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EPI: पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक में भारत की रैंकिंग को पर्यावरण मंत्रालय ने किया खारिज, सबसे निचला पायदान मिलने पर कही यह बात

Wed, 08 Jun 2022 04:45 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 08 Jun 2022 04:45 PM IST
सार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इसे लेकर जारी बयान में कहा है कि हाल ही में जारी पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) 2022 में प्रयोग किए गए कई सूचक अनुमान पर आधारित हैं। 

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India rejects Environment Performance Index 2022 that ranked it lowest among 180 countries
पीएम मोदी - फोटो : Social media

विस्तार

अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा जारी पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक- 2022 में भारत को पहला स्थान मिला है, हालांकि 180 देशों की रैंकिग में उसे यह स्थान नीचे से मिला है। जिसके बाद भारत ने इस पर नाराजगी जताई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने नाराजगी जताते हुए बुधवार को पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक- 2022 को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा है कि रैकिंग में उपयोग किए गए सूचक अनुमानों और अवैज्ञानिक तरीकों पर आधारित हैं।

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कोलंबिया विश्वविद्यालय ने जारी की रैकिंग
हाल में येल पर्यावरण कानून और नीति केंद्र और कोलंबिया विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान सूचना नेटवर्क केंद्र द्वारा जारी रैकिंग में जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन, पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी के महत्व के मामले में देशों की जांच के लिए 11 कैटेगरी में 40 परफार्मेंस सूचकों का इस्तेमाल किया गया।
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भारत ने दिया ये बयान
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इसे लेकर जारी बयान में कहा है कि हाल ही में जारी पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) 2022 में प्रयोग किए गए कई सूचक अनुमान पर आधारित हैं। साथ ही पर्यावरण परफारमेंस का आकलन करने के लिए उपयोग किए गए कुछ सूचक अवैज्ञानिक तरीकों पर आधारित हैं।
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गौरतलब है कि ‘येल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल लॉ एंड पॉलिसी’ और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर इंटरनेशनल अर्थ साइंस इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ द्वारा हाल में प्रकाशित 2022 पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) में डेनमार्क सबसे ऊपर है। इसके बाद ब्रिटेन और फिनलैंड को स्थान मिला है। इन देशों को हालिया वर्षों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए सर्वाधिक अंक मिले। 

स्थिरता पर आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने वाले देश इस सूची में 
ईपीआई दुनिया भर में स्थिरता की स्थिति का डेटा-आधारित सार मुहैया कराता है। ईपीआई 11 श्रेणियों में 40 प्रदर्शन संकेतकों का उपयोग करके 180 देशों को जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन, पर्यावरणीय स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति के आधार पर अंक देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे कम अंक भारत (18.9), म्यांमार (19.4), वियतनाम (20.1), बांग्लादेश (23.1) और पाकिस्तान (24.6) को मिले हैं। कम अंक पाने वाले अधिकतर वे देश हैं, जिन्होंने स्थिरता पर आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी या जो अशांति और अन्य संकटों से जूझ रहे हैं। 

भारत पहली बार रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर
इसमें कहा गया कि तेजी से खतरनाक होती वायु गुणवत्ता और तेजी से बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के साथ भारत पहली बार रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर आ गया है। चीन को 28.4 अंकों के साथ 161वां स्थान मिला है। अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि उत्सर्जन वृद्धि दर पर अंकुश लगाने के हालिया वादे के बावजूद चीन और भारत के 2050 में ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े और दूसरे सबसे बड़े उत्सर्जक देश बनने का अनुमान है।


अमेरिका को मिला है ये स्थान
अमेरिका को पश्चिम के 22 धनी लोकतांत्रिक देशों में 20वां और समग्र सूची में 43वां स्थान मिला है। ईपीआई रिपोर्ट में कहा गया है कि अपेक्षाकृत कम रैंकिंग अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के दौरान पर्यावरण संरक्षण के कदमों से पीछे हटने के कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेनमार्क और ब्रिटेन सहित फिलहाल केवल कुछ मुट्ठी भर देश ही 2050 तक ग्रीनहाउस गैस कटौती स्तर तक पहुंचने के लिए तैयार हैं। इसमें कहा गया है कि चीन, भारत और रूस जैसे प्रमुख देशों में तेजी से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ रहा है और कई अन्य देश गलत दिशा में बढ़ रहे हैं। रूस इस सूची में 112वें स्थान पर है। ईपीआई अनुमानों से संकेत मिलता है कि अगर मौजूदा रुझान बरकरार रहा तो 2050 में 50 प्रतिशत से अधिक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए सिर्फ चार देश - चीन, भारत, अमेरिका और रूस जिम्मेदार होंगे।

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