फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Defence Industy workers Weapons Factory turned into corporation Central Government news and updates

Defence: टैंक-गोला बारूद व सेना की वर्दी तैयार करने वाले हाथ क्यों हैं चिंतित? सरकार की किस बात पर नाराजगी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 24 Jun 2024 05:43 PM IST
विज्ञापन
सार
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा है, मोदी 2.0 सरकार ने अपने 100 दिन के एजेंडे में आयुध कारखानों का निगमीकरण पर काम शुरू किया था। अब मोदी 3.0 सरकार, निजीकरण के अगले चरण की योजना बना सकती है। 
loader
Indian Defence Industy workers Weapons Factory turned into corporation Central Government news and updates
भारत का रक्षा उद्योग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केंद्र सरकार ने जून 2021 के दौरान 41 आयुध कारखानों को सात निगमों में परिवर्तित करने का फैसला लिया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) ने आयुध कारखानों के निगमीकरण का पुरजोर विरोध किया, मगर सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी। आयुध कारखानों को 7 निगमों में तब्दील कर दिया गया। फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। कर्मचारी संगठनों ने उस वक्त रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था कि आयुध कारखानों के कर्मियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहने दिया जाए। उन्हें निगमों का कर्मचारी न माना जाए। सरकार ने आयुध कारखानों के कर्मियों को डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर मान लिया। इस वर्ष 30 सितंबर 2024 को डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त हो जाएगी। करीब 70 हजार से अधिक कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बतौर एआईडीईएफ महासचिव श्रीकुमार, उन्हें सूत्रों से पता चला है कि जुलाई में कर्मचारियों से कंपनियों में शामिल होने का विकल्प मांगा जाएगा। टैंक, गोला बारूद व सेना की वर्दी तैयार करने वाले हाथों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।  


'निगमों में शामिल होने का विकल्प स्वीकार न करें'
एआईडीईएफ के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी. श्रीकुमार ने 21 जून को फेडरेशन के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक संयुक्त संदेश जारी किया है। फेडरेशन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से एक अधिसूचना प्रकाशित करने की मांग की है। इसमें यह घोषणा की जाए कि 41 आयुध कारखानों के सभी कर्मचारी और अधिकारी, सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे। अभी तक सरकार इस मांग पर चुप्पी साधे हुए है। रक्षा मंत्रालय ने 21 जून, 2024 को सातों कंपनियों के सीएमडी को अपने निगमों की मानव संसाधन नीतियों को अंतिम रूप देने और आगे बढ़ाने के लिए एक परिपत्र जारी किया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जुलाई, 2024 के दौरान, कंपनियों में शामिल होने के लिए कर्मचारियों से विकल्प मांगें जाएंगे। इसके लिए पहले से ही कोई पैकेज बनाया गया है। एआईडीईएफ अध्यक्ष और महासचिव ने संयुक्त बयान जारी कर कर्मचारियों से अपील की है कि वे 7 निगमों में शामिल होने के विकल्प को स्वीकार न करें। यह एक आत्मघाती कदम है। ऐसे में सावधान रहिए, सतर्क रहें।


समझौतों और आश्वासनों का स्पष्ट उल्लंघन
श्रीकुमार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे 7 आयुध निर्माणी निगमों (7 डीपीएसयू) में शामिल होने के विकल्प के जाल में न फंसें। सरकार ने जून 2021 में जब आयुध कारखानों के निगमीकरण की घोषणा की थी, तब कर्मचारी संगठनों ने आयुध कारखानों के निगमीकरण का पुरजोर विरोध किया था। यह निगमीकरण, सरकारों द्वारा अतीत में दिए गए लिखित समझौतों और आश्वासनों का स्पष्ट उल्लंघन है। 16 जुलाई, 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि आयुध निर्माणी का कोई भी कर्मचारी डीपीएसयू कर्मचारी के रूप में निगम में शामिल नहीं होगा। वे आयुध कारखानों में केंद्र सरकार के कर्मचारी/रक्षा नागरिक कर्मचारी के रूप में बने रहेंगे। एआईडीईएफ ने केंद्र सरकार के फैसले को मद्रास उच्च न्यायालय में भी चुनौती दी है। इस केस की अगली सुनवाई 28 जून को होनी है। दूसरी तरफ डीम्ड प्रतिनियुक्ति की अवधि 30 सितंबर, 2024 को समाप्त हो रही है। रक्षा मंत्रालय से अनुरोध किया गया है, चूंकि आयुध कारखानों के कर्मचारियों ने एक जनमत संग्रह के माध्यम से यह फैसला लिया है कि वे 7 निगमों में शामिल नहीं होंगे। सरकार को यह घोषणा करते हुए एक अधिसूचना प्रकाशित करनी चाहिए कि आयुध कारखानों के सभी कर्मचारी जो डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर हैं, वे सभी लाभों के साथ सेवा से सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी / रक्षा नागरिक कर्मचारी बने रहेंगे।

'अब निजीकरण के अगले चरण की योजना'
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा है, मोदी 2.0 सरकार ने अपने 100 दिन के एजेंडे में आयुध कारखानों का निगमीकरण पर काम शुरू किया था। अब मोदी 3.0 सरकार, निजीकरण के अगले चरण की योजना बना सकती है। इसी साजिश के एक भाग के रूप में एमओडी/डीडीपी ने 21 जून को सभी 7 निगमों के सीएमडी के लिए एक निर्देश जारी किया है। इसमें लिखा है कि यह डीडीपी की जांच के लिए नए डीपीएसयू द्वारा प्रस्तुत 7 नए डीपीएसयू के कर्मचारियों के लिए अवशोषण की सामान्य शर्तों के मसौदे के संदर्भ में है। अवशोषण की सामान्य शर्तों के मसौदे में यह उल्लेख किया गया था कि सेवा नियम/नीतियां सीपीएसई/डीपीएसयू के मानव संसाधन नियमों/नीतियों की तर्ज पर बनाई जाएंगी। ऐसे में सभी 7 नए डीपीएसयू से अनुरोध है कि वे अपने डीपीएसयू के संबंध में सेवा नियमों/नीतियों की स्थिति 24 जून तक डीडीपी को सूचित करें। अब चीजें साफ हो गई हैं कि कंपनियां जल्द ही अपने नियमों और शर्तों पर 7 कंपनियों में शामिल होने के लिए कर्मचारियों से विकल्प मांगेंगी। ये कंपनियां, कर्मचारियों को अपनी कंपनी में शामिल करने के लिए कुछ लुभावने पैकेज दे सकती हैं। कई कंपनियां, ऐसे तथाकथित 'आकर्षक पैकेज' लेकर आने की तैयारी में हैं।

'सात कंपनियों में यह सब झेलना होगा'
निगमीकरण के बाद बीएसएनएल का कड़वा अनुभव, जिसमें एक लाख से अधिक कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति 'वीआर' लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब भी उनके टर्मिनल लाभों का निपटान नहीं हुआ है। जो पेंशनभोगी बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हुए थे, उनकी पेंशन 7वीं सीपीसी के अनुसार संशोधित नहीं की गई है। आज भी बीएसएनएल कर्मचारियों के वेतन भुगतान की कोई निश्चित तारीख नहीं है। करेंसी नोट छपाई आदि के लिए सरकारी टकसाल (एसपीएमसीआईएल) के निगमीकरण के बाद, रिजर्व बैंक ने संयुक्त उद्यम के नाम पर निजी प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की है। एसपीएमसीआईएल बिना कार्यभार के संघर्ष कर रहा है। आयुध कारखानों के एनपीएस कर्मचारी, 7 कंपनियों में शामिल होने के बाद पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का दावा खो देंगे। वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों/रक्षा नागरिक कर्मचारियों का दर्जा भी खो देंगे। इसके चलते उन्हें कई दूसरे आर्थिक और स्वास्थ्य लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है। आज यदि कंपनी के पास कार्यभार आदि की कमी के कारण वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो यह सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन और अन्य लाभ दे। हालांकि, डीपीएसयू कर्मचारियों के मामले में सरकार के लिए ऐसा कोई आदेश नहीं है। कंपनी में शामिल होने के बाद साप्ताहिक कामकाजी घंटे 48 घंटे हो जाएंगे।

'कर्मचारियों पर विभिन्न रूपों में कार्रवाई संभव'
श्रीकुमार कहते हैं कि ये केवल कुछ खतरे हैं जो प्रत्याशित हैं। इसके अलावा भी कई दूसरे ऐसे खतरें हैं, जो अभी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। कर्मचारियों पर विभिन्न रूपों में कई हमले होंगे। अतिरिक्त सचिव के साथ कर्मचारी संगठन की बैठक, जिसमें यह बताया गया कि कोई भी कर्मचारी कंपनी में शामिल नहीं होगा। तब उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा कोई मामला है तो हम आगे के निर्णय के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के पास जाएंगे। उनके सामने तथ्य प्रस्तुत करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने एआईडीईएफ की रिट पिटीशन में मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष प्रतिबद्धता जताई है कि किसी भी कर्मचारी को 7 कंपनियों में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। आयुध निर्माणी के कर्मचारियों का भविष्य सरकार के हाथों में है। ऐसे में अग्रणी कर्मचारी महासंघ, रक्षक और रक्षा नागरिक कर्मचारियों की मजबूत आवाज के रूप में आयुध कारखानों के कर्मचारियों से अपील करते हैं कि वे किसी विकल्प में नहीं फंसें। सातों कंपनियों के प्रलोभनों का शिकार न हों। अगर कोई कर्मचारी, इन कंपनियों में शामिल होता है तो वह उसके लिए आत्मघाती कदम होगा। आयुध निर्माणी के सभी कर्मचारी, केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं। उन्हें रक्षा सिविलियन कर्मचारियों के रूप में भर्ती किया गया है। वे केवल आयुध कारखानों से उसी स्थिति के साथ सेवा में बने रहेंगे और सेवानिवृत्त होंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed