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Indian Army Uniform: 11 लाख 'कॉम्बैट डिजिटल यूनिफॉर्म' का मामला गर्माया, रक्षा मंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 12 Oct 2022 06:03 PM IST
सार

Indian Army Uniform: सीपीआई के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे अपने पत्र में कहा है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। भारतीय सेना मुख्यालय द्वारा 11 लाख 'कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड यूनिफॉर्म' तैयार करने का जो ओपन टेंडर जारी किया गया है, उसे रद्द किया जाए...

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Indian Army Uniform: CPI MP Binoy Viswam write a letter to Defense Minister Rajnath Singh for intervention
Indian Army Uniform - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार ने 41 आयुध कारखानों को सात निगमों में तब्दील करने से पहले वहां के स्टाफ को वित्तीय और गैर वित्तीय स्पोर्ट देने का आश्वासन दिया था। सरकार अब अपने उस आश्वासन से पीछे हट रही है। सेना मुख्यालय द्वारा पिछले दिनों जारी एक टेंडर ने सरकार की मंशा जता दी है। इस टेंडर से साफ पता चल रहा है कि केंद्र सरकार, आयुध फैक्ट्रियों को काम नहीं देना चाहती। सीपीआई के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे अपने पत्र में कहा है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। भारतीय सेना मुख्यालय द्वारा 11 लाख 'कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड यूनिफॉर्म' (Combat digital Uniform) तैयार करने का जो ओपन टेंडर जारी किया गया है, उसे रद्द किया जाए। वह काम टीसीएल के अंतर्गत चार आयुध फैक्ट्रियों को दें।   

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स्पेशल प्लांट, सीएडी व सीएएम सुविधा मौजूद

सांसद बिनॉय विश्वम ने अपने पत्र में लिखा है कि टीसीएल के अंतर्गत चार आयुध कारखाने, कॉम्बैट डिजिटल वर्दी' (Combat digital Uniform) बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इन्हें आर्डर नहीं दिया गया। इन कारखानों में आठ हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। जब उनके पास काम नहीं होगा, तो सरकार उन्हें निजी हाथों में सौंपने का आदेश जारी कर सकती है। चार आयुध कारखानों के पास 'कॉम्बैट डिजिटल वर्दी' बनाने का पर्याप्त अनुभव, तकनीक व सामग्री मौजूद है। सेना की जरूरत के हिसाब से ये कारखाने, अपनी मशीनरी, स्पेशल प्लांट, सीएडी व सीएएम की मदद से हर तरह के गारमेंट्स तैयार कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आयुध कारखानों ने सेना के हर सामान की डिलीवरी तय समय से पहले की है। इस बाबत आयुध कारखानों को सेना अध्यक्ष और एमजीओ की तरफ से कई बार प्रशंसा पत्र मिल चुका है।

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कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए जोड़ा ये क्लॉज

'कॉम्बैट डिजिटल वर्दी' तैयार करने का जो टेंडर जारी हुआ है, उसे 19डी एक शर्त जोड़ी गई है। उसमें लिखा है कि बोली लगाने वाली कंपनी के पास वैट प्रोसेसिंग, डाइंग, प्रिंटिंग और जर्मेनेटिंग की सुविधा हो, यह क्लॉज चार आयुध कारखानों को टेंडर से बाहर रखने के लिए जोड़ा गया है। ये क्लॉज, कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए है। टेंडर में इस तरह की सुविधाएं होने की शर्त लगी है, जो केवल कुछ ही कंपनियों के पास है। इस तरह की शर्त में कंपोजिट मील और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग शामिल है।

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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, भारतीय सेना के लिए 11 लाख 'कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी' तैयार करने का आर्डर, इस बार किसी प्राइवेट फर्म के हाथ में जाने की संभावना है। यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। केंद्र सरकार नहीं चाहती कि सात निगमों में विभाजित किए गए 41 आयुध कारखानें, आगे बढ़ते रहें। सरकार, जल्द से जल्द इन कारखानों का निजीकरण करना चाहती है। टीसीएल के अंतर्गत चार आयुध कारखाने, कॉम्बैट डिजिटल वर्दी' बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इन्हें सीधा आर्डर नहीं किया गया। चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने और आयुध कारखानों को नुकसान की ओर ले जाने के लिए सेना के इस सामान का खुली मार्केट में टेंडर जारी किया गया है।

अपने इस वादे से दूर जा रही केंद्र सरकार

भारतीय सेना, इसी तरह के आर्डर के लिए पहले आयुध कारखानों की तय समय पर सप्लाई और सामान की बेहतर गुणवत्ता के लिए प्रशंसा पत्र दे चुकी है। मोदी सरकार ने रक्षा कर्मचारी संघों के साथ पिछले आश्वासनों और समझौतों का उल्लंघन करते हुए जून 2021 के दौरान आयुध निर्माणी बोर्ड के 220 साल पुराने संगठन के तहत संचालित हो रहे 41 आयुध कारखानों को 7 गैर-व्यवहार्य निगमों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। उस समय केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया था कि नए निगमों पर सौ फीसदी सरकार का स्वामित्व होगा। अब सरकार अपने वादे से दूर जा रही है। ट्रूप कंफर्ट लिमिटेड के तहत 4 आयुध कारखानों को नष्ट करने के लिए सरकार ने सेना को कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी के निर्माण का ऑर्डर आयुध कारखानों को देने के लिए नहीं कहा। खुली निविदा में जो शर्तें रखी गई हैं, वे अनैतिक हैं। इससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंचेगा तो दूसरी ओर टीसीएल के तहत आयुध कारखानों का बंद होना तय है।

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