NCRB Report: जानवरों के हमलों में मरने वाले 19 फीसदी बढ़े, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले, उसके बाद यूपी में
संसद में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आई हैं। मंत्रालय में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हाथियों के हमलों में सबसे ज्यादा 133 जानें झारखंड में गईं। इसके बाद ओडिशा में 112 मौतें हुईं।
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जानवरों के हमलों में मारे गए या घायलों की संख्या में वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में 19 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में सामने आए। यहां इनकी संख्या 225 दर्ज की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 182, ओडिशा में 144, तमिलनाडु में 138 और छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश में क्रमशः 114 और 113 मामले मिले। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2022 से पता चला है कि जानवरों के हमलों में 2021 के दौरान 1,264 से अधिक लोग घायल हुए या मारे गए थे। वहीं, 2022 में 19 फीसदी की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 1,510 पर पहुंच गया है।
तेंदुओं के आधी आबादी संरक्षित क्षेत्र से बाहर
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) का अनुमान है कि भारत के जंगलों में 12,000 से 14,000 तेंदुए हैं जो इस लुप्तप्राय प्राणी के हिसाब से अच्छी संख्या कही जा सकती है। हालांकि, बुरी खबर यह है कि इस आबादी का लगभग आधा हिस्सा संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रहता है और लोगों के साथ उसका संघर्ष होता रहता है।
कीटों के काटने की संख्या में 16.7 फीसदी वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक, जानवरों, सरीसृपों और कीटों के काटने की संख्या में भी 16.7 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि 2021 के मुकाबले 897 से बढ़कर 2022 में 1,077 हो गई है। n इन घटनाओं के सबसे अधिक 232 मामले राजस्थान में दर्ज किए गए। इसके बाद 190 मध्य प्रदेश में और तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश में क्रमशः 134 और 103 घटनाएं दर्ज की गईं।
हाथियों के हमलों में सबसे ज्यादा 133 लोग झारखंड में मरे
संसद में उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने लोकसभा में बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आई हैं। मंत्रालय में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हाथियों के हमलों में सबसे ज्यादा 133 जानें झारखंड में गईं। इसके बाद ओडिशा में 112 मौतें हुईं।
मानवों ने वन्य जीवों के आवास क्षेत्र पर किया कब्जा
टाइगर टास्क फोर्स के पूर्व सदस्य राजपाल सिंह के अनुसार, असल में ये मानव बस्तियां हैं, जिसने वन्य जीवों के क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर लिया है। इसके कारण वन और उसके आस-पास के क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं। बाघों जैसी बड़ी पैंथेरा प्रजातियों के विपरीत तेंदुए मानव बस्तियों के आसपास भी रह सकते हैं।