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Navy: भारतीय नौसेना ने विदेशी पनडुब्बियों के साथ की मेटिंग, दक्षिण चीन सागर में सफलतापूर्वक हुआ अभ्यास

Sat, 27 Sep 2025 11:46 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 27 Sep 2025 11:46 PM IST
सार

भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में बहुराष्ट्रीय अभ्यास पैसिफिक रीच-25 के दौरान विदेशी पनडुब्बियों के साथ पहली बार सफल 'मेटिंग' की। इसमें हस्तक्षेप और बचाव अभियानों की पूरी प्रक्रिया आजमाई गई। तीन दिनों में तीन सफल ऑपरेशन हुए, जिससे भारत की वैश्विक पनडुब्बी बचाव क्षमता और मजबूत हुई है।
 

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Indian Navy achieves mating with foreign submarines in South China Sea during exercise
दक्षिण चीन सागर में मेटिंग का दृश्य - फोटो : X@indiannavy

विस्तार

 भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में बहुराष्ट्रीय अभ्यास के दौरान विदेशी पनडुब्बियों के साथ पहली बार 'मेटिंग' सफलतापूर्वक की। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इस अभ्यास में नौसेना ने हस्तक्षेप और बचाव अभियान की पूरी प्रक्रिया को भी अंजाम दिया।

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नौसेना की भाषा में मेटिंग का अर्थ दो या दो से अधिक प्रणालियों का एक साथ आना होता है। 

भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सिंगापुर द्वारा आयोजित अभ्यास पैसिफिक रीच (XPR-25) 15 सितंबर को शुरू हुआ था। इस अभ्यास में 40 से अधिक देश भागीदार या पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हैं।
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भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के नेतृत्व में कार्यरत आईएनएस निस्तार ने अभ्यास में भाग लेने के लिए 14 सितंबर को सिंगापुर के चांगी में अपना पहला बंदरगाह दौरा किया। इसके बाद 15 सितंबर को समुद्री चरण में भारतीय नौसेना के स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल और सबमरीन रेस्क्यू यूनिट (पूर्व) ने विदेशी पनडुब्बियों के साथ कई बचाव अभियानों में हिस्सा लिया।


नौसेना अधिकारियों ने बताया कि तीन दिनों में तीन बार सफल मेटिंग और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल ( ROV) ऑपरेशन किए गए। इससे भारत की वैश्विक बचाव क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग में भरोसेमंद साझेदार की छवि मजबूत हुई है।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत ने 2018-19 में दो आधुनिक डीप सबमरीन रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) शामिल कर लिए थे, जो 650 मीटर गहराई तक पनडुब्बी बचाव अभियान में सक्षम हैं। इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास विशेष पनडुब्बी बचाव प्रणाली है।

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