महंगाई की आग: पेट्रोल डीजल के साथ आटा-दाल के भी बढ़ रहे दाम, चाय की चुस्की भी महंगी
देश में एक तरफ कोरोना वायरस ने लोगों को परेशान कर रखा है वहीं, दूसरी तरफ बढ़ती हुई महंगाई ने लोगों की हालत खराब कर दी है। पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों के बाद अब खाने की थाली भी महंगी हो गई है। रोजमर्रा के लिए उपयोग में होने वाली वस्तुओं के दाम एक वर्ष में 25 फीसदी से ज्यादा तक बढ़ गए हैं। आटा, दाल, तेल, नमक, दूध और चाय के भाव तीन से 80 रुपए तक बढ़ गए है।
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दूध की कीमतें बढ़ने से डेयरी उत्पादों और आइसक्रीम की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और उत्पादन की बढ़ती लागत के कारण महंगाई में आग लगी है। लेकिन, अगस्त माह से लोगों को इससे राहत मिलने के आसार हैं।
बता दें कि सरसों के तेल की कीमत पिछले जून में 90 से 170 रुपये प्रति किलो थी। आज उसकी कीमत 200 से लेकर 250 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, एक किलो नमक की कीमत पिछले वर्ष नौ से लेकर 25 रुपए प्रति किलो हुआ करती थी। आज एक किलो किलो नमक की कीमत 21 से 90 रुपए किलो तक हो गई है।
इसी तरह आटा और अरहर दाल की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है। पिछले साल जहां आटा 17 से लेकर 45 रुपए प्रति किलो था। आज उसकी कीमत 39 से लेकर 90 रुपए तक हो गई है। वहीं, एक किलो अरहर दाल जो पिछले साल 65 से 180 रुपए किलो थी अब उसकी कीमत 190 से 258 रुपए तक हो गई है।
चाय के दाम में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। पिछले साल चाय 120 से लेकर 450 रुपए प्रति किलो थी आज वो 299 से 625 रुपए तक हो है। विशेषज्ञों ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना महामारी और मालभाड़ा महंगा होने के कारण सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। इससे मंडियों में सामान की आवक बहुत कम हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कारण राजमर्रा में उपयोग होने वाली वस्तुओं की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोगों को अगस्त माह में थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है क्योंकि उन्हें अच्छे मानसून के साथ-साथ लॉकडाउन के प्रतिबंधों में मिल रही छूट का भी फायदा भी मिलेगा।
इस कारणों से बढ़ रहे हैं दाम
कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन का असर लोगो के खाने पीने की वस्तुओं पर भी नजर आ रहा है। पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम और मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा लागत होने से भी महंगाई बढ़ी है। इससे एक तरफ तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ी है, तो दूसरी ओर कंपनियां बढ़ती लागत का भार ग्राहकों पर भी डाल रही हैं।
राज्यों में लगे लॉकडाउन के कारण अधिकांश तेल की मिले बंद रही और इस दौरान विदेशों से भी खाने के तेल का आयात घटा है। महामारी की वजह से मिलों में काम करने वाले मजदूर कम रहे और मिलों में गेहूं की आवक घटी, जिससे डिमांड के हिसाब से सप्लाई नहीं हो पाई। जिसके कारण आटे के भाव में वृद्धि हुई है।
कोरोना संकट के बीच खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के बाद अब अमूल ने दूध की कीमतों में भी इजाफा कर दिया है। अब लोगों को दूध के लिए भी पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। बुधवार को अमूल ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। देशभर में एक जुलाई से अमूल दूध दो रुपए महंगा मिलेगा।
अमूल के एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी ने कहना है कि, खाद्य महंगाई बढ़ने से दूध की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। पैकेजिंग की लागत भी 30 से 40 फीसदी बढ़ गई है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) में भी 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा एनर्जी कॉस्ट भी 30 फीसदी बढ़ गई है।
उन्होंने आगे कहा कि इन सब चीजों के महंगे होने के कारण इनपुट कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है। दूध की कीमतों बढ़ने के बाद पनीर, मक्खन, घी, छाछ, लस्सी, आइसक्रीम के दाम में भी इजाफा हो सकता है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा जिसे इन चीजों के लिए अब पहले से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी।
इधर, मौसम अनुकूल न होने और कोरोना वायरस संक्रमण संकट की वजह से असम में चाय का उत्पादन भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसलिए इसके चलते भाव में सालाना आधार पर करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, जुलाई में चाय का उत्पादन बढ़ने के बाद इसके दामों में कमी आने की उम्मीद है।