{"_id":"5c5184f3bdec2273a83b996a","slug":"information-release-on-behalf-of-laila-fernandes-wife-of-george-fernandes","type":"story","status":"publish","title_hn":"जॉर्ज फर्नांडिस का अंतिम संस्कार 31 जनवरी को, आर्मी के ट्रक से ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जॉर्ज फर्नांडिस का अंतिम संस्कार 31 जनवरी को, आर्मी के ट्रक से ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर
Wed, 30 Jan 2019 04:35 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 30 Jan 2019 04:35 PM IST
विज्ञापन
George Fernandes
- फोटो : जी पाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिवंगत जॉर्ज फर्नांडिस का अंतिम संस्कार 31 जनवरी को किया जाएगा। पत्नी लैला फर्नांडिस की ओर से जानकारी दी गई है कि सुबह 11 बजे पंचशील पार्क से जॉर्ज के पार्थिव शरीर को आर्मी के ट्रक से लोधी रोड ले जाया जाएगा। 31 जनवरी को ही दिन में तीन बजे लोधी रोड इलेक्ट्रिक क्रेमोटेरिअम में अंत्योष्टि होगी। 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पृथ्वीराज रोड क्रिश्चियन समेंट्री में अस्थि विसर्जन होगा।
विज्ञापन
बता दें कि पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने दिल्ली के मैक्स अस्पताल में आखिरी सांस ली है। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्व केंद्रिय मंत्री को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में श्रद्धांजलि दी। वह वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं।
विज्ञापन
वह आखिरी समय में अल्जाइमर से पीड़ित थे। यानी उन्हें कुछ याद नहीं रहता था। उनके परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फर्नांडिस को हाल में ही स्वाइन फ्लू हो गया था। एक सांसद के तौर पर उनका आखिरी कार्यकाल राज्यसभा में अगस्त 2009 और जुलाई 2010 के बीच में था।
विज्ञापन
फर्नांडिस आपातकाल के खिलाफ लड़ने वाले एक बड़े योद्धा थे। 1998 से 2004 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने रक्षामंत्री का पद संभाला। बिमारी के कारण वह सार्वजनिक जीवन से दूर थे। मंगलुरू के रहने वाले जॉर्ज ने 1994 में समता पार्टी बनाई थी। आपातकाल के खिलाफ संघर्ष के दौरान उन्हें ख्याति मिली थी। वह नागरिक अधिकार कार्यकर्ता थे और उन्होंने 1977 से 1980 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में बनी सरकार में केंद्रीय मंत्री का पद संभाला था।