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घोड़ों की जगह अब टैंकों का होगा उपयोग, दुनिया में बची इकलौती घुड़सवार इकाई को हटाएगी भारतीय सेना
Sat, 16 May 2020 04:10 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 16 May 2020 04:10 AM IST
सार
- भारतीय सेना की 61वीं घुड़सवार सेना दुनिया में बची एकमात्र इकाई है
- सेना में यह 1953 से है मौजूद लेकिन 25 वर्षों से किसी ऑपरेशन का हिस्सा नहीं
- सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकटकर समिति के सलाह से यह कदम उठाया गया है
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61st cavalry unit
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
भारतीय सेना की 61वीं घुड़सवार इकाई के घोड़े वर्षों से आर्मी की शान शौकत बढ़ाते आए हैं। दुनिया में बची यह इकलौती घुड़सवार सेना है। लेकिन अब इसमें बड़े बदलाव की बात चल रही है। इसमें घोड़ों की जगह टैंक का उपयोग कर इसे नियमित बख्तरबंद रेजिमेंट बनाने की तैयारी चल रही है।
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सेना के इस प्लान से इस युनिट के ही कुछ लोग खुश नहीं है। उनका मानना है कि यह एतिहासिक परंपरा को खत्म करने जैसा है।
प्रसिद्ध 61 वीं घुड़सवार इकाई को हटाने की वजह सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाना और अपने राजस्व व्यय को कम करना है। बता दें कि यह फैसला सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकटकर समिति द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर लिया जा रहा है। शेकटकर समिति के सिफारिश में इसे एक नियमित बख्तरबंद रेजिमेंट में परिवर्तित करने की बात कही गई है।
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अधिकारी के अनुसार जयपुर स्थित इस घुड़सवार इकाई को टी -72 टैंकों से लैस किए जाने की संभावना है। एक और अधिकारी के अनुसार रेजीमेंट में कुल 300 घोड़े हैं। जिनमें जयपुर में 200 हैं और दिल्ली में कुल 100 हैं। और बदलाव के बाद ये सभी एक नए अश्वारोही नोड का हिस्सा बनेंगे।
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विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल डीबी शेकटकर ने कहा कि यूनिट के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही 61 वीं घुड़सवार इकाई में बदलाव की सिफारिश की गई है।
शेकटकर ने आगे बताया कि इसने पिछले 25 वर्षों के दौरान किसी भी ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लिया है। और फिलहाल इसका इस्तेमाल सिर्फ कार्यक्रमों में होता है और इसके जवान पोलो जैसे गेम में हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि सेना में इसका उपयोग व्यवसाय के लिए नहीं किया जा सकता है।
बता दें कि सेना में 61वीं घुड़सवार इकाई 1953 से मौजूद है। फिलहाल राष्ट्रपति भवन में मौजूद राष्ट्रपति बॉडीगार्ड (PBG) के अलावा 61वीं घुड़सवार इकाई ही इकलौती घोड़े वाली सेना है। लेकिन अब इनकी जगह टैंक ले सकते हैं।