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सिंधु जल संधि: भारत ने पाक से कहा- जम्मू-कश्मीर की जल विद्युत परियोजनाओं के डिजाइन सही
Thu, 25 Mar 2021 04:00 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 25 Mar 2021 04:00 AM IST
सार
- सिंधु जल संधि आयोग की बैठक के दौरान उठा था मुद्दा
- भारत ने कहा दोनों परियोजनाएं पूरी तरह से जल संधि के प्रावधानों का पालन करती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : social media
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विस्तार
भारत ने जम्मू-कश्मीर में बन रही पाकुल दल और लोअर कलानाई जल विद्युत परियोजनाओं के डिजाइन पर पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज कर दिया। भारत ने पड़ोसी देश से स्पष्ट तौर पर कहा कि दोनों परियोजनाएं पूरी तरह सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप हैं।
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भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के तहत आयोजित दो दिवसीय यहां बुधवार को खत्म हो गई। बैठक के दौरान पाकिस्तान ने इन दोनों परियोजनाओं के डिजाइन को लेकर आपत्ति जताई थी।
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सूत्रों का कहना है कि बैठक में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के विशेष प्रावधान को निरस्त करने के बाद लद्दाख में मंजूर की गई जल विद्युत परियोजनाओं पर भी भारत से अतिरिक्त जानकारी देने की मांग की।
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बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा, दो भारतीय परियोजनाओं पाकल दल (1000 मेगावाट) और लोअर कलानाई (48 मेगावाट) के डिजाइन पर आगे बातचीत जारी रहेगी। भारतीय ने स्पष्ट किया है कि दोनों परियोजनाएं पूरी तरह से जल संधि के प्रावधानों का पालन करती हैं। साथ ही दोनों परियोजनाओं का तकनीकी डाटा भी पड़ोसी देश को उपलब्ध कराया।
सिंधु जल आयोग की यह बैठक करीब दो साल के अंतराल के बाद आयोजित की गई। आखिरी बैठक अगस्त, 2018 में लाहौर में हुई थी। लेकिन इसके बाद 2019 में जम्मू-कश्मीर के विभाजन के कारण दोनों देशों के बीच तनाव के चलते बैठक टल गई, जबकि पिछले साल कोरोना वायरस महामारी के कारण इसे रद्द करना पड़ा था।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच अगली बैठक पाकिस्तान में होगी, जिसकी तारीख आपसी सहमति से बाद में घोषित की जाएगी।
भारतीय सिंधु आयुक्त पीके सक्सेना के नेतृत्व में केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और एनएचपीसी के अधिकारियों ने बैठक के दौरान भारतीय परियोजनाओं पर पक्ष रखा। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के सिंधु आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह कर रहे थे।
यह बैठक महज दोनों देशों की आबादी के लिए बेहद अहम मानी जाने वाली सिंधु घाटी की नदियों को लेकर वार्ता के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं थी बल्कि दोनों देशों के बीच पिछले महीने सख्त सीजफायर की घोषणा के बाद पहली मुलाकात के कारण भी बेहद अहम थी।