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संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक में भारत का 131वां स्थान, एक पायदान फिसला

Thu, 17 Dec 2020 07:23 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 17 Dec 2020 07:23 AM IST
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India ranked 131 in the United Nations Human Development Index slipping one Rank
गरीबी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) 2020 में भारत एक पायदान नीचे फिसल गया है। देश को 189 देशों की सूची में 131वें स्थान पर रखा गया है। वहीं 2019 में 130 वां स्थान मिला था। इस सूचकांक को बनाने के लिए किसी देश में औसत आयु, शिक्षा और आय को प्रमुख रुप से आधार बनाया जाता है।

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पहले स्थान पर नॉर्वे, दूसरे स्थान पर आयरलैंड और तीसरे स्थान पर स्वित्जरलैंड रहे। इस रिपोर्ट में भारत की एचडीआई वैल्यू 0.645 रखी गई है। यह एक के जितनी निकट रहे उतनी अच्छी मानी जाती है। नंबर एक रहे नॉर्वे की एचडीआई वैल्यू 0.957 आई है। पड़ोसी देश श्रीलंका और चीन हमसे आगे रहे। वहीं पाकिस्तान पिछली बार के 152 से दो स्थान नीचे गिर गया है।
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मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में भारतीयों की जीवन प्रत्याशा 69.7 साल थी। बांग्लादेश में यह 72.6 साल और पाकिस्तान में 67.3 साल थी। रिपोर्ट के अनुसार सूचकांक में भूटान 129वें स्थान पर, बांग्लादेश 133वें स्थान पर, नेपाल 142वें स्थान पर और पाकिस्तान 154वें स्थान पर रहा।
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सूचकांक में नॉर्वे सबसे ऊपर रहा और उसके बाद आयरलैंड, स्वित्जरलैंड, हांगकांग और आइसलैंड का स्थान रहा। यूएनडीपी के रेजिडेंट प्रतिनिधि शोको नोडा ने संवाददाताओं से कहा कि 'भारत की रैंकिंग में गिरावट का यह अर्थ नहीं कि भारत ने अच्छा नहीं किया, बल्कि इसका अर्थ है कि अन्य देशों ने बेहतर किया।'

नोडा ने कहा कि भारत दूसरे देशों की मदद कर सकता है। उन्होंने भारत द्वारा कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों की भी सराहना की। यूएनडीपी की ओर से मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर 2018 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 6,829 अमेरिकी डॉलर थी जो 2019 में गिरकर 6,681 डॉलर हो गई।

महत्वपूर्ण फैक्ट्स
आर्थिक सुरक्षा, जमीन पर मालिकाना हक बढ़ने से महिलाओं की स्थिति सुधरती दिखी है। ऐसी महिलाओं से हिंसा कम हुई और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ी। लेकिन आदिवासी समुदाय के बच्चों में कुपोषण सबसे ज्यादा मिला है। इसकी वजह से बच्चों में शारीरिक कमजोरी है और आयु के अनुरूप शारीरिक वृद्धि नहीं हो रही है।


जलवायु परिवर्तन का असर लड़कियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर भी हो रहा है। इन वजहों से आय घटने पर अभिभावक अपनी लड़कियों के लिए खर्च में कमी कर रहे हैं।

अच्छी बात: सौर ऊर्जा क्षमता में पांचवें, लक्ष्य से चार साल आगे
2008 में भारत ने जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय एक्शन प्लान शुरू कर 2030 तक जीवाश्म ईंधन पर ऊर्जा जरूरतें 35 फीसदी घटाने का लक्ष्य तय किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि 2019 जुलाई तक भारत 30 गीगावॉट सौर ऊर्जा पैदा करने लगा। वह अपने लक्ष्य से चार साल आगे है। सबसे अधिक सौर ऊर्जा पैदा करने की क्षमता में पांचवें स्थान पर है।

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