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लद्दाख में 80,000 सैनिकों के साथ हमला कर सकता है चीन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jul 2016 08:44 PM IST
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सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
- फोटो : NDTV
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लद्दाख में 826 किलो मीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। भारतीय सेना सीमा पर अपनी तैयारियों को पुख्ता बनाने में दिन-रात एक किए हुए हैं। गौरतलब है कि उत्तर में कारकोरम दर्रे के पास से शुरू होने वाली लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) भारत-चीन के बीच की सीमा है।
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दोनों देशों की सीमाओं पर सैनिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। दोनों ओर सैनिक मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि अगले कुछ महीनों में और सैनिकों के आने की संभावना जताई जा रही है। भारत-चीन की सीमा को निर्धारित करने वाली इस लाइन पर अब बंकरों और बंदूकधारियों की बड़ी फौज मौजूद है।
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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ भारतीय सेना के मुठभेड़ों की संख्या बढ़ी है। लिहाजा भारत ने अपने इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
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सीमा पर न केवल सैनिक बल्कि टैंक और मशीनी इन्फैन्ट्री को भी तैनात किया गया है। हालांकि सीमा पर सेना के जवानों की संख्या 1962 के युद्ध से भी ज्यादा हैं। हाल ही में संकेत मिले थे कि युद्ध की स्थिति में चीन 60,000 से 80,000 सैनिक भेज सकता है।
विदेश सचिव श्याम सरन के कहने पर शुरू हुई तैयारी
2012 के बाद बदली स्थिति
- फोटो : The Hindu
गौरतलब है कि 1962 के भारत-चीन के युद्ध के बाद भारत ने सीमा पर ढांचागत सुविधाओं के विस्तार में तेजी नहीं दिखाई। ऐसी स्थिति में सीमा की सुरक्षा कुछ बटालियन्स के हाथों में थी, जिन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, लद्दाख स्काउट्स से सहयोग मिलता।
हालांकि 2005 में चीजें बदलनी शुरू हुई जब विदेश सचिव श्याम सरन ने भारत-चीन सीमा पर तूफानी गति से ढांचागत सुविधाओं के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
2012 में पूर्वी लद्दाख में चीन से लगती सीमा पर भारत ने अधिक से अधिक सैनिकों को तैनात करना शुरू कर दिया।
हालांकि 2005 में चीजें बदलनी शुरू हुई जब विदेश सचिव श्याम सरन ने भारत-चीन सीमा पर तूफानी गति से ढांचागत सुविधाओं के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
2012 में पूर्वी लद्दाख में चीन से लगती सीमा पर भारत ने अधिक से अधिक सैनिकों को तैनात करना शुरू कर दिया।
दो साल से इन्फैंट्री बटालियंस भी चीनी सीमा पर तैनात
चुनौतियों से निपटने को तैयार है भारत
- फोटो : Malayala Manorama
ढांचागत सुविधाओं का निर्माण और जवानों की तैनाती साथ-साथ तेजी से चलती रही। सैनिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी यह दर्शाती है कि भारत तैयार है।
इससे पहले ज्यादातर इन्फैंट्री बटालियंस छह महीने तक पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा करती थी, उसके बाद सियाचिन ग्लेशियर की तरफ रवाना होती थी। इन्हें 'लिंक बटालियंस' कहा जाता था। पिछले दो सालों से इन्फैंट्री बटालियंस को भी चीनी सीमा पर तैनात किया गया है।
इससे पहले ज्यादातर इन्फैंट्री बटालियंस छह महीने तक पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा करती थी, उसके बाद सियाचिन ग्लेशियर की तरफ रवाना होती थी। इन्हें 'लिंक बटालियंस' कहा जाता था। पिछले दो सालों से इन्फैंट्री बटालियंस को भी चीनी सीमा पर तैनात किया गया है।