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मालदीव में ही बने रहेंगे भारतीय सेना के दो हेलीकॉप्टर
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Aug 2018 02:14 AM IST
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भारतीय सेना के दो हेलीकॉप्टरों के मालदीव में ही टिके रहने की संभावना बन गई है। इन हेलीकॉप्टरों के साथ ही उनका 48 सदस्यीय क्रू और सहायक स्टाफ भी अगले कुछ महीने तक मालदीव में ही रहेगा।
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राजनयिक और सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी में कहा गया है कि इन हेलीकॉप्टरों पर आगे का फैसला भारत और मालदीव के बीच चल रही वार्ता के किसी निर्णय पर पहुंचने के बाद होगा। फिलहाल हेलीकॉप्टरों के वहीं रहने की बात तय होने के कारण इस वार्ता के सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए हैं।
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बता दें कि मालदीव को 2013 में तोहफे में दिए गए इन हेलीकॉप्टरों का पट्टा अनुबंध 30 जून को खत्म हो गया था। इस द्वीप समूह देश ने नई दिल्ली को इन हेलीकॉप्टरों को वापस बुलाने के लिए कहते हुए क्रू और सहायक स्टाफ का वीजा नहीं बढ़ाया था। इसके बाद से ये सभी वहां ‘अवैध’ हैसियत में आ गए थे।
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लेकिन सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद मालदीव ने दोनों हेलीकॉप्टरों और स्टाफ को अपने यहां बनाए रखने की इच्छा जताई है। इसके चलते संभावना है कि इन्हें वापस भारत नहीं भेजा जाएगा।
भारत के लिए अहम है मौजूदगी
भारतीय कोस्टगार्ड की तरफ से संचालित किए जा रहे इन हेलीकॉप्टरों में से एक को हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अहम हैसियत वाले मालदीव के सुदूर दक्षिणी द्वीप अड्डू और दूसरे को लामू द्वीप पर रखा गया था। इनका काम हिंद महासागर में बचाव अभियान चलाने और जल दस्युओं पर नजर रखने का था। लेकिन मालदीव का कहना है कि अब उसने यह तकनीक खुद हासिल कर ली है, इसलिए उन्हें इन हेलीकॉप्टर की आवश्यकता नहीं है।
चीन से नजदीकी के बाद बदले हालात
दरअसल कुछ समय पहले तक भारत पर बेहद निर्भर मालदीव के साथ संबंधों में बदलाव वहां चीन की उपस्थिति बढ़ने के बाद आया। मालदीव और चीन के बीच पिछले साल मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। साथ ही चीन ने वहां बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में निवेश किया है। इसके अलावा इस साल 5 फरवरी को वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की तरफ से देश में आपातकाल घोषित करने पर भारत की तरफ से उसका विरोध किए जाने के कारण भी दोनों देशों के बीच संबंध खराब हुए हैं।