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Indian Navy: पनडुब्बी-रोधी और निगरानी क्षमता बढ़ा रही नौसेना; रिटायरमेंट से पहले बोले नेवी चीफ एडमिरल त्रिपाठी
Sun, 31 May 2026 12:13 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 31 May 2026 12:13 AM IST
सार
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारतीय नौसेना अपनी पनडुब्बी-रोधी और निगरानी क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रही है। उन्होंने विशेष नौसैनिक थिएटर कमान की जरूरत पर भी जोर दिया।
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एडमिरल त्रिपाठी, नौसेना प्रमुख
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारतीय नौसेना अपनी पनडुब्बी-रोधी क्षमता, समुद्री निगरानी और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली को तेजी से मजबूत कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी खास देश को निशाना नहीं बना रहा, लेकिन देश के समुद्री हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नौसेना प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है और पाकिस्तान के साथ उसका सैन्य सहयोग भी गहरा हो रहा है।
रविवार को सेवानिवृत्त होने जा रहे एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन और पाकिस्तान के बीच समुद्री सहयोग तेजी से बढ़ा है। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन निर्मित चार डीजल-इलेक्ट्रिक हमलावर पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी को अपनी नौसेना में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हर क्षेत्रीय गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है और बदलते हालात के हिसाब से अपनी रणनीति और सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रही है।
दो मोर्चों के खतरे से निपटने के लिए क्या तैयारी हो रही है?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता, पानी के नीचे निगरानी प्रणाली और लंबी दूरी की समुद्री टोही को काफी मजबूत किया है। नौसेना अब सेंसर और हथियार प्रणालियों को नेटवर्क आधारित ऑपरेशन से जोड़ रही है, ताकि किसी भी खतरे का तेजी से जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि मिशन आधारित तैनाती के जरिए नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों और शिपिंग लेन पर लगातार मौजूद रहती है। इससे निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।
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ये भी पढ़ें- पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: इस्राइल ने लेबनान के ऐतिहासिक किले के पास बरसाए गोले,गाजा में फलस्तीनी नर्स की मौत
नौसैनिक थिएटर कमान की जरूरत क्यों बताई गई?
नौसेना प्रमुख ने सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल को मिलाकर एक विशेष नौसैनिक थिएटर कमान बनाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहे। साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध भी बेहद अहम हो गए हैं। ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि थिएटराइजेशन का मकसद सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे देश की युद्ध क्षमता और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होनी चाहिए।
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध से क्या सबक मिला?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को यह सिखाया है कि सुरक्षा और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा सीधे ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय स्थिरता से जुड़ी है। अगर समुद्री रास्ते प्रभावित होते हैं तो तेल, गैस और व्यापार पर तुरंत असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब “छोटे और जल्दी खत्म होने वाले युद्ध” की सोच टूट चुकी है। आधुनिक युद्ध लंबे और तकनीकी रूप से ज्यादा जटिल हो चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना ने क्या भूमिका निभाई?
एडमिरल त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और रणनीतिक ताकत को साबित किया। उन्होंने बताया कि उत्तरी अरब सागर में कैरियर बैटल ग्रुप की तेजी से तैनाती के कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों और मकरान तट तक सीमित हो गई थी। इस आक्रामक तैनाती का असर पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। शिपिंग जोखिम बढ़ने और बीमा प्रीमियम महंगे होने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान हुआ।
आधुनिक युद्ध में तकनीक कितनी अहम हो गई है?
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और बिना चालक वाले सिस्टम पर तेजी से काम कर रही है। भविष्य की नौसेना सिर्फ बड़े जहाजों से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्मार्ट सिस्टम से तय होगी। उन्होंने कहा कि नौसेना लगातार साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष आधारित संचार और डेटा आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत कर रही है। उनका कहना है कि भारत की नौसेना भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए तेजी से खुद को बदल रही है।
भारतीय नौसेना का आगे क्या फोकस रहेगा?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना का मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और भारत के समुद्री हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है। नौसेना किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मजबूत समुद्री शक्ति भारत के लिए बेहद जरूरी हो गई है।
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रविवार को सेवानिवृत्त होने जा रहे एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र अब रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन और पाकिस्तान के बीच समुद्री सहयोग तेजी से बढ़ा है। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन निर्मित चार डीजल-इलेक्ट्रिक हमलावर पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी को अपनी नौसेना में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हर क्षेत्रीय गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है और बदलते हालात के हिसाब से अपनी रणनीति और सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रही है।
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दो मोर्चों के खतरे से निपटने के लिए क्या तैयारी हो रही है?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता, पानी के नीचे निगरानी प्रणाली और लंबी दूरी की समुद्री टोही को काफी मजबूत किया है। नौसेना अब सेंसर और हथियार प्रणालियों को नेटवर्क आधारित ऑपरेशन से जोड़ रही है, ताकि किसी भी खतरे का तेजी से जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि मिशन आधारित तैनाती के जरिए नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों और शिपिंग लेन पर लगातार मौजूद रहती है। इससे निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।
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नौसैनिक थिएटर कमान की जरूरत क्यों बताई गई?
नौसेना प्रमुख ने सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल को मिलाकर एक विशेष नौसैनिक थिएटर कमान बनाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रहे। साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध भी बेहद अहम हो गए हैं। ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि थिएटराइजेशन का मकसद सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे देश की युद्ध क्षमता और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होनी चाहिए।
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध से क्या सबक मिला?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को यह सिखाया है कि सुरक्षा और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा सीधे ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय स्थिरता से जुड़ी है। अगर समुद्री रास्ते प्रभावित होते हैं तो तेल, गैस और व्यापार पर तुरंत असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब “छोटे और जल्दी खत्म होने वाले युद्ध” की सोच टूट चुकी है। आधुनिक युद्ध लंबे और तकनीकी रूप से ज्यादा जटिल हो चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना ने क्या भूमिका निभाई?
एडमिरल त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और रणनीतिक ताकत को साबित किया। उन्होंने बताया कि उत्तरी अरब सागर में कैरियर बैटल ग्रुप की तेजी से तैनाती के कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों और मकरान तट तक सीमित हो गई थी। इस आक्रामक तैनाती का असर पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। शिपिंग जोखिम बढ़ने और बीमा प्रीमियम महंगे होने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान हुआ।
आधुनिक युद्ध में तकनीक कितनी अहम हो गई है?
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और बिना चालक वाले सिस्टम पर तेजी से काम कर रही है। भविष्य की नौसेना सिर्फ बड़े जहाजों से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्मार्ट सिस्टम से तय होगी। उन्होंने कहा कि नौसेना लगातार साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष आधारित संचार और डेटा आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत कर रही है। उनका कहना है कि भारत की नौसेना भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए तेजी से खुद को बदल रही है।
भारतीय नौसेना का आगे क्या फोकस रहेगा?
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना का मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और भारत के समुद्री हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है। नौसेना किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मजबूत समुद्री शक्ति भारत के लिए बेहद जरूरी हो गई है।