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अच्छी खबर: एक साल में चार दुर्लभ बीमारियों के लिए तैयार हुईं दवाएं, इलाज का खर्च 100 गुना तक घटा; जानें सब कुछ

Sat, 25 Nov 2023 09:30 AM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 25 Nov 2023 09:30 AM IST
सार

टाइरोसेमिया टाइप-1 के इलाज के लिए 2.2 करोड़ से 6.5 करोड़ वार्षिक खर्च होता था, लेकिन अब वही खर्च घटकर 2.5 लाख तक हो गया है। यह बच्चों में होने वाली वह बीमारी है, जिसका इलाज नहीं किया जाए तो करीबन 10 वर्ष की उम्र तक बच्चों की मौत हो जाती है।

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Indian Drug Companies Medicines For 4 Rare Diseases Cut Treatment Cost By Nearly 100 Times
Indian drug companies - फोटो : Social Media

विस्तार

सरकारी एजेंसियों की सहायता से भारतीय दवा कंपनियों ने एक साल में चार दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं विकसित करने में कामयाब हुई है। इससे इलाज का खर्च 100 गुना तक कम हो गया है। इनमें से ज्यादातर बीमारियां बच्चों में होने वाली बीमारी है। 
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इन बीमारियों के इलाज के खर्च में आई कमी
उदाहरण के लिए, टाइरोसेमिया टाइप-1 के इलाज के लिए 2.2 करोड़ से 6.5 करोड़ वार्षिक खर्च होता था, लेकिन अब वही खर्च घटकर 2.5 लाख तक हो गया है। यह बच्चों में होने वाली वह बीमारी है, जिसका इलाज नहीं किया जाए तो करीबन 10 वर्ष की उम्र तक बच्चों की मौत हो जाती है। तीन अन्य दुर्लभ बीमारियों में गौचर भी शामिल है, जिसके कारण यकृत बढ़ना और हड्डियों में दर्द होता है। गौचर के इलाज के लिए प्रति वर्ष 1.8 से 3.6 करोड़ रुपये खर्च बैठता था, लेकिन अब यही खर्च घटकर 3.6 लाख रुपये तक हो गया है। 
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ऐसे ही दुर्लभ बीमारियों में विल्सन भी है, जो यकृत में तांबा जमा होने और अन्य मनोरोग संबंधी लक्षणों के कारण होता है। इसके इलाज में प्रति वर्ष ट्रिनटीन कैप्सूल के साथ 2.2 करोड़ रुपये तक खर्च होता था, जो कि अब घटकर 2.2 लाख रुपये हो चुका है। वहीं ड्रावेट या लेनॉक्स के इलाज के लिए पहले प्रति वर्ष सात से 34 लाख रुपये खर्च होता था, लेकिन अब इसके इलाज का खर्च 1.5 लाख रुपये हो गया है। 
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में 8.4 करोड़ से 10 करोड़ तक मरीज दुर्लभ बीमारी का शिकार होते हैं। उनमें से 80 फीसदी अनुवांशिक होते हैं, जिसका मतलब इसका इलाज कराना जरूरी है। एक साल पहले बायोफोर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, लॉरस लैब्स लिमिटेड, एमएसएन फार्माक्यूटिकल और एकुम्स ड्रग्स एंड फार्माक्यूटिक्स जैसी कंपनियों ने 13 दुर्लभ बीमारियों की दवाइयों पर काम करना शुरू किया था। उनमें से चार के इलाज के लिए दवाइयां विकसित कर ली गई है, वहीं बाकी के बीमारियों के लिए जल्द ही दवाएं विकसित होने का अनुमान लगाया जा रहा है। 
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