फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   INLD, JJP, AAP,BSP are trying to take advantage of rebellion of Congress and BJP leaders in Haryana Polls

Haryana: हरियाणा में इन दलों के लिए संजीवनी बन सकती है 'बगावत', कांग्रेस-BJP के नेताओं से क्यों बंध रही उम्मीद

Sat, 07 Sep 2024 05:38 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 07 Sep 2024 05:38 PM IST
विज्ञापन
सार
हरियाणा में इनेलो के पास एक ही मौजूदा विधायक अभय सिंह चौटाला हैं। 2019 के चुनाव में जजपा के दस विधायक थे। साढ़े चार साल तक जजपा, भाजपा सरकार में शामिल रही। चुनाव से पहले इन दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। हालांकि जजपा के अधिकांश विधायक अब दूसरे दलों में जा चुके हैं।
loader
INLD, JJP, AAP,BSP are trying to take advantage of rebellion of Congress and BJP leaders in Haryana Polls
हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा ने 67 तो कांग्रेस ने 31 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इन दोनों ही दलों में बगावत के सुर सुनाई पड़ रहे हैं। चूंकि इस चुनाव में टिकट की सबसे अधिक डिमांड कांग्रेस में है, इसलिए पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी ने अपनी पहली सूची में जो 31 प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से 28 तो मौजूदा विधायक ही हैं। मौजूदा विधायकों को टिकट देना, इसके पीछे कहीं न कहीं बगावत का डर साफ दिखाई पड़ रहा है। कांग्रेस और भाजपा नेताओं की बगावत पर इनेलो, जजपा, आम आदमी पार्टी और बसपा की नजर है। अगर यूं कहें कि ये दल, कांग्रेस व भाजपा में बगावत को अपने लिए संजीवनी मान रहे हैं, तो गलत नहीं होगा। इन दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के नाराज नेताओं से प्रदेश के क्षेत्रीय दलों को उम्मीद बंध रही है। अपनी पार्टी की टिकट देने के लिए इनेलो और जजपा ने नाराज नेताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया है। अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं होता है, तो बगावत करने वाले कई नेता 'आप' की टिकट पर ताल ठोक सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन न होने की स्थिति में वह प्रदेश की 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 



बता दें कि हरियाणा में इनेलो के पास एक ही मौजूदा विधायक अभय सिंह चौटाला हैं। 2019 के चुनाव में जजपा के दस विधायक थे। साढ़े चार साल तक जजपा, भाजपा सरकार में शामिल रही। चुनाव से पहले इन दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। हालांकि जजपा के अधिकांश विधायक अब दूसरे दलों में जा चुके हैं। इस बार इनेलो, बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। अभी तक 14 उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं। 53 विधानसभा सीटों पर इनेलो और 37 पर बसपा चुनाव लड़ेगी। 


जननायक जनता पार्टी और आजाद समाज पार्टी (एएसपी) ने चुनावी गठबंधन किया है। इनके 19 उम्मीदवारों के नाम घोषित हो चुके हैं। इनमें जजपा के 15 और एएसनी के 4 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। जजपा के दुष्यंत चौटाला उचाना कलां से तो उनके भाई दिग्विजय चौटाला, डबवाली से चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन के तहत जजपा 70 सीटों पर तो आजाद समाज पार्टी 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जजपा और इनेलो ने सभी उम्मीदवार तय नहीं किए हैं। इनकी नजर, कांग्रेस और भाजपा में बगावत करने वाले नेताओं पर है। ऐसे नेताओं से संपर्क भी किया जा रहा है। अगर इनेलो और जजपा को बगावत करने वाले नेता मिलते हैं, तो कई सीटों पर उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। ऐसे में संभव है कि ये दल, नामांकन भरने की आखिरी तारीख तक बगावत करने वाले उम्मीदवारों के आने का इंतजार करें। 

