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Defence: अफ्रीका के 40 देशों तक पहुंचेगा भारत का रक्षा उद्योग, पुणे में सेना प्रमुखों के सम्मेलन की तैयारी

Thu, 16 Jul 2026 05:17 AM IST
Devesh Tripathi आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 16 Jul 2026 05:17 AM IST
सार

भारत नवंबर में पुणे में अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें लगभग 40 देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारी और रक्षा प्रतिनिधि शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन का उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ भारतीय रक्षा उद्योग और स्वदेशी सैन्य तकनीकों को अफ्रीकी देशों तक पहुंचाना है।

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भारत का रक्षा उद्योग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

भारत अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों के बड़े सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। महाराष्ट्र के पुणे जिले में 4 और 5 नवंबर को प्रस्तावित सम्मेलन में लगभग 40 अफ्रीकी देशों के सेना प्रमुखों, 120 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और भारत में उनके रक्षा अताशों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन ऐसे समय होने जा रहा है, जब भारत अपनी रक्षा कूटनीति को केवल सैन्य सहयोग तक सीमित न रखकर उसे रक्षा उद्योग, तकनीकी साझेदारी और स्वदेशी हथियारों के निर्यात से जोड़ रहा है।
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सेना की दक्षिणी कमान की देखरेख में होने वाले सम्मेलन में रक्षा-कूटनीतिक संवाद के साथ बड़ी रक्षा प्रदर्शनी की तैयारी भी की जा रही है। इसका सीधा लक्ष्य लगभग 40 अफ्रीकी देशों के दरवाजे तक स्वदेशी रक्षा उद्योग पहुंचाकर अफ्रीकी बाजार पर दस्तक देना है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनी में उन स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर जोर होगा, जो आधुनिक युद्ध की नई जरूरतों को पूरा करती हैं। इनमें ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक, बख्तरबंद वाहन और इन्फैंट्री कैरियर, भारत में विकसित हल्की और मध्यम तोपें, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, साइबर सुरक्षा समाधान और नाइट विजन उपकरण प्रमुख होंगे।
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चुनौती बड़ी, पर बढ़त बनाने मौका भी
अफ्रीका में विस्तार के साथ भारतीय रक्षा उद्योग के सामने चुनौतियां भी होंगी। रूस दशकों से अफ्रीकी देशों का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है। चीन कम कीमत, तेज आपूर्ति और आक्रामक कूटनीति के दम पर मजबूत पकड़ बना चुका है। ऐसे में भारत का जोर अपनी तकनीक, लागत और भरोसेमंद साझेदारी के बल पर बढ़त बनाना होगा।
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का मॉडल
अफ्रीका में रक्षा सहयोग को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ड्रोन तकनीक के बल पर तुर्किये वहां तेजी से मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत खुद को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रक्षा साझेदार के रूप में पेश कर रहा है। अधिकांश अफ्रीकी देशों के रक्षा बजट सीमित हैं। उन्हें कम लागत, आसान संचालन और कम रखरखाव वाले हथियारों की जरूरत है।


जमीन पर मौजूदगी को विस्तार देने की तैयारी
अफ्रीका में भारत की रक्षा मौजूदगी पहले से है, जिसे अब विस्तार देने की तैयारी है। मॉरीशस और सेशेल्स भारत के सबसे करीबी रक्षा साझेदार हैं। भारत ने दोनों देशों को डोर्नियर-228 विमान, ध्रुव हेलीकॉप्टर, बैराकुडा श्रेणी के अपतटीय गश्ती पोत और तटीय रडार नेटवर्क जैसी समुद्री सुरक्षा प्रणालियां उपलब्ध कराई हैं। हिंद महासागर में तटीय सुरक्षा के लिए नौसेना मोजाम्बिक के साथ सहयोग कर रही है। मोरक्को में बख्तरबंद वाहनों के लिए भारत की पहली विदेशी रक्षा विनिर्माण इकाई की स्थापना भारतीय रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि है।
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