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कौन हैं जयश्री उल्लाल?: नडेला-पिचई से अमीर भारतवंशी पेशेवर; दिल्ली से हुई पढ़ाई, अमेरिका में गाड़ रहीं झंडे
Mon, 29 Dec 2025 06:46 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 29 Dec 2025 06:46 PM IST
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सार
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जयश्री उल्लाल।
- फोटो :
अमर उजाला/AI
विस्तार
दुनिया में भारत का प्रभाव बीते तीन दशक में किस तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों को संभालने वाले इस वक्त भारतीय मूल के लोग हैं। फिर चाहे बात अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचई की हो या माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्या नडेला की। हालांकि, इन बड़े नामों के बीच हाल ही में एक नाम चर्चा के केंद्र में रहा है। यह नाम है जयश्री उल्लाल का, जिन्हें हुरून की 2025 के सबसे अमीर भारतवंशी पेशेवर मैनेजर्स की लिस्ट में पहला स्थान मिला है। यानी उल्लाल इस साल नडेला और पिचई जैसे बड़े नामों से भी ज्यादा आगे रहीं।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जयश्री उल्लाल कौन हैं और हुरून इंडिया के अमीर भारतवंशी पेशेवर प्रबंधकों की लिस्ट में उनका क्या स्थान है? उनकी संपत्ति कितनी है? जयश्री का भारत से क्या कनेक्शन है? इसके अलावा उन्होंने कैसे लगातार मेहनत और लगन की बदौलत अमेरिका में कामयाबी के झंडे गाड़ दिए? आइये जानते हैं...
पहले जानें- सबसे अमीर भारतवंशी अमीरों के बारे में?
सबसे अमीर भारतीय प्रबंधकों की लिस्ट में जयश्री उल्लाल टॉप पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी संपत्ति 5.7 अरब डॉलर (करीब 51 हजार करोड़ रुपये) है। यानी वे दूसरे भारतवंशी पेशेवर प्रबंधकों- सुंदर पिचई (संपत्ति-1.5 अरब डॉलर) और सत्या नडेला (संपत्ति-1.1 अरब डॉलर) से काफी ऊपर हैं। इस लिस्ट में जो अन्य नाम हैं, उनमें मास्टरकार्ड के अजयपाल सिंह बंगा और पेप्सीको की इंदिरा नूई भी शामिल हैं।क्या है जयश्री उल्लाल का भारत से कनेक्शन?
जयश्री उल्लाल का जन्म इंग्लैंड की राजधानी लंदन में जरूर हुआ, लेकिन उनके माता-पिता भारतीय हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जयश्री जब पांच साल की थीं, तब उनके माता-पिता भारत लौट आए थे। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइस से पता चलता है कि उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में हुई। यहां उन्होंने कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी से पढ़ाई पूरी की थी।बताया जाता है कि जयश्री के पिता ने भारत के शिक्षा मंत्रालय में काम किया और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी।
भारत से बाहर जाने और अमेरिका में झंडे गाड़ने की कहानी क्या?