आम आदमी पार्टी भी चुनावी गठबंधन के लिए कांग्रेस के साथ बैठक कर रही है। ये अलग बात है कि प्रदेश का कांग्रेस नेतृत्व इसके पक्ष में नहीं है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस बार के चुनाव में पार्टी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस नेताओं में 'हाई कॉन्फिडेंस' है। प्रदेश की सभी 90 सीटों पर कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार हैं। एक दो सीटों को छोड़कर बाकी सीटों पर चार से पांच उम्मीदवार तगड़ी दावेदारी पेश कर रहे हैं। 90 सीटों के लिए 2500 से अधिक नेताओं ने आवेदन किया है। आम आदमी पार्टी चाहती है कि इस बार कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन हो जाए। वजह, हरियाणा में फिलहाल 'आप' का खाता नहीं खुला है। कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, ऐसे में 'आप' करीब दस सीटों पर दावेदारी कर रही है। उसे कांग्रेस की मजबूती का फायदा मिल सकता है, लेकिन कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व पांच से ज्यादा सीट नहीं देना चाहता। कांग्रेस नेताओं को मालूम है कि भविष्य में वे अपने लिए प्रदेश की सियासत में एक नया प्रतिद्वंदी खड़ा कर रहे हैं। अभी तक देश में 'आप' ने जहां भी सरकार बनाई है, वहां पर कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगी है। कुछ माह बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव हैं। दिल्ली में कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। ऐसे में कांग्रेस, दिल्ली को ध्यान में रखते हुए आप को कुछ सीटें दे सकती है। हालांकि कई बैठकों के बाद भी इन दलों के बीच गठबंधन पर सहमति नहीं बन सकी है। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कह दिया है कि अगर कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन नहीं होता है तो वे पचास सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेंगे। 

राजनीतिक जानकारों का कहना है, अगर यह गठबंधन नहीं होता है, तो 'आप' को भी, दूसरे दलों में बगावत करने वाले नेताओं का इंतजार रहेगा। मौजूदा समय में 'आप' के पास किसी भी सीट के लिए मजबूत उम्मीदवार नहीं है। ऐसी स्थिति में बगावत करने वाले नेता उसके लिए भी फायदेमंद हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की दस सीटों में से पांच कांग्रेस और पांच भाजपा के खाते में गई थीं। अन्य दलों का खाता नहीं खुल सका था। आम आदमी पार्टी को कांग्रेस के साथ गठबंधन में एक ही सीट मिली थी, लेकिन वह हार गई थी। 

छोटे दलों को ऐसे उम्मीदवारों की तलाश है, जो प्रदेश में पूर्व मंत्री या विधायक रहे हों। यही वजह है कि ये दल, अभी 90 सीटों पर एक साथ उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं कर रहे। भाजपा में चार सितंबर के बाद से ही बगावत हो रही है। नाराज नेताओं को मनाने का दौर शुरू हुआ है। शुक्रवार तक भाजपा के 70 से ज्यादा नेताओं और पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। जिन नेताओं की टिकट कट गई है, उनके रोते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कई नेताओं को दिल्ली बुलाया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, धमेंद्र प्रधान, मुख्यमंत्री नायब सैनी, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और प्रदेश संगठन महामंत्री फणींद्र नाथ शर्मा, नाराज हुए नेताओं को समझा रहे हैं। शुक्रवार देर रात तक, ऐसे नेताओं को मनाने का दौर जारी रहा। 

भाजपा, यह बात जानती है कि इस चुनाव में कांटे की टक्कर है। ऐसे में बग़ावत करने वाले नेता अगर दो-चार हजार वोट का नुकसान भी करते हैं तो वह बड़ा नुक़सान पहुंचा सकता है। कांग्रेस पार्टी की पहली सूची के बाद कई नेता नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी ने बगावत के डर से पहली सूची में नए चेहरों पर दांव नहीं लगाया। 31 में से 28 मौजूदा विधायकों को टिकट दे दिया। हालांकि कांग्रेस पार्टी की मुसीबत, अब शुरु हो सकती है। आगे जिन उम्मीदवारों की सूची जारी होंगी, उन सभी पर सहमति बन जाए, ऐसे आसार कम ही नजर आ रहे हैं। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed