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अंधापन से मुक्त होगा भारत, एम्स का शोध हुआ पूरा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Updated Tue, 13 Mar 2018 12:23 AM IST
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हाल ही में ट्रेकोमा के बाद अब भारत बहुत जल्द वर्षों पुरानी अंधापन की समस्या से मुक्त हो सकेगा। पिछले तीन वर्षों से इस बीमारी पर सर्वे कर रही एम्स की टीम ने अंधापन के चुनिंदा केस ही देश में मिलने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि जून में ये टीम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। जिसके बाद सरकार इसे सार्वजनिक कर सकती है।
बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश को आंखों की बीमारी ट्रेकोमा मुक्त घोषित किया था। उस वक्त भी एम्स की इसी टीम ने रिपोर्ट सरकार को दी थी।
एम्स के आरपी सेंटर के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण वशिष्ठ बताते हैं कि राष्ट्रीय दृष्टिहीनता सर्वे कार्यक्रम वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। इसमें देश के 30 जिलों में जाकर टीम ने जांच और पूछताछ की। प्रत्येक जिले से करीब तीन हजार लोगों को इस सर्वे से जोड़ा गया था। ताकि डॉक्टरों की टीम सटीक और ठोस निष्कर्ष तक पहुंच सके।
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डॉ. प्रवीण का कहना है कि इस सर्वे में 90 हजार लोगों को शामिल किया है। अबतक 28 जिलों का सर्वे पूरा हो चुका है। दो जिलों में टीम अभी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जून में सर्वे रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी जाएगी।
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बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश को आंखों की बीमारी ट्रेकोमा मुक्त घोषित किया था। उस वक्त भी एम्स की इसी टीम ने रिपोर्ट सरकार को दी थी।
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एम्स के आरपी सेंटर के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण वशिष्ठ बताते हैं कि राष्ट्रीय दृष्टिहीनता सर्वे कार्यक्रम वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। इसमें देश के 30 जिलों में जाकर टीम ने जांच और पूछताछ की। प्रत्येक जिले से करीब तीन हजार लोगों को इस सर्वे से जोड़ा गया था। ताकि डॉक्टरों की टीम सटीक और ठोस निष्कर्ष तक पहुंच सके।
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डॉ. प्रवीण का कहना है कि इस सर्वे में 90 हजार लोगों को शामिल किया है। अबतक 28 जिलों का सर्वे पूरा हो चुका है। दो जिलों में टीम अभी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जून में सर्वे रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी जाएगी।
अंधापन भारत में वर्ष 1970 में आया
पहले भी हुआ था सर्वे
बताया जा रहा है कि वर्ष 2007 में भी अंधापन को लेकर एक सर्वे हुआ था। जिसके बाद देश की कुल आबादी के करीब एक फीसदी हिस्से में अंधापन की मौजूदगी पता चली थी। जिस पर केंद्रीय सरकार ने राष्ट्रीय कार्यक्रम एनपीसीबी पर जोर देना शुरू किया था। अब डॉ. प्रवीण का कहना है कि नए सर्वे में अंधापन 0.3 फीसदी मिला है।
कई साल पहले आया था अंधापन
डॉक्टरों के मुताबिक अंधापन भारत में वर्ष 1970 में आया था, जब इसे पूर्ण रुप से दृष्टिहीनता से जोड़ा गया था। ऐसे मरीजों में दृष्टि वापस आने की संभावना नहीं रहती। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने वर्ष 1971-74 के बीच एक रिसर्च भी किया था, जिसके बाद वर्ष 1976 में इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करते हुए देश भर में इसे लेकर रोकथाम पर काम शुरू हुआ।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2007 में भी अंधापन को लेकर एक सर्वे हुआ था। जिसके बाद देश की कुल आबादी के करीब एक फीसदी हिस्से में अंधापन की मौजूदगी पता चली थी। जिस पर केंद्रीय सरकार ने राष्ट्रीय कार्यक्रम एनपीसीबी पर जोर देना शुरू किया था। अब डॉ. प्रवीण का कहना है कि नए सर्वे में अंधापन 0.3 फीसदी मिला है।
कई साल पहले आया था अंधापन
डॉक्टरों के मुताबिक अंधापन भारत में वर्ष 1970 में आया था, जब इसे पूर्ण रुप से दृष्टिहीनता से जोड़ा गया था। ऐसे मरीजों में दृष्टि वापस आने की संभावना नहीं रहती। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने वर्ष 1971-74 के बीच एक रिसर्च भी किया था, जिसके बाद वर्ष 1976 में इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करते हुए देश भर में इसे लेकर रोकथाम पर काम शुरू हुआ।