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चीन-पाकिस्तान को दहलाने आज समंदर में उतरेगी 'करंज', दुश्मनों को चकमा देकर कर देगी तबाह
एजेंसी, मुंबई
Updated Wed, 31 Jan 2018 08:57 AM IST
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करंज
- फोटो : PTI
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भारत की स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस करंज बुधवार को मुंबई के मझगांव डॉक पर लांच होगी। इस मौके पर नौसेना प्रमुख सुनील लांबा भी मौजूद रहेंगे। करंज मेक इन इंडिया के तहत बनाई गई स्वदेशी पनडुब्बी है। अपनी अत्याधुनिक तकनीक और सटीक निशाने के दम पर समंदर में यह चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा देगी। इससे पहले पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर, 2017 को और दूसरी पनडुब्बी खांदेरी को 12 जनवरी 2017 को लांच किया गया था।
बेहद ताकतवर है करंज
करंज टारपीडो और एंटी शिप मिसाइल से हमला करती है। रडार की पकड़ में नहीं आती, समंदर से जमीन पर और पानी के अंदर से सतह पर हमला करने में सक्षम है। 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची और 1565 टन वजन वाली इस पनडुब्बी में ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है। युद्ध की स्थिति में यह दुश्मन के क्षेत्र से चकमा देकर निकलने में सक्षम है।
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बेहद ताकतवर है करंज
करंज टारपीडो और एंटी शिप मिसाइल से हमला करती है। रडार की पकड़ में नहीं आती, समंदर से जमीन पर और पानी के अंदर से सतह पर हमला करने में सक्षम है। 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची और 1565 टन वजन वाली इस पनडुब्बी में ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है। युद्ध की स्थिति में यह दुश्मन के क्षेत्र से चकमा देकर निकलने में सक्षम है।
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प्रोजेक्ट पी-75
Karanj, submarine make in India
70 हजार करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट 75 के तहत 2007 में पनडुब्बी कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत मझगांव में कलवरी क्लास की छह पनडुब्बियां बन रही थीं। इसमें से तीन लांच हो चुकी हैं।
नौसेना को चाहिए ज्यादा पनडुब्बियां
समुद्र खासकर हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की प्रभावशाली स्थिति के लिए ज्यादा पनडुब्बियां चाहिए। नौसेना के पास अभी सिर्फ 13 पुरानी पनडुब्बियां हैं। हालांकि करंज को लेकर तीन नई परमाणु पनडुब्बियां मिल चुकी हैं। पर चीन के पास 56 और पाकिस्तान के पास 4-5 पनडुब्बियां हैं और वह चीन से आठ पनडुब्बियां खरीद भी रहा है। ऐसी स्थिति में दुश्मन देशों से निपटने के लिए भारत को कम से 18 इलेक्ट्रिक डीजल और छह परमाणु सबमरीन की जरूरत है।
नौसेना को चाहिए ज्यादा पनडुब्बियां
समुद्र खासकर हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की प्रभावशाली स्थिति के लिए ज्यादा पनडुब्बियां चाहिए। नौसेना के पास अभी सिर्फ 13 पुरानी पनडुब्बियां हैं। हालांकि करंज को लेकर तीन नई परमाणु पनडुब्बियां मिल चुकी हैं। पर चीन के पास 56 और पाकिस्तान के पास 4-5 पनडुब्बियां हैं और वह चीन से आठ पनडुब्बियां खरीद भी रहा है। ऐसी स्थिति में दुश्मन देशों से निपटने के लिए भारत को कम से 18 इलेक्ट्रिक डीजल और छह परमाणु सबमरीन की जरूरत है।