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Jharkhand Train Accident: आखिर क्यों बार बार पटरी से उतर रही भारतीय रेल? कहीं ये बड़े कारण तो नहीं!
सार
Jharkhand Train Accident: इन दिनों देश में रेल हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 18 जुलाई को उत्तर प्रदेश के गोंडा में ट्रेन हादसा हुआ था। आज 13 दिन बाद यानी मंगलवार को फिर झारखंड के टाटानगर के पास चक्रधरपुर में फिर रेल हादसा हो गया।
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आखिर क्यों बार बार पटरी से उतर रही भारतीय रेल?
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इन दिनों देश में रेल हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज झारखंड के टाटानगर के पास चक्रधरपुर में फिर रेल हादसा हो गया। हावड़ा से मुंबई जा रही हावड़ा-सीएसएमटी मेल के 18 डिब्बे पटरी से उतर गए है। इस हादसे में कम से कम दो यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 50 लोग घायल हो गए। बताया जाता है कि इस रूट पर दो दिन पहले एक मालगाड़ी भी पटरी से उतरी थी। आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले 14 महीनों में चार बड़े रेल हादसे हुए हैं, जिसमें 320 से ज्यादा यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है।
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पटरी से उतरने के कारण 70% रेल हादसे!
दरअसल, भारतीय रेलवे से हर दिन एक लाख किमी से अधिक फैले देशव्यापी ट्रेक नेटवर्क पर करीब ढाई करोड़ यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाती है। साल 2019-20 के लिए एक सरकारी रेलवे सुरक्षा रिपोर्ट में पाया गया है कि 70 फीसदी रेलवे दुर्घटनाओं के लिए उनका पटरी से उतरना जिम्मेदार था, जो पिछले वर्ष 68 फीसदी से अधिक था। इसके बाद ट्रेन में आग लगने और टक्कर लगने के मामले आते हैं, जो कुल दुर्घटनाओं में क्रमश: 14 और आठ फीसदी के लिए जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट में साल 2019-20 के दौरान 33 यात्री ट्रेनों और सात मालगाड़ियों से संबंधित 40 पटरी से उतरने की घटनाएं गिनाई गईं। इनमें से 17 पटरी से उतरने की घटनाएं ट्रैक खराबियों के कारण हुईं। जबकि नौ घटनाएं ट्रेनों, इंजन, कोच, वैगन में खराबी के कारण हुईं है।
दरअसल, भारतीय रेलवे से हर दिन एक लाख किमी से अधिक फैले देशव्यापी ट्रेक नेटवर्क पर करीब ढाई करोड़ यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाती है। साल 2019-20 के लिए एक सरकारी रेलवे सुरक्षा रिपोर्ट में पाया गया है कि 70 फीसदी रेलवे दुर्घटनाओं के लिए उनका पटरी से उतरना जिम्मेदार था, जो पिछले वर्ष 68 फीसदी से अधिक था। इसके बाद ट्रेन में आग लगने और टक्कर लगने के मामले आते हैं, जो कुल दुर्घटनाओं में क्रमश: 14 और आठ फीसदी के लिए जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट में साल 2019-20 के दौरान 33 यात्री ट्रेनों और सात मालगाड़ियों से संबंधित 40 पटरी से उतरने की घटनाएं गिनाई गईं। इनमें से 17 पटरी से उतरने की घटनाएं ट्रैक खराबियों के कारण हुईं। जबकि नौ घटनाएं ट्रेनों, इंजन, कोच, वैगन में खराबी के कारण हुईं है।
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रेलवे के लिए परेशानी का सबब बने हादसे
रेलवे बोर्ड के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि ट्रेनों का पटरी से उतरना रेलवे के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। एक ट्रेन कई कारणों से पटरी से उतर सकती है। ट्रैक का रखरखाव खराब हो सकता है, कोच खराब हो सकते हैं, और गाड़ी चलाने में गलती हो सकती है। ट्रेन हादसों को रोकने के लिए ट्रेन की पटरियों का मरम्मत कार्य होते रहना बहुत जरूरी है। धातु से बनी रेलवे पटरियां गर्मी के महीनों में फैलती हैं और सर्दियों में तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सिकुड़ती है। ऐसे में इन्हें नियमित रखरखाव की जरूरत होती है। जरा सी लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ढीले ट्रैक को कसना, स्लीपर बदलना और अन्य चीजों के अलावा, चिकनाई और समायोजन स्विच। इस तरह का ट्रैक निरीक्षण पैदल, ट्रॉली, लोकोमोटिव और अन्य वाहनों द्वारा किया जाता है।
