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आसियान शिखर सम्मेलन 2018, जानिए भारत कितना मजबूत

Thu, 25 Jan 2018 03:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Jan 2018 03:59 AM IST
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India's relations with ASEAN countries
ब्रुनेई के साथ भारत के 1984 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। 2016 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ब्रुनेई यात्रा पर गए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। ब्रुनेई से भारत द्वारा जिन वस्तुओं का आयात किया जाता है, उनमें मुख्य रूप से हर साल लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का कच्चा तेल है।
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म्यांमार- मनमोहन सरकार के दौरान भारत-म्यांमार के बीच संबंध अधिक मजबूत हुए। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल म्यांमार की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए।
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कंबोडिया- भारत-कंबोडिया के बीच संबंध प्राचीन हैं। दोनों देशों के बीच हाईड्रोग्राफ नेटवर्क स्टेशन स्थापित करने के लिए कामपोंग स्पियु में भूजल संसाधनों के अध्ययन पर समझौता जारी है। इसके अलावा कंबोडिया में सिएमरीप नदी बेसिन के लिए मास्टर प्लान बनाने पर भी समझौता हुआ था। भारत वहां राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति सुधारने को नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन करता रहा है।
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इंडोनेशिया- 2016 में दोनों देशों के संबंधों ने नया मोड़ लिया। मोदी के आमंत्रण पर 2016 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति नई दिल्ली पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के प्रसिद्ध जनों के समहू (ईपीजी) के द्वारा दृष्टि दस्तावेज-2025 सौंपे जाने के कदम का स्वागत किया। दस्तावेज में 2025 और उससे आगे के लिए द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर रूपरेखा की सिफारिश की गई है। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण समेत कई मुद्दों पर हस्ताक्षर हुए थे।

लाओस- दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1956 में स्थापित हुए थे। भारतीय सेना ने 2011, 2012 और 2013 में लाओस में यूएक्सओ व बारूदी सुरंग हटाने पर तीन प्रशिक्षण कैप्सूल का भी आयोजन किया था। दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर कई करार हैं। भारत लाओस को समय-समय पर आर्थिक मदद भी देता रहा है।

पिछले साल मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक भारत पहुंचे थे।

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आसियान सम्मेलन में बोलते हुए पीएम मोदी - फोटो : ani
मलेशिया- पिछले साल मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक भारत पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सात समझौते हुए। इसमें रेलवे नेटवर्क, भारतीयों के लिए वीजा नियमों में छूट, भारतीय टूरिस्ट वीजा समेत कई प्रमुख मुद्दों पर समझौता हुआ। डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मलयेशिया के सहयोग को भी कागजी रूप दिया गया था।

फिलीपींस- दोनों देशों के संबंध पिछले साल तब और मजबूत हुए जब बीते 36 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने फिलीपींस की यात्रा है। मोदी से पहले पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने फिलीपींस गईं थीं। मोदी भी आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने फिलीपींस पहुंचे थे। पिछले साल ही जुलाई में इंटरनेशनल राइस इंस्टिट्यूट को अपना साउथ एशियन रिजनल सेंटर वाराणसी में लगाने को मंजूरी दी गई थी।

सिंगापुर- सिंगापुर काफी समय से हिंद महासागर में भारत की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर बल देता रहा है। 2005 में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत करोड़ों डॉलर का व्यापार दोनों देशों के बीच हर साल हो रहा है। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच दक्षिणी चीन सागर में पिछले साल समुद्री अभ्यास भी हुआ था। जिस पर चीन ने नाराजगी जताई थी।

थाईलैंड- भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग योजना दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण घटक के रूप में उभर सकता है। 2016 में दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, आतंकवाद से निबटने, साइबर सुरक्षा और मानव तस्करी से निबटने को सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया था। साथ ही रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में नजदीकी संबंध कायम करने की हामी भरी थी।

वियतनाम- वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन टैन डंग ने 2014 में भारत यात्रा की थी। वियतनाम भारत से आकाश मिसाइल खरीदने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह सौदा जल्द हो सकता है। जिस पर चीन कई बार आपत्ति जता चुका है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर में तेल निकालने को लेकर भी समझौते हो सकते हैं।
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