NTPC और भोपाल गैस त्रासदी जैसी दुर्घटनाएं जिन्होंने देश को हिलाकर रख दिया
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रायबरेली के ऊंचाहार स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) के प्लांट में बुधवार दोपहर 3.40 बजे बड़ा हादसा हुआ था। इस हादसे में मरने वालों की संख्या शुक्रवार दोपहर तक 31 पहुंच गई है। 500 मेगावाट की यूनिट नंबर 6 की बॉयलर स्टीम पाइप धमाके के साथ फट गई थी, जिस वजह से यह हादसा हुआ।
रायबरेली के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। वहीं एडिशनल डायरेक्टर जनरल(लॉ एण्ड ऑर्डर) आनंद कुमार ने बताया कि इस मामले में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
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आपको बता दें कि देश में पहले भी इस तरह की कई औद्योगिक आपदाएं हुई हैं जिसमें भारी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
1944 में हुए बॉम्बे डॉक्स विस्फोट में मारे गए थे 800 लोग
आधिकारिक रिपोर्टस के मुताबिक अप्रैल 1944 में मुंबई के विक्टोरिया पार्क में हुए दो धमाकों में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हो गए थे।
24 फरवरी 1944 को जिब्राल्टर, पोर्ट सैद और कराची की वजह से एक नौका चली जोकि 12 अप्रैल को मुंबई पहुंची थी। इस नौका में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी जिसमें विस्फोट हो गया।
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1975 में हुई थी चासनला खनन दुर्घटना
झारखंड के धनबाद जिले में 1975 में हुई चासनाला खनन दुर्घटना में 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे। रिपोर्टस के मुताबिक इस दुर्घटना में 375 लोग मारे गए थे। कोयले की इस खदान में भारी मात्रा में बाढ़ का पानी भर गया था जिससे वहां काम करने वाले लोग वापस नहीं निकल पाए और उनकी डूबकर मौत हो गई। NIOS के मुताबिक बाढ़ के पानी से स्पार्क की वजह से धमाका हुआ था।
भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए थे 5 हजार से ज्यादा लोग
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 दिसंबर 1984 को भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई थी। यूनियन कार्बाइड नाम की कंपनी के कारखाने में जहरीली गैस के रिसाव की वजह से 20 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
सरकारी आंकड़े कहते हैं कि इस हादसे में मरने वालों की संख्या 5 हजार दो सौ पच्चानवे है। जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस हादसे में 20 से 25 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस रिसाव से दुर्घटना के कई साल बाद तक लोगों पर प्रभाव पड़ा और उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई।
कारखाने में मिथाइलआइसोसाइनाइट (मिक) नामक गैस का रिसाव हुआ था। जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता था। इस दुर्घटना के 33 साल बाद भी मरने वाले लोगों की संख्या को लेकर अलग- अलग मत हैं।
नवंबर 1984 में किए गए निरीक्षण के अनुसार NIOH ने बताया था कि फैक्ट्री में लगाए गये ज्यादातर सुरक्षा उपकरण काम नहीं कर रहे थे। फैक्ट्री की बहुत सारी चीजें खराब स्थिति में थीं। पाइप की सफाई करने वाले हवा के वेन्ट ने भी काम करना बन्द कर दिया था।
2009 में हुई थी कोरबा चिमनी दुर्घटना, मारे गए थे 45 लोग
23 सितंबर 2009 को छत्तीसगढ़ के कोरबा में भारत एल्युमिनियम कंपनी (बाल्को) में हुए हादसे में 45 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। बाल्को में एक बिजली संयंत्र के लिए एक चिमनी के निर्माण का काम चल रहा था।
2009 में जयपुर ऑयल डिपो में लगी आग में मारे गए थे 12 लोग
जयपुर में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के डिपो में आग लगने से 12 लोगों की मौत हो गई थी। 8 हजार किलोलीटर ऑयल के टैंक में आग लगने से 130 लोग घायल हुए थे। यह हादसा उस वक्त हुआ था जब डिपो से पाइपलाइन में पेट्रोल को ट्रांसफर किया जा रहा था।
2010 में हुई थी मायापुरी रेडियोलॉजिकल दुर्घटना
2010 में पश्चिमी दिल्ली के मायापुरी स्क्रैप यार्ड में रेडियोलॉजिकल दुर्घटना में एक शख्स को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस दुर्घटना में 8 लोग घायल हो गए थे।