इंजीनियरिंग की पढ़ाई
- जयश्री ने अमेरिका की सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक किया।
- 1986 में उन्होंने सांता क्लारा यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग प्रबंधन में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की।
- प्रौद्योगिकी (तकनीक) के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए, उन्हें 2025 में इंजीनियरिंग में मानद डॉक्टरेट से भी सम्मानित किया गया।
पेशेवर दुनिया में एंट्री
1980 के दशक में पढ़ाई के दौरान ही जयश्री ने पेशेवर दुनिया में एंट्री ली। यहां सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन में अपना करियर शुरू करने के दौरान उन्होंने एएमडी (एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज) और फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर जैसी कंपनियों में काम किया। इसके बाद उन्होंने आईबीएम और हिताची जैसे वैश्विक ग्राहकों के लिए एडवांस्ड चिप्स की डिजाइनिंग का भी जिम्मा संभाला। और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इन शुरुआती भूमिकाओं में उन्हें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और बड़े पैमाने पर सिस्टम की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिली।
1993 में जयश्री के करियर में एक बड़ा मोड़ तब आया। दरअसल, वे जिन क्रेसेंडो कम्युनिकेशंस नाम की कंपनी में काम कर रही थीं, उसका अधिग्रहण सिस्को सिस्टम्स ने कर लिया। इसके चलते जयश्री को सिस्को जैसी बड़ी कंपनी के पर्यावरण में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका मिला। उन्होंने कंपनी में ईथरनेट स्विचिंग तकनीक का आधार तैयार किया और इसके व्यवसायिक पक्ष को मजबूती दी। जयश्री ने इस कंपनी में 15 साल से ज्यादा तक काम किया और आखिरकार सीनियर वाइस प्रेसिडेंट तक के पद तक पहुंची। यहां उन्होंने डाटा सेंटर और स्विचिंग व्यवसाय में नेतृत्व संभाला और कंपनी में कई अरबों डॉलर की प्रोडक्ट लाइन के निर्माण का श्रेय हासिल किया।
फिर अचानक एक स्टार्टअप का बन गईं हिस्सा
उल्लाल के लिए सिस्को में 15 साल काफी अहम साबित हुए। हालांकि, इसी बीच उन्होंने अचानक सिस्को छोड़कर एरिस्टा नेटवर्क्स जॉइन कर लिया। वे कंपनी की प्रेसिडेंट और सीईओ नियुक्त हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि तब एरिस्टा में 30 से भी कम कर्मचारी थे और कंपनी लाभ में भी नहीं थी। यह कंपनी तब एक दूसरी लीगल फर्म के बेसमेंट से काम करती थी।
फिर अचानक एक स्टार्टअप का बन गईं हिस्सा
उल्लाल के लिए सिस्को में 15 साल काफी अहम साबित हुए। हालांकि, इसी बीच उन्होंने अचानक सिस्को छोड़कर एरिस्टा नेटवर्क्स जॉइन कर लिया। वे कंपनी की प्रेसिडेंट और सीईओ नियुक्त हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि तब एरिस्टा में 30 से भी कम कर्मचारी थे और कंपनी लाभ में भी नहीं थी। यह कंपनी तब एक दूसरी लीगल फर्म के बेसमेंट से काम करती थी।
हालांकि, डाटा सेंटर और स्विचिंग में अपनी विशेषज्ञता के जरिए जयश्री ने एरिस्टा नेटवर्क्स को एक प्रमुख क्लाउड नेटवर्किंग सॉल्यूशन कंपनी में बदल दिया। कंपनी बीते कई वर्षों से अपने क्लाइंट्स को हाई स्पीड नेटवर्किंग के लिए जरूरी उत्पाद और सेवाएं मुहैया करा रही है।
उनके नेतृत्व में अरिस्टा अगले कुछ वर्षों में सिलिकॉन वैली की प्रमुख कंपनी के तौर पर स्थापित हो गई। 2014 आते-आते कंपनी न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट भी हो गई। फोर्ब्स के मुताबिक, नेटवर्किंग इंडस्ट्री में जयश्री सबसे प्रभावशाली पेशेवरों में से हैं। अमेरिका की वित्तीय मामलों से जुड़ी प्रमुख मैगजीन बैरन्स ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सीईओ की लिस्ट में शामिल किया है, जबकि फॉर्च्यून मैगजीन ने उन्हें दुनिया के शीर्ष बिजनेस लीडर्स की लिस्ट में जगह दी है।
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उनके नेतृत्व में अरिस्टा अगले कुछ वर्षों में सिलिकॉन वैली की प्रमुख कंपनी के तौर पर स्थापित हो गई। 2014 आते-आते कंपनी न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट भी हो गई। फोर्ब्स के मुताबिक, नेटवर्किंग इंडस्ट्री में जयश्री सबसे प्रभावशाली पेशेवरों में से हैं। अमेरिका की वित्तीय मामलों से जुड़ी प्रमुख मैगजीन बैरन्स ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सीईओ की लिस्ट में शामिल किया है, जबकि फॉर्च्यून मैगजीन ने उन्हें दुनिया के शीर्ष बिजनेस लीडर्स की लिस्ट में जगह दी है।
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