 60 हजार रोजगार होंगे पैदा
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में अगले तीन साल में बिक्री क्षेत्र में 3 लाख 60 हजार रोजगार पैदा हो सकते हैं। इनमें बिना सुधार के भी 90 हजार के करीब नए रोजगार पैदा होंगे। इसके अलावा बिक्री कारोबार में 15 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
कहां-कितना मिला रोजगार
पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 4 सालों में जिस तरह से पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है, उससे 1.46 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। इस साल अकेले अप्रैल महीने में 18 से 21 वर्ष के 1 लाख 87 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिला है। इसके अलावा 15 जुलाई, 2015 से शुरू हुई स्कील डेवलपमेंट परियोजना से पिछले साल तक 2.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी 4.3 लाख लोगों को नौकरी मिली है।
नीति आयोग ने भी हाल ही में एक आंकड़ा प्रस्तुत किया था, जिसमें 7 महीने में 39 लाख लोगों को रोजगार मिलने की बात कही गई थी। वहीं, सीएसओ की हालिया रिपोर्ट कहती है कि पिछले 8 महीने में 41 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।