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'संयुक्त राष्ट्र के मानव पर्यावरण कार्यक्रम में पहुंचने वाली इंदिरा गांधी अकेली प्रधानमंत्री थीं'
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Nov 2018 09:36 PM IST
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इंदिरा गांधी
संयुक्त राष्ट्र ने 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टाकहोम में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। लेकिन काफी आश्चर्यजनक रुप से भारत को छोड़ किसी भी दूसरे राष्ट्र का प्रमुख इस सम्मेलन में भाग लेने नहीं पहुंचा। भारत से इंदिरा गांधी एकमात्र विदेशी प्रधानमंत्री थीं जिन्होंने इस सम्मेलन में न सिर्फ भाग लिया, बल्कि इस मुद्दे से जुड़े गंभीर पक्षों पर अपनी राय रखी।
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उस समय दुनिया में यह माना जाता था कि पर्यावरण सिर्फ अमीर देशों की समस्य़ा है क्योंकि उनके द्वारा औद्योगिक विकास के कारण कचरा पैदा होता है। लेकिन इंदिरा गांधी ने दुनिया को बताया कि गरीबी पर्यावरण के लिए गंभीर समस्याएं पैदा करता है। अगर कोई व्यक्ति गरीब न हो, तो वह शिक्षा प्राप्त करता है और अपने लिए ज्यादा स्वास्थ्यप्रद वस्तुओं का उपयोग करता है जिससे पर्यावरण कम प्रदूषित होता है। दिल्ली कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह बातें एक प्रेसवार्ता के दौरान कहीं।
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इससे साबित होता है कि पूरी दुनिया में जब लोग पर्यावरण के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते थे, उस समय इंदिरा गांधी ने पर्यावरण को न सिर्फ गंभीरता से लिया, बल्कि इसके लिए जरुरी कदम भी उठाए। उन्होंने प्रिवेंशन एंड कंट्रोल पॉल्यूशन एक्ट 1974 पास किया था।
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उन्होंने 1980 में पर्यावरण विभाग की स्थापना की थी और चिपको आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया था। पर्यावरण के प्रति इंदिरा गांधी के इसी सहयोग को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने 1986 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार और 1987 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार की शुरुआत की थी। भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए देहरादून में इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट अकादमी की स्थापना की गई थी।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने कहा कि इंदिरा गांधी के पर्यावरण के प्रति उसी जज्बे को याद करते हुए दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन 22 नवंबर को कनाट प्लेस में एक कैंडल मार्च निकालेंगे। दिल्ली में फैले प्रदूषण के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि राजधानी के प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्यों को कोसने की बजाय उन्हें यहां का प्रदूषण कम करने की कोशिश करनी चाहिए।