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छोटे-मोटे हादसों के बीच पटरी पर लौटी भारतीय रेल, 18 साल में पहली बार कम हुईं 'मौतें'

Tue, 10 Apr 2018 08:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 10 Apr 2018 08:25 PM IST
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Indian Railways back on track: Number of deaths, injuries lowest in 18 years

रेल दुर्घटनाओं की खबरें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, ऐसे में एक रिपोर्ट आपको चौंका देगी। दरअसल रेलगाड़ियों से होने वाली मौतें और चोटें भारत में पिछले 18 वर्षों के मुकाबले सबसे कम दर्ज हुई हैं। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक मेगा निवेशों और भर्ती के माध्यम से खराब सुरक्षा रिकॉर्ड को सुधारने के प्रयास हो रहे हैं। तो रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे को अपनी पीठ थपथपाने का मौका मिल गया है। 

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अभी ओडिशा के तीतलागढ़ स्टेशन पर सवारियों से भरी अहमदाबाद-पुरी एक्सप्रेस ट्रेन बिना इंजन के ही पटरी पर दौड़ पड़ी। करीब 10 किलोमीटर दूर जाकर ट्रेन को किसी तरह से रोका गया और फिर इंजन भेजकर दोबारा स्टेशन पर लाने के बाद आगे के लिए रवाना किया गया। इस दौरान पटरी पर यदि कोई दूसरी ट्रेन आ रही होती तो आप सोच सकते हैं की कतनी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
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ट्रेन को दूसरे छोर पर ले जाते समय ड्राइवर ब्रेक लगाना भूल गया। ऐसे में ये खुश होने का मौका है कि भारतीय रेलवे की लापरवाही से मौतों का आंकड़ा घटा, वाह! प्राप्त डाटा के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त होने वाले अंतिम वित्तीय वर्ष में मृत्यु और चोटों की संख्या कम से कम 18 वर्षों में सबसे कम है। पुराने डाटा के मुताबिक 2002-03 में ट्रेन दुर्घटना के दौरान 1,400 लोग मारे गए या घायल हो गए। वहीं 2016-17 में ये आंकड़ा 607 है। 
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रेल अधिकारी (IRSME) अश्विनी लोहानी के मुताबिक पांच साल के आधुनिकीकरण की योजना में 130 अरब यूएस डालर खर्चे किए जा चुके हैं और पिछले कुछ महीनों में करीब 90,000 लोगों की नियुक्ति की गई है। लोहानी के मुताबिक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, कर्मचारियों के लिए व्हाट्सएप या अन्य मीडिया के माध्यम से  सूचना के प्रचार-प्रसार को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि शिकायतों को तुरंत संबोधित किया जा सके और मानव त्रुटि को कम किया जा सके।

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