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इंदिरा गांधी जन्म दिवस विशेष : साहस-संघर्ष की प्रतीक और करिश्माई व्यक्तित्व की धनी थीं इंदिरा, कार्यशैली ने बनाया जननेता

Fri, 19 Nov 2021 05:39 AM IST
Suresh Pachouri सुरेश पचौरी
Updated Fri, 19 Nov 2021 05:39 AM IST
सार

इंदिराजी की कार्यशैली ने उनके व्यक्तित्व को ऐसा करिश्माई रूप दे दिया कि वे कालांतर में देश-दुनिया की लोकप्रिय जननेता बन गईं। ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी’ से भारत की प्रधानमंत्री तक की उनकी जन-समर्पित जीवन यात्रा देश का अविस्मरणीय इतिहास बन गई।

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Indira Gandhi Birthday Special Story : Symbol of courage struggle Indira s style of work made a mass leader
इंदिरा गांधी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इंदिरा गांधी का नाम जेहन में आते ही एक ऐसी दृढ़निश्चयी विश्वनेता की तस्वीर उभरती है, जिसने राजनीति में न सिर्फ नई मिसालें गढ़ीं, बल्कि दुनिया में भारतीय लोकतंत्र के साथ ही अपने व्यक्तित्व का लोहा भी मनवाया। ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी’ से भारत की प्रधानमंत्री तक की उनकी जन-समर्पित जीवन यात्रा देश का अविस्मरणीय इतिहास बन गई।

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इंदिराजी लोकतांत्रिक समाजवाद तथा मानवीय भावना की प्रतिभाशाली शक्ति एवं ओजस्विता का प्रतिनिधित्व करती थीं। उनमें दूरदृष्टि तो थी ही, चिंतन में दृढ़निश्चय, त्वरित निर्णय क्षमता जैसे नैसर्गिक गुण भी थे। उनकी कार्यशैली ने उनके व्यक्तित्व को ऐसा करिश्माई रूप दे दिया कि वे कालांतर में देश-दुनिया की लोकप्रिय जननेता बन गईं। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता व समानता के आधार पर भारत को विश्व में शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। 
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वे लोकतांत्रिक समाजवाद की प्रणेता थीं। बैंकों और तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण और राजाओं के प्रिवीपर्स की समाप्ति से प्रगतिशील कदम थे, जिनमें समानता का सपना छिपा था। इंदिराजी ने एक बार कहा था, जब तक देश में गरीबी और असमानता है, तब तक उन्हें दूर करने के लिए कार्य करना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इंदिराजी ने गरीबी हटाओ और 20 सूत्रीय कार्यक्रम के माध्यम से देश के सामाजिक, आर्थिक ताने-बाने को मजबूत किया। 
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वह अपने जीवन काल में देश के जनजातियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहीं। 12 नवंबर 1982 को मध्यप्रदेश के अमरकंटक में आदिवासी सम्मेलन में उन्होंने कहा था, मैं चाहती हूं कि आदिवासी भाइयों की समस्याओं का समाधान हो। चिंता यह है कि आदिवासियों की सभ्यता, परंपरा कहीं खो न जाए। 

उन्होंने आश्वासनों को पूरा कर यह साबित कर दिया कि कांग्रेस की कथनी और करनी में कोई भेद नहीं है। फिरकापरस्त ताकतों और सांप्रदायिक हिंसा को समाप्त करने के लिए उन्होंने अथक संघर्ष किया और देश की एकता और अखण्डता की मजबूती के लिए अपना बलिदान दिया।

हरित क्रांति का सूत्रपात
उनके शासनकाल में महिलाओं को बराबरी का हक मिला, खेतिहर महिला मजदूरों को पुरुषों के बराबर मजदूरी का कानून बना। कृषि क्षेत्र में ‘हरित क्रांति’ का सूत्रपात हुआ। किसानों के जीवन को सुधारने के लिए परियोजनाओं से देश कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना। आज इंदिराजी हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और कार्य हमारे बीच हैं। हम उन्हें सादर नमन करते हुए उनकी जन्मतिथि पर देश की एकता और अखण्डता को बनाये रखने का संकल्प लेते हैं।


परमाणु परीक्षण से दिखाई देश की क्षमता
इंदिराजी ने परमाणु परीक्षण कर दुनिया को यह आभास कराया कि भारत के वैज्ञानिक तकनीक के किसी मामले में पीछे नहीं हैं। अगर इंदिराजी नहीं होतीं तो क्या बांग्लादेश बन सकता था? क्या सिक्किम का भारत में विलय हो सकता था? क्या श्रीलंका की हिंसक बगावत काबू में की जा सकती थी? इंदिराजी ने गुटनिरपेक्ष और रंगभेद आंदोलन तथा भूमंडल की शांति के आंदोलन में बेजोड़ निपुणता तथा महान गरिमा के साथ अपनी महती भूमिका निभाई।

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