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भारतीय नौसेना को मिलेगी नई ताकत:  22 जुलाई को कमीशन होगा स्वदेशी युद्धपोत 'मालवन', जानें खूबियां

Thu, 16 Jul 2026 10:24 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 16 Jul 2026 10:24 PM IST
सार

Warfare Vessel Malvan: अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत मालवन को भारतीय नौसेना 22 जुलाई को अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह माहे श्रेणी का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) है। यह माहे श्रेणी का दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है।
 

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Indian Navy to commission indigenous anti-submarine warfare vessel Malvan on July 22
स्वदेशी युद्धपोत 'मालवन' - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने जा रही है। नौसेना 22 जुलाई को 'मालवन' नामक अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह माहे श्रेणी का दूसरा पोत है, जिसे उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
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'मालवन' का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि में किया गया है। यह पोत आधुनिक युद्धपोत निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है। इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग किया गया है, जो भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता और अत्याधुनिक युद्धपोत डिजाइन में बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।
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80 फीसदी से अधिक स्वदेशी तकनीक से है निर्मित
माहे श्रेणी के ये पोत विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित किए गए हैं। आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद 'मालवन' तेज गति, फुर्ती, सटीक संचालन क्षमता और लंबी परिचालन क्षमता से लैस है। नौसेना के अनुसार, इस श्रेणी के पोत तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे।
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'मालवन' के नौसेना में शामिल होने के साथ भारत को स्वदेशी रूप से विकसित नई पीढ़ी के उथले जल क्षेत्र में संचालन करने वाले युद्धपोतों की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलेगी। यह पोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आकार में छोटा और अत्याधुनिक तकनीक से है लैस
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 'मालवन' के नौसेना में शामिल होने से स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की नई पीढ़ी का विस्तार होगा। यह देश की रक्षा निर्माण क्षमता, स्वदेशी जहाज निर्माण तकनीक और नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।


मालवन के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन समेत भारतीय नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के प्रतिनिधि, पूर्व नौसैनिक और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे।

मालवन की प्रमुख खूबियां:
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत।
  • आकार में छोटा, लेकिन तेज गति, फुर्ती और लंबी अवधि तक अभियान चलाने की क्षमता से लैस।
  • आधुनिक सोनार प्रणाली से लैस, जो पानी के भीतर पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है।
  • पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए टॉरपीडो और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों से सुसज्जित।
  • भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत बेड़े को और अधिक आधुनिक और सक्षम बनाएगा।
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