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Bangladesh: भारतीय मुस्लिम नेताओं के प्रभावशाली समूह ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर जताया विर
Thu, 05 Dec 2024 08:54 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 05 Dec 2024 08:54 PM IST
सार
Bangladesh: सिटीजन फॉर फ्रेटरनिटी की तरफ से बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस को एक पत्र लिखा गया हैं। इस पत्र में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कठोर व्यवहार और उत्पीड़न की कड़ी निंदा की गई है।
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बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांग्लादेश में हिन्दू समाज पर हो रहे अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु को जेल भेज दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर वकील की हत्या मामले में बांग्लादेश पुलिस ने हिंदू संगठनों पर कार्रवाई की है। इस बीच भारतीय मुस्लिम नेताओं के एक प्रभावशाली समूह सिटीजन फॉर फ्रेटरनिटी ने बांग्लादेश में हिंदू समाज और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
सिटीजन फॉर फ्रेटरनिटी की तरफ से बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस को एक पत्र लिखा गया हैं। इस पत्र में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कठोर व्यवहार और उत्पीड़न की कड़ी निंदा की गई है। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व उप सेना प्रमुख ज़मीर उद्दीन शाह, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी और उद्योगपति सईद मुस्तफा शेरवानी जैसी महत्वपूर्ण हस्तियों ने इस पत्र पर साइन किए हैं।
प्रमुख हस्तियों ने अपने इस पत्र में बांग्लादेश में हुई कई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम होने के नाते हम इस तरह के गैर-इस्लामी व्यवहार से निराश और हताश हैं। बांग्लादेश में हो रही ये घटनाएं इस्लाम के मूल्यों का अपमान है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। उनकी जाति और धर्म की परवाह किए बिना सभी समाजों में उनकी रक्षा की जानी चाहिए। सबसे दुखद बात यह है कि कोई भी वकील अपने सह-धर्मवादियों के प्रतिशोध के डर से पीड़ितों का बचाव करने के लिए तैयार नहीं है।
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दरअसल, सिटीजन ऑफ फ्रेटरनिटी अपने पत्र में उस घटना का जिक्र कर रहा है जब मंगलवार को बांग्लादेश की एक अदालत में हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास की जमानत सुनवाई में किसी वकील ने उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया। इसके चलते अदालती कार्यवाही को 2 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। हिंदू धर्म गुरु चिन्मय दास को 25 नवंबर को बांग्लादेश के चटगांव से गिरफ्तार किया गया था। चिन्मय दास पर आरोप है कि उन्होंने 25 अक्टूबर को चटगांव में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान किया है। इसके चलते उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।
सिटीजन ऑफ फ्रेटरनिटी ने आगे लिखा कि, अगर बांग्लादेश ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ निंदनीय घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया तो इसे उनका मौन समर्थन माना जाएगा। हम बांग्लादेश के अधिकारियों से तत्काल और सुधारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार सभी सांप्रदायिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करेगी। वहां की हिंदू आबादी के साथ-साथ अन्य अल्पसंख्यकों को पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
गौरतलब है कि, भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अगस्त से हिंसा देखी जा रही है। अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में वहां बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार बनी है।
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सिटीजन फॉर फ्रेटरनिटी की तरफ से बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस को एक पत्र लिखा गया हैं। इस पत्र में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कठोर व्यवहार और उत्पीड़न की कड़ी निंदा की गई है। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व उप सेना प्रमुख ज़मीर उद्दीन शाह, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी और उद्योगपति सईद मुस्तफा शेरवानी जैसी महत्वपूर्ण हस्तियों ने इस पत्र पर साइन किए हैं।
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प्रमुख हस्तियों ने अपने इस पत्र में बांग्लादेश में हुई कई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम होने के नाते हम इस तरह के गैर-इस्लामी व्यवहार से निराश और हताश हैं। बांग्लादेश में हो रही ये घटनाएं इस्लाम के मूल्यों का अपमान है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। उनकी जाति और धर्म की परवाह किए बिना सभी समाजों में उनकी रक्षा की जानी चाहिए। सबसे दुखद बात यह है कि कोई भी वकील अपने सह-धर्मवादियों के प्रतिशोध के डर से पीड़ितों का बचाव करने के लिए तैयार नहीं है।
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दरअसल, सिटीजन ऑफ फ्रेटरनिटी अपने पत्र में उस घटना का जिक्र कर रहा है जब मंगलवार को बांग्लादेश की एक अदालत में हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास की जमानत सुनवाई में किसी वकील ने उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया। इसके चलते अदालती कार्यवाही को 2 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। हिंदू धर्म गुरु चिन्मय दास को 25 नवंबर को बांग्लादेश के चटगांव से गिरफ्तार किया गया था। चिन्मय दास पर आरोप है कि उन्होंने 25 अक्टूबर को चटगांव में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान किया है। इसके चलते उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।
सिटीजन ऑफ फ्रेटरनिटी ने आगे लिखा कि, अगर बांग्लादेश ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ निंदनीय घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया तो इसे उनका मौन समर्थन माना जाएगा। हम बांग्लादेश के अधिकारियों से तत्काल और सुधारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार सभी सांप्रदायिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करेगी। वहां की हिंदू आबादी के साथ-साथ अन्य अल्पसंख्यकों को पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
गौरतलब है कि, भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अगस्त से हिंसा देखी जा रही है। अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में वहां बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार बनी है।