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जानकारी: पहनावे पर रोकटोक नहीं लगा सकते होटल-रेस्टोरेंट, मुफ्त पानी या शौचालय की सुविधा से नहीं कर सकते इंकार, जानें क्या कहता है कानून

Fri, 24 Sep 2021 03:47 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 24 Sep 2021 03:47 PM IST
सार

कानून के मुताबिक कोई होटल, रेस्टोरेंट या ढाबा निजी संपत्ति होने के बाद भी सार्वजनिक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं। इनमें प्रवेश करने, शौचालय का इस्तेमाल करने या निःशुल्क पानी पीने से कोई होटल-रेस्टोरेंट आपको रोक नहीं सकता है। ऐसा करने पर उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है...

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Indian Law: Hotel-restaurants cannot bar entry a women in saree, our law says even they cannot deny free water or toilet facilities
रेस्टोरेंट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दक्षिणी दिल्ली के एक होटल में एक महिला को कथित तौर पर साड़ी पहने होने के कारण प्रवेश न करने देने का मामला गरमा गया है। महिलाओं ने इसे 'औपनिवेशिक मानसिकता' बताते हुए गुरुवार को होटल के बाहर प्रदर्शन किया। होटल मालिक ने इसे गलती से कही गई बात बताकर मामला शांत करने की कोशिश की है। लेकिन मामला अभी भी शांत नहीं हुआ है और ऐसे होटलों पर सवाल उठने लगे हैं।

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मौजूदा कानून के मुताबिक कोई होटल, रेस्टोरेंट या ढाबा निजी संपत्ति होने के बाद भी सार्वजनिक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं। इनमें प्रवेश करने, शौचालय का इस्तेमाल करने या निःशुल्क पानी पीने से कोई होटल-रेस्टोरेंट आपको रोक नहीं सकता है। ऐसा करने पर उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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क्या हैं कानूनी अधिकार

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15 (2) में नागरिकों के अधिकार बहुत साफ हैं। इसके तहत किसी भी नागरिक को किसी होटल, रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल या ढाबे जैसे सार्वजनिक स्थल पर प्रवेश करने से लिंग, जाति, धर्म, भाषा, वेशभूषा या क्षेत्र के आधार पर रोका नहीं जा सकता। इस तरह के मामलों में 'द सरायज एक्ट, 1867’ का जिक्र किया जाता है। इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी होटल, रेस्टोरेंट में मुफ्त शौचालय का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसी जगहों पर मुफ्त पानी की सुविधा भी जरूरी है। यदि ग्राहक के पास पालतू जानवर है तो उसे भी पीने का पानी देना अनिवार्य है। मना करने पर 50 रुपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति होटल-रेस्टोरेंट का ग्राहक नहीं है, इसके बाद भी उसे शौचालय या पेयजल सुविधा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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हालांकि इस कानून को बहुत पुराना बताते हुए लॉ कमीशन ने इसे खत्म कर एक नए कानून को लाने की अनुशंसा की थी, लेकिन इसे अभी तक निरस्त नहीं किया गया है। हालांकि, खान-पान और होटल जैसे विषय राज्यों के तहत आने की वजह से सभी राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर इससे संबंधित नियम बना दिये हैं। होटलों या रेस्टोरेंट्स को स्टेट्स एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत लाइसेंस दिया जाता है।

कानून के तहत किसी होटल में कोई भारतीय लिबास पहनकर जाने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोई होटल-रेस्टोरेंट अपने यहां प्रवेश करने के लिए सामान्य ग्राहकों के लिए कोई खास ड्रेस पहनने का नियम लागू नहीं कर सकता। हालांकि, किसी होटल में कोई संस्था या व्यक्ति अपने निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने मेहमानों से विशेष ड्रेस कोड में आने की मांग कर सकता है।

किसी भी होटल-रेस्टोरेंट में खाना खाने पर पीने का पानी निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है। कोई होटल आपसे बोतलबंद मिनरल वाटर खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यह ग्राहक की इच्छा पर है कि वह मिनरल वाटर पिए, या निःशुल्क सादा पानी। सार्वजनिक स्थलों की नियमित साफ-सफाई, खानपान की चीजों की गुणवत्ता को बनाए रखना अनिवार्य है।

दिव्यांगों के अधिकार

वहीं, पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज एक्ट, 2016 में इस बात का प्रावधान किया गया है कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए चौड़े प्रवेश द्वार और दिव्यांगों के लिए अनुकूल शौचालय होने चाहिए। इन शौचालयों या होटल के अंदर किसी सार्वजनिक स्थल तक पहुंचने के लिए रैंप होने चाहिए जिससे व्हील चेयर पर चलने वाला व्यक्ति भी बिना किसी परेशानी के इन स्थलों तक पहुंच सके और इनका इस्तेमाल कर सके।

सामाजिक कार्यकर्ता और दुलारी देवी फाउंडेशन की निदेशिका प्रीती पांडेय का कहना है कि किसी भारतीय परिधान को पहनकर किसी जगह प्रवेश करने से इनकार करना सीधे तौर पर भारतीयता का अपमान है। सभ्य समाज में किसी को इस बात के लिए कमतर करके नहीं आंका जा सकता कि वह अंग्रेजी नहीं बोल सकता, या विशेष प्रकार का परिधान नहीं पहनता। उन्होंने कहा कि जिस समय पूरी दुनिया में भारतीय परिधानों, विशेषकर साड़ी को विशेष पहचान मिल रही है, अपने ही देश में कुछ लोगों की इस तरह की सोच निराशाजनक है। इस तरह की औपनिवेशिक मानसिकता से ऐसे लोगों को तुरंत बाहर आना चाहिए।

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