कोरोना काल में बदलने जा रहा है भारतीय रेल का लुक, ट्रेन चलेंगी मगर इस तरह से...
- सभी जोन में कहा है, 'एसी' गाड़ियों को नॉन एसी में बदलने की प्रक्रिया शुरू करें
- इन गाड़ियों में किराया भी स्लीपर क्लास का लिया जाएगा
- एक रूट पर कई गाड़ियां चलेंगी, लेकिन कम स्टेशनों पर ठहरेंगी
- पांच हजार गाड़ियों को आइसोलेशन वार्ड में बदला
विस्तार
किराया भी स्लीपर क्लास का लिया जाएगा। लंबी दूरी वाली गाड़ी की एक बोगी में केवल 25 सीटें रहेंगी। इसके चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अच्छे से हो सकेगा। छुट्टियों पर गए सैन्य बलों को लाने के लिए विशेष गाड़ियां तैयार हो रही हैं।
रेलवे की परिचालन शाखा के एक अधिकारी के अनुसार, मंत्रालय कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। अभी हमें जो निर्देश मिल रहे हैं, उन्हें देखते हुए लगता है कि कोरोना के लॉकडाउन का असर लंबे समय तक रहेगा। हो सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते-करते साल निकल जाए।
लोगों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है, इसलिए रेलवे ने अपने सभी जोन में कहा है कि वे 'एसी' गाड़ियों को 'नॉन एसी' में बदलने की प्रक्रिया शुरू करें। पांच हजार गाड़ियों को आइसोलेशन वार्ड के लिए भी तैयार किया गया है।
अधिकारी के अनुसार, राजधानी और शताब्दी ट्रेन में सेंट्रलाइज एसी होने के कारण उनके भी शीशे उतारे जाएंगे। रेलवे को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ये सलाह दी गई है। इन गाड़ियों में किराया भी स्लीपर क्लास का लिया जाएगा।
केंद्रीय सैन्य बलों को लाने के दौरान इन गाड़ियों का ट्रायल होगा। उसके बाद जरूरत पड़ी तो अन्य बदलाव किए जाएंगे।
इन रूट्स पर संभव है गाड़ियों का चलना
एक रूट पर कई गाड़ियां चलेंगी, लेकिन बीच में उनका ठहराव बेहद सीमित रहेगा। जैसे दिल्ली-भठिंडा रूट पर कोई ठहराव नहीं होगा। इसी तरह से दूसरे रूटों पर भी गाड़ियों के परिचालन से संबंधित रूपरेखा तैयार की जा रही है।
यूपी, असम, गोवा, बेंगलुरु, चंडीगढ़, पटना, जम्मू-कश्मीर, एमपी और पंजाब आदि से होकर जाने वाले रूट पर गाड़ियों का आवागमन शुरू होने की पूरी सम्भावना है।