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India-US Trade Deal: चीन पर भारी पड़ सकता है मेड इन इंडिया, व्यापार समझौते से भारतीय उद्योग को सीधी बढ़त
Sun, 08 Feb 2026 03:49 AM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 08 Feb 2026 03:49 AM IST
सार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और चीन पर ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के बीच मेड इन इंडिया उत्पादों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिल सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से हटकर भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
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विस्तार
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का असर केवल इन्हीं दो देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले वक्त में इसके जरिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में चीनी कंपनियों के मुकाबले बढ़त हासिल हो सकती है, क्योंकि चीन पर अमेरिका ने 37 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग वस्तुओं, रत्न, आभूषण व चर्म उत्पाद क्षेत्र में निर्माण बढ़ने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। चीन के मुकाबले अब मेड इन इंडिया को बढ़त हासिल होगी।
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भारत विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसमें उसकी प्रतिस्पर्धा चीन से है। पहले ब्रिटेन, फिर यूरोपीय संघ व अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से वैश्विक कारोबारी नक्शे में देश की स्थिति बेहतर हुई है। भारत निर्यातकों को इन देशों के विशाल बाजार में अपना माल उपलब्ध कराने का रास्ता खुल रहा है।
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इससे सप्लाई चेन के मामले में उसे मजबूती मिलेगी और वह दुनिया भर के लिए बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में उभरने लगा है। निकट भविष्य में भारत एआई एवं क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग और बढ़ाएगा। इसमें उसे तकनीकी मदद भी मिलेगी। रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के फिलहाल हटने से भी भारत को बड़ी राहत मिली है।
मैन्यूफैक्चरिंग के लिहाज से बेहतर विकल्प बनेगा भारत
बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो चीन में काम करके अमेरिका व यूरोप में माल भेजती हैं, उनके लिए कम अमेरिकी शुल्क वाला भारत ज्यादा मुफीद हो सकता है। माना जा रहा है कि ऐसी कंपनियां 37 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क वाले चीन से शिफ्ट होने या विस्तार की रणनीति भारत के कारोबारी माहौल को देखकर ही बनाएंगी।
मैन्यूफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के लिहाज से भारत अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प बन सकता है। चीन के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलयेशिया, वियतनाम, व इंडोनेशिया जैसे देशों के मुकाबले भारतीय निर्यातकों को बढ़त हासिल होगी। अमेरिका ने बांग्लादेश व वियतनाम पर 20 प्रतिशत, पाकिस्तान व इंडोनेशिया व मालेशिया पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है।
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