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भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत अंधों में ‘काने राजा’ जैसी: रघुराम राजन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 16 Apr 2016 04:21 PM IST
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रघुराम राजन
- फोटो : ANI
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भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने ऐसा बयान दिया है जो कई लोगों को चुभ सकता है। एक तरफ पूरी दुनिया में यह बात कही जाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत चमकते सितारे जैसा है पर राजन का इस बारे में कुछ और ही कहना है।
रघुराम राजन ने वाशिंगटन में एक बयान देते हुए कहा कि हमें अभी भी वो स्थान हासिल करना है, जहां पर पहुंच कर हम संतोष जाहिर कर सके। उन्होंने एक कहावत को याद करते हुए कहा कि हमारे यहां एक कहावत है अंधों में काना राजा। हमारी अर्थव्यवस्था कुछ वैसी ही है।
वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गर्वनरों की बैठक में हिस्सा लेने वाशिंगटन पहुंचे हैं। रघुराम राजन भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर इससे पहले भी ऐसे बयान जारी दे चुके हैं। खुले तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की खामियों को भी गिना चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि 'महंगाई दर 11 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है जिससे ब्याज दरों में गिरावट की गुंजाइश बनी है। निसंदेह रूप से, ढांचागत सुधार चल रहे हैं। सरकार नयी दिवाला संहिता लाने की प्रक्रिया में है। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) आना है। लेकिन अनेक उत्साहजनक चीजें पहले ही घटित हो रही हैं।’
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रघुराम राजन ने वाशिंगटन में एक बयान देते हुए कहा कि हमें अभी भी वो स्थान हासिल करना है, जहां पर पहुंच कर हम संतोष जाहिर कर सके। उन्होंने एक कहावत को याद करते हुए कहा कि हमारे यहां एक कहावत है अंधों में काना राजा। हमारी अर्थव्यवस्था कुछ वैसी ही है।
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वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गर्वनरों की बैठक में हिस्सा लेने वाशिंगटन पहुंचे हैं। रघुराम राजन भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर इससे पहले भी ऐसे बयान जारी दे चुके हैं। खुले तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की खामियों को भी गिना चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि 'महंगाई दर 11 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है जिससे ब्याज दरों में गिरावट की गुंजाइश बनी है। निसंदेह रूप से, ढांचागत सुधार चल रहे हैं। सरकार नयी दिवाला संहिता लाने की प्रक्रिया में है। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) आना है। लेकिन अनेक उत्साहजनक चीजें पहले ही घटित हो रही हैं।’