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Inflation : पिछली तीन तिमाहियों से उच्च स्तर पर पहुंची महंगाई से निपटना भारत के लिए परीक्षा, निवेश पर असर

Sat, 29 Oct 2022 06:10 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 29 Oct 2022 06:10 AM IST
सार

भारत की मौजूदा व्यापक आर्थिक स्थिति पर भिड़े ने कहा, जोखिम अनिश्चित वैश्विक माहौल से आता है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था ने महामारी की कई लहरों से गुजरने के बाद भी विकास की राह पर वापस आने में लचीलापन दिखाया है। 

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inflation : which has reached high levels for last three quarters, test for India, impact on investment
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Istock

विस्तार

देश में उच्च महंगाई से पिछले 9 महीने से कोई राहत नहीं मिल रही है। इसका असर खपत व निवेश पर पड़ रहा है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य शशांक भिड़े ने कहा कि बाहरी दबावों यानी आयातित महंगाई की वजह से पिछली तीन तिमाहियों से खुदरा महंगाई की दर ऊंची बनी हुई है। इससे निपटने के लिए बेहतर नीतिगत प्रयास जरूरी हैं। 

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भिड़े ने कहा कि ईंधन एवं खाद्य वस्तुओं के ऊंचे दाम और अन्य क्षेत्रों पर इसके असर ने महंगाई की दर को अधिक बना रखा है। महंगाई का दबाव बहुत अधिक है। यह भारत की महंगाई से निपटने की रूपरेखा के लिए निश्चित ही एक परीक्षा है। 2022-23 की दूसरी तिमाही में महंगाई उच्च स्तर पर रही। इससे पिछली दो तिमाहियों में भी इसकी दर ऊंची रही थी। खुदरा महंगाई जनवरी, 2022 से 6 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में यह 7.41% थी।
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बाहरी दबावों का असर सीमित करने को उठाने होंगे कदम
एमपीसी सदस्य ने कहा कि बाहरी दबावों के महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर को सीमित करने के लिए कदम उठाना जरूरी है। इन मुद्दों से निपटने के लिए समन्वित नीतिगत प्रयासों, मौद्रिक नीति और अन्य आर्थिक नीतियों की जरूरत होगी। आरबीआई की मौद्रिक सख्ती यानी रेपो दर में वृद्धि का मकसद महंगाई के दबाव को कम करना होता है।

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  • रेपो दर में वृद्धि से कर्ज की लागत बढ़ गई है। इस पर कहा, कम महंगाई की उम्मीद से मांग की स्थिति में सुधार करने में मदद मिलेगी।

विकास की राह में नई चुनौतियां 

  • भारत की मौजूदा व्यापक आर्थिक स्थिति पर भिड़े ने कहा, जोखिम अनिश्चित वैश्विक माहौल से आता है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था ने महामारी की कई लहरों से गुजरने के बाद भी विकास की राह पर वापस आने में लचीलापन दिखाया है। 
  • जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, उनमें निर्यात मांग में कमी, वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव व यूक्रेन युद्ध के परिणामस्वरूप अनिश्चितता शामिल हैं।
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