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अमेरिका के विरोध के बावजूद भारत करेगा रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद

Fri, 01 Jun 2018 11:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Jun 2018 11:40 AM IST
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India will push ahead with its deal to buy s 400 from Russia despite US opposition

भारत ने वायु सेना के लिए रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद संबंधी बातचीत पूरी कर ली है। यह सौदा अमेरिका के विरोध के वाबजूद हुआ है। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने पहचान ना बताने की शर्त पर इस बात की जानकारी दी है। यह पूरा सौदा 40,000 करोड़ रुपये का है।

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अधिकारी के मुताबिक अब दोनों देश अमेरिका के उस कानून के प्रावधानों से बचने के तरीके तलाश रहे हैं जिसके अनुसार रूस के रक्षा अथवा खुफिया प्रतिष्ठानों से लेन-देन करने वाले देशों और कंपनियों को दंड देने की बात कही गई है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत को चेतावनी दी थी कि यदि वह रूस के साथ सौदा करता है तो उसका परिणाम अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग में कमी होगा। 
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रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय रूसी एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए सुरक्षा के लिए सर्वोच्च कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) से संपर्क करेगा। उन्होंने बताया कि जब इस सौदे पर बातचीत पूरी हो चुकी है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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बातचीत हो चुकी है पूरी

India will push ahead with its deal to buy s 400 from Russia despite US opposition

बातचीत में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि मिसाइल खरीद के लिए बातचीत पूरी हो चुकी है। साथ ही वित्तिय पक्ष को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। वहीं रक्षा मंत्रालय का यह भी मत है कि रूस चीन के साथ भी रक्षा संबंधी सौदे करता है और यदि भारत ऐसे सौदे को नहीं करेगा तो वह अपनी मिसाइल आदि पाकिस्तान को भी बेच सकता है शायद चीन के माध्यम से ही सही।

उन्होंने बताया कि अतीत में भी रूसी आरडी-93 इंजनों को पाकिस्तान में जेएफ-17 सेनानियों के लिए चीनी मार्ग के माध्यम से आपत्तियों के बावजूद सप्लाई किया गया था।
  
अधिकारी ने यह भी बताया कि इस बात की घोषणा पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अक्टूबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहली की जा सकती है। बता दें अमेरिका ने 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट' (सीएएटीएसए) के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसलिए दोनों देश इस सौदे पर अमेरिका के प्रतिबंधों से बचाने के लिए रास्ते तलाश रहे हैं।

पहले भी उठा था यह मुद्दा

India will push ahead with its deal to buy s 400 from Russia despite US opposition

माना जा रहा है कि यह मुद्दा तब भी उठा भी जब पीएम मोदी ने सोची में पुतिन से मुलाकात की थी। उल्लेखनीय है कि भारत करीब 4,000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है। जिसमें एस-400 और एस-300 बेहतर संस्करण हैं। बता दें अलमाज एन्टो द्वारा उत्पादित यह मिसाइल प्रणाली रूस में साल 2007 से सेवा में है। 

वहीं भारत उन आपत्तियों पर भी ध्यान दे रहा है जिन्हें अमेरिकी संसद की हथियार से संबंधित सिमिति के अध्यक्ष विलियम थोर्नबेरी ने उठाया था। थोर्नबेरी को इस सौदे से आपत्ति थी जिस पर उन्होंने कहा था कि यदि यह डील हुई तो वह सीएएटीएसए एक्ट लगा देंगे।

अब 6 जुलाई को वाशिंगटन में एस-400 प्रणाली सौदे पर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो व रक्षा मंत्री जिम मैटिस के साथ बातचीत करेंगी। इस वार्ता में दोनों पक्ष अपनी अपनी रक्षा संबंधित चिंताओं को साझा करेंगे ताकि द्विपक्षीय संबंधों में बिना किसी बाधा आए इस समस्या को हल किया जा सके।

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