शॉर्ट सर्किट: आग की दुर्घटना से निपटने के लिए कॉमन प्रोटोकॉल अपनाएगा भारतीय रेलवे
रेलवे के एक अधिकारी बताया कि ट्रेनों में ब्रेक बाइंडिंग या किसी कारण से आग लगने पर तुरंत बचाव का तरीका निकाल लिया गया है। रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और सभी प्रीमियम ट्रेनों के एसी कोच में एडवांस मल्टी लेवल फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए हैं...
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दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस और कोलकाता के पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी रेलवे के जोनल आफिस में आग लगने की घटना के बाद से भारतीय रेलवे ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गया है। इसी दिशा में रेलवे ने अपनी अग्नि सुरक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने का फैसला लिया है।
रेलवे के सूत्रों के अनुसार अभी अग्नि सुरक्षा के मामले में रेलवे स्टेशन, कोच, सिग्नल सिस्टम और भवनों के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल होते हैं, लेकिन अब रेलवे अग्नि सुरक्षा पर एक प्रोटोकॉल बनाने पर विचार कर रहा है। इनमें ट्रेन के कोच, इंजन, रेलवे के सभी भवन, स्टेशन और सिग्नल सिस्टम के लिए एक जैसी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी।
विश्वस्त सूत्र के मुताबिक शनिवार को ट्रेन में आग लगने की घटना के पीछे का कारण शॉर्ट सर्किट था या कुछ और इसकी जांच की जा रही है। इसके लिए रेलवे ने अफसरों की टीम भी बनाई है जो ट्रेन में आग कैसे लगी उससे जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।
रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन ने अमर उजाला को बताया कि जहां तक रेलवे के भवन की अग्नि सुरक्षा का सवाल है तो उसे नेशनल बिल्डिंग कोड और स्थानीय प्रशासन के नियमों को ध्यान में रखकर ही बनाया जाता है। इसमें रेलवे अलग से कोई अपना नियम नहीं लगाता है। जहां तक नई अग्नि सुरक्षा प्रणाली बनाने की बात है इससे रेल कर्मचारियों के लिए भी आसानी होगी।
धुंआ उठते ही रुक जाएगी ट्रेन
रेलवे के एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि ट्रेनों में ब्रेक बाइंडिंग या किसी कारण से आग लगने पर तुरंत बचाव का तरीका निकाल लिया गया है। रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और सभी प्रीमियम ट्रेनों के एसी कोच में एडवांस मल्टी लेवल फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए हैं। आग लगने की स्थिति में कोच में जैसे ही धुंआ उठेगा, एडवांस फायर सिस्टम अपना काम शुरू कर देगा। कोच में हूटर बजने लगेगा, जिससे यात्री सतर्क हो जाएंगे। धुआं अधिक होने पर या लपटें बढ़ने पर ट्रेन में स्वत: ब्रेक लग जाएगा ताकि यात्री कोच के बाहर उतर सकें।
उन्होंने कहा कि ट्रेनों के सभी एसी कोच, पेंट्री कार, पावर कार में एडवांस फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। पूरे सिस्टम को ट्रेन के पावर कार में स्थापित सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। हर ट्रेन में सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम की निगरानी के लिए दो तकनीकी कर्मचारी तैनात किए गए हैं। गौरतलब है कि दिल्ली से देहरादून जा रही शताब्दी एक्सप्रेस की चेयर कार कोच सी-5 में अलार्म (स्मोक डिटेक्टर) बजने के बाद ही ट्रेन की चेन खींच दी गई और यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था।