भारत-अमेरिका भागीदारी: वैश्विक विकास में त्रिकोणीय सहयोग के मार्गदर्शक सिद्धांतों में संशोधन, 2014 में किए थे दस्तखत
भारत व अमेरिका ने वैश्विक विकास में त्रिकोणीय सहयोग के मार्गदर्शक सिद्धांतों एसजीपी में दूसरा संशोधन किया है। संशोधित समझौते पर शुक्रवार को भारत व अमेरिका के अधिकारियों ने दस्तखत किए।
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विदेश मंत्रालय ने कहा है कि एसजीपी के माध्यम से भारत व अमेरिका साझेदारी देशों, खासकर एशिया व अफ्रीका के देशों, के विकास की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। संशोधित समझौते पर शुक्रवार को भारत व अमेरिका के अधिकारियों ने दस्तखत किए।
India & the US today signed the Second Amendment to the Statement of Guiding Principles (SGP) on Triangular Cooperation for Global Development. The SGP Agreement, signed in November 2014, underscores the contribution of India-US partnership to global stability and prosperity: MEA pic.twitter.com/SqhUENIYZS
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 30, 2021
इस संशोधन के जरिए भारत व अमेरिका ने अपने साझेदार देशों की क्षमताएं बढ़ाने के लिए अपनी मदद का दायरा बढ़ाया है। भारत व अमेरिका अपने सहयोगी देशों को व्यापार, संचार, निवेश, स्वास्थ्य सेवाएं व कृषि जैसे अनेक क्षेत्रों में मदद करेंगे।
एसजीपी में संशोधन पर दस्तखत के बाद विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इस संशोधन के जरिए इस समझौते की मियाद भी बढ़ाकर 2026 तक कर दी गई है। इस समझौते के अंतर्गत भारत व अमेरिका अपने साझेदार देशों में स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा, महिला सशक्तिकरण, पोषण आहार, आपदा राहत, जल, स्वच्छता, शिक्षा, संस्थान निर्माण के क्षेत्रों में भी मदद करेंगे।
ब्लिंकन के दौरे के बाद उठाया कदम
भारत व अमेरिका ने यह कदम विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के भारत दौरे के दो दिन बाद उठाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री के दौरे के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। एसजीपी अनुबंध में संशोधन पर विदेश मंत्रालय की विकास साझेदारी प्रशासन प्रभाग की संयुक्त सचिव अभिलाषा जोशी और अमेरिकी मिशन यूएसएड के भारत स्थित मिशन निदेशक कैरेन क्लिमोवस्की ने हस्ताक्षर किए।
एशिया व अफ्रीका के देशों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा
बता दें, नवंबर 2014 में हस्ताक्षरित एसजीपी समझौता, वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए भारत और अमेरिकी साझेदारी द्वारा किए जाने वाले योगदान को रेखांकित करता है। यह विशेष रूप से एशिया और अफ्रीका के भागीदार देशों की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। 2019 में इसमें पहला संशोधन कर इसकी वैधता 2021 तक बढ़ाई गई थी।