रेलवे बोर्ड के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि ट्रेनों का पटरी से उतरना रेलवे के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। एक ट्रेन कई कारणों से पटरी से उतर सकती है। ट्रैक का रखरखाव खराब हो सकता है, कोच खराब हो सकते हैं, और गाड़ी चलाने में गलती हो सकती है। ट्रेन हादसों को रोकने के लिए ट्रेन की पटरियों का मरम्मत कार्य होते रहना बहुत जरूरी है। धातु से बनी रेलवे पटरियां गर्मी के महीनों में फैलती हैं और सर्दियों में तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सिकुड़ती है। ऐसे में इन्हें नियमित रखरखाव की जरूरत होती है। जरा सी लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ढीले ट्रैक को कसना, स्लीपर बदलना और अन्य चीजों के अलावा, चिकनाई और समायोजन स्विच। इस तरह का ट्रैक निरीक्षण पैदल, ट्रॉली, लोकोमोटिव और अन्य वाहनों द्वारा किया जाता है।
इन वजहों से पटरी से उतरती हैं ट्रेनें
- ट्रेन के पटरी से उतरने की एक वजह नहीं, बल्कि कई वजहें हैं। सबसे मुख्य कारण रेलवे ट्रैक पर मैकेनिकल फॉल्ट यानी रेलवे ट्रैक पर लगने वाले उपकरण का खराब हो जाने को माना जाता है।
- इसके अलावा ये हादसे उस वक्त होते हैं, जब पटरियों पर दरार पड़ जाती हैं। वहीं, ट्रेन के डिब्बों को बांध कर रखने वाले उपकरण का ढीला होना भी इसका एक कारण हो सकता है।
- इसके अलावा एक्सेल जिस पर ट्रेन की बोगी रखी होती है, उसका टूटना भी ट्रेन के डिरेल होने की एक संभावित वजह हो सकता है।
- लगातार चलते रहने के कारण ट्रेन की पटरियों से पहियों का घिस जाना भी ट्रेन के पटरी से उतरने की वजह हो सकता है।
- गर्मी के मौसम में पटरियों के स्ट्रक्चर में कई बार बदलाव आ जाता है। इसके अलावा तेज चलती ट्रेन को तेज स्पीड से मोड़ना या फिर ब्रेक लगा देना भी ट्रेन के पटरी छोड़ने की वजह हो सकता है।
- इसे रोकने का एक ही तरीका है मरम्मत कार्य चलता रहे। थोड़ी भी गड़बड़ी नजर आने पर उसे तुरंत ठीक किया जाए।
2022 में रेल दुर्घटनाओं में 38.2% की बढ़ोत्तरी
इस मामले में अगर 2022 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट को देखें, तो साल 2022 की तुलना में 2021 में रेल दुर्घटनाओं में 38.2 फीसदी की वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 17,993 दुर्घटनाओं में से 19.4 फीसदी महाराष्ट्र में हुई, इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर रहा है। ज्यादातर हादसों की बड़ी वजह ड्राइवर की गलती, रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़, सिग्नलमैन की लापरवाही और मशीनरी खराबी आदि रहे हैं।
इस मामले में अगर 2022 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट को देखें, तो साल 2022 की तुलना में 2021 में रेल दुर्घटनाओं में 38.2 फीसदी की वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 17,993 दुर्घटनाओं में से 19.4 फीसदी महाराष्ट्र में हुई, इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर रहा है। ज्यादातर हादसों की बड़ी वजह ड्राइवर की गलती, रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़, सिग्नलमैन की लापरवाही और मशीनरी खराबी आदि रहे हैं।
हर साल किया जा रहा है 8 हजार किमी ट्रैक को अपग्रेड
संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई अनुसार, साल 2022 में लगभग 5,200 किमी नई पटरियां बिछाई गईं है। मंत्री ने कहा कि हर साल 8,000 किमी ट्रैक को अपग्रेड किया जा रहा है। वैष्णव ने बताया था कि 100 किमी/घंटा तक की गति से चलने वाली ट्रेनों को समायोजित करने के लिए अधिकांश पटरियों को अपग्रेड किया जा रहा था। एक बड़े हिस्से को 130 किमी/घंटा तक की गति के लिए बढ़ाया जा रहा था, और एक महत्वपूर्ण खंड को अपग्रेड किया जा रहा था। 160 किमी/घंटा तक की हाई स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है।
संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई अनुसार, साल 2022 में लगभग 5,200 किमी नई पटरियां बिछाई गईं है। मंत्री ने कहा कि हर साल 8,000 किमी ट्रैक को अपग्रेड किया जा रहा है। वैष्णव ने बताया था कि 100 किमी/घंटा तक की गति से चलने वाली ट्रेनों को समायोजित करने के लिए अधिकांश पटरियों को अपग्रेड किया जा रहा था। एक बड़े हिस्से को 130 किमी/घंटा तक की गति के लिए बढ़ाया जा रहा था, और एक महत्वपूर्ण खंड को अपग्रेड किया जा रहा था। 160 किमी/घंटा तक की हाई स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है।