फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indians became three times aware of understanding nature

और खिलवाड़ नहीं: प्रकृति को समझने में तीन गुना जागरूक हुए भारतीय

Wed, 19 May 2021 06:44 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 19 May 2021 06:44 AM IST
विज्ञापन
सार
जंगल कटने, अनियोजित मछली पकड़ने, जीव प्रजातियों और परिस्थितिकी तंत्र तबाह होने के परिणाम अब सामने आने लगे हैं।  
loader
Indians became three times aware of understanding nature
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : istock

विस्तार

हम भारतीय पर्यावरण और जैव विविधता को हो रहा नुकसान समझने के लिए करीब तीन गुना ज्यादा गूगल सर्च और अध्ययन कर रहे हैं। पौधों व प्राणियों की खत्म होती प्रजातियों के बारे में दो गुना ज्यादा चिंता करने लगे हैं। प्रकृति को कम नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों की खोज भी पिछले पांच सालों में करीब 71% बढ़ चुकी है।



ये दावे वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की इकोनामिक इंटेलिजेंस यूनिट ने नए शोध में किए हैं। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के परिप्रेक्ष्य में जारी इस रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में 2016 से 2020 के बीच पर्यावरण को लेकर चिंता जताने वाले नागरिकों की संख्या 16% बढ़ी है। विकासशील देशों में नागरिक ज्यादा सचेत होने लगे हैं। इसे 'इको अवेकनिंग' नाम दिया गया है। उन्हें पारिस्थितिकी तंत्र तबाह होने के परिणाम समझ आ रहे हैं।


डिजिटल एक्टिविज्म बढ़ा 
ट्विटर पर ही पर्यावरण के मुद्दों पर 65% ज्यादा चर्चा हो रही है। प्रकृति और जैव विविधता जैसे शब्दों का उपयोग तीन करोड़ से बढ़कर पांच हो चुका है। 

  • कई राजनेता, धार्मिक नेता और अन्य प्रभावशाली व्यक्तित्व व संगठन इस बारे में बात कर रहे हैं, जिससे 100 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पर्यावरण संरक्षण के संदेश पहुंच रहे हैं। 


भारत में 190% अधिक गूगल सर्च 

  • भारत में प्रकृति से जुड़े विषयों पर 190 % ज्यादा गूगल सर्च।
  • ट्विटर पर 2016 में 2,32,000 ट्वीट के मुकाबले 2020 में 15,00,000 ट्वीट जैव विविधता विनाश विषयों पर। 
  • आवाज अभियान में 4.80 लाख नागरिकों ने हस्ताक्षर किए।
  • अखबारों में इन विषयों पर 2016 में 1,33,888 लेख प्रकाशित हुए , 2020 में आंकड़ा 1,68,556 पहुंच गया। 
  • परिणाम अक्तूबर 2020 में नजर आया, जब महाराष्ट्र सरकार ने आरे नामक जंगलों को संरक्षित घोषित किया।


खतरे बरकरार

  •  जागरूकता बढ़ने के बावजूद प्रकृति को लेकर खतरे अभी बरकरार हैं। 
  • अमेजन बेसिन से रोजाना 150 एकड़ वन जलाए और काटे जा रहे हैं।
  • अगले कुछ दशकों में 10 लाख ज्यादा जीवों की प्रजातियां खत्म हो जाएंगी।
  • पृथ्वी पर करीब 80 लाख जीव-जंतुओं की प्रजातियां निवास करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed