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Nimisha Priya: धर्मगुरुओं का दखल या सरकार के प्रयास...; यमन में कैसे टली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी?

Wed, 16 Jul 2025 09:09 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Wed, 16 Jul 2025 09:09 AM IST
सार

केरल की भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या मामले में 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जानी थी। मंगलवार को फांसी की सजा को यमन सरकार ने टाल दिया। आइए जानते हैं कैसे टली निमिषा प्रिया की फांसी...?

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Interference of religious leaders or efforts of gover; How was the hanging of Nimisha Priya postponed in Yemen
निमिषा प्रिया की फांसी की सजा टली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / सोशल मीडिया

विस्तार

केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में होने वाली फांसी की सजा टल गई है। निमिषा की फांसी सजा टलने के पीछे की वजह और प्रयासों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। पहला दावा है कि केरल के एक मुस्लिम धर्मगुरु और यमन के धर्मगुरु के बीच हुई फोन कॉल के बाद मृतक तालाल अहमद के परिवार से बातचीत शुरू हुई और फांसी की सजा टल गई। जबकि सरकार का दावा है कि उसने यमनी सरकार से बात की। इसके बाद फांसी की सजा टाली गई। आइए जानते हैं कैसे निमिषा प्रिया को मिल सकी राहत?
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पहले समझते हैं क्या मामला है?
निमिषा प्रिया (38 वर्षीय) केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी है और उसे साल 2017 में यमन में अपने बिजनेस पार्टनर महदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। निमिषा को महदी की हत्या के मामले में साल 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी अंतिम अपील 2023 में खारिज हो गई। 16 जुलाई 2025 को उन्हें फांसी देने की तारीख तय की गई थी। फिलहाल निमिषा यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं। बुधवार को उनको फांसी दी जानी थी, लेकिन मंगलवार को फांसी की सजा टाल दी गई।
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मुस्लिम धर्मगुरुओं ने की पहल
भारत की ओर से लगातार निमिषा प्रिया की फांसी रुकवाने की मांग की जा रही थी, लेकिन यमन में मृतक का परिवार इसके लिए राजी नहीं था। बताया जाता है कि केरल के स्थानीय लोगों की मांग पर सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार ने यमन के प्रसिद्ध धर्मगुरु शेख उमर बिन हाफिज से फोन पर बात की।

मुसलियार के करीबी और उपमुफ्ती हुसैन सकाफी ने बताया कि भारत सरकार के निमिषा को बचाने में लाचारी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करने के बाद मुफ्ती अबूबकर ने हस्तक्षेप किया। केरल के विभिन्न राजनेताओं ने मुफ्ती से यमनी धर्मगुरु से बात करने का अनुरोध किया था, क्योंकि दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बाद मुफ्ती अबू बकर की बात को शेख उमर बिन हाफिज ने तवज्जो दी। उन्होंने अपने शार्गिदों को मृतक अब्दो महदी के परिवार से बात करने के लिए भेजा। कई दौर की बातचीत के बाद मृतक का परिवार फांसी रोकने और ब्लड मनी पर बातचीत के लिए सहमत हुआ। 

शिया और सुन्नी कनेक्शन
बताया जाता है कि बातचीत में अहम भूमिका मृतक के परिवार और यमनी धर्मगुरु के बीच सुन्नी आस्था ने भी अदा की। यमन की राजधानी सना पर शिया संप्रदाय से जुड़े हूती विद्रोहियों का प्रभाव है। इसके बाद भी सुन्नी धर्मगुरु  शेख उमर बिन हाफिज के प्रभाव के चलते सांप्रदायिक सीमाओं को तोड़ा गया और फांसी की सजा रोकी गई।


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सरकार ने अपना प्रयास बताया
निमिषा प्रिया की फांसी की सजा टालने को भारत सरकार ने अपना प्रयास बताया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि पर्दे के पीछे निरंतर और चुपचाप प्रयास चल रहे थे।  सऊदी दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि वह महीनों तक यमनी अधिकारियों के संपर्क में रहे। इस्राइल-ईरान संघर्ष के कारण बातचीत कुछ समय के लिए रुक गई थी, लेकिन तनाव कम होने के बाद, हमने तुरंत फिर से बातचीत शुरू कर दी। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि क्या एक दिन में एक फोन कॉल के जरिए फांसी रोकी जा सकती है? यह लगातार प्रयासों का स्पष्ट परिणाम है... हम महीनों से सक्रिय हैं।

ब्लड मनी पर बातचीत जारी
यमन में लागू शरिया कानून के तहत हत्या के मामलों में ब्लड मनी (मुआवजा) का विकल्प होता है। इसमें आरोपी के परिवार को मृतक के परिवार को वित्तीय मुआवजा देना होता है। अगर मृतक का परिवार यह मुआवजा स्वीकार कर लेता है, तो मौत की सजा को रोका जा सकता है। निमिषा के परिवार ने दो करोड़ रुपये ब्लड मनी की पेशकश की है। अधिकारियों का मानना है कि नए सिरे से बातचीत का रास्ता खुल गया है। ब्लड मनी या कानूनी राहत के जरिए स्थायी समाधान के लिए बातचीत चल रही है।

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