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India-Oman Trade Pact: 'भारत-ओमान के बीच जल्द होगा CEPA व्यापार समझौता, वार्ता पूरी'; ओमान के राजदूत का बयान
Sun, 21 Sep 2025 11:31 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 21 Sep 2025 11:31 AM IST
सार
ओमान में 6000 से अधिक भारत-ओमान संयुक्त उद्यम काम कर रहे हैं, जिनमें 776 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ है। भारतीय कंपनियां विशेष रूप से सोहर और सलालाह फ्री जोन में प्रमुख निवेशक हैं। अप्रैल 2000 से मार्च 2025 के बीच ओमान से भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 605.57 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता ( सीईपीए) जल्द ही हस्ताक्षरित होने वाला है। दोनों देश अपने व्यापार को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाकर नए उत्पादों और सेवाओं तक ले जाने की तैयारी में हैं। यह जानकारी ओमान के भारत में राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अलशिबानी ने दी। ओमानी राजदूत ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में बताया कि समझौते से जुड़ी वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।'
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नवंबर 2023 में शुरू हुई थी बातचीत
भारत और ओमान के बीच सीईपीए को लेकर बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी। इस समझौते में दोनों देश अधिकतम उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को कम या खत्म करते हैं, जिससे आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही, सेवा क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाया जाता है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल किया जाता है।
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भारत-ओमान व्यापार का स्वरूप
ओमान के राजदूत के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाना है। फिलहाल भारत, ओमान से जिन प्रमुख वस्तुओं का आयात करता है। इसमें पेट्रोलियम उत्पाद और यूरिया- कुल आयात का 70% से ज्याद, प्रोपलीन और एथिलीन पॉलिमर, पेट कोक, जिप्सम, रसायन, लोहा और इस्पात शामिल हैं। राजदूत अलशिबानी ने कहा, 'ओमान से भारत के लिए मुख्य निर्यात तेल और पेट्रोकेमिकल पर आधारित है। यह व्यापार तेल और पेट्रोकेमिकल की कीमतों पर निर्भर करता है। इसी वजह से यह सोच बनी कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नए उत्पादों और सेवाओं तक फैलाया जाए।'
भारत की स्थिति और निवेश
ओमान, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। भारत ने पहले ही यूएई के साथ मई 2022 में ऐसा ही सीईपीए समझौता किया था। 2024-25 में भारत और ओमान का द्विपक्षीय व्यापार 10.61 अरब डॉलर (लगभग 88 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।
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क्या है इस समझौते का महत्व?
इस सीईपीए से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और नए उत्पादों का निर्यात-आयात बढ़ेगा, सेवा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। राजदूत अलशिबानी ने कहा कि भारत ने पहले जिन देशों के साथ सीईपीए समझौते किए हैं, उनके अच्छे परिणाम मिले हैं और ओमान के साथ यह समझौता भी दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित होगा।
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नवंबर 2023 में शुरू हुई थी बातचीत
भारत और ओमान के बीच सीईपीए को लेकर बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी। इस समझौते में दोनों देश अधिकतम उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को कम या खत्म करते हैं, जिससे आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही, सेवा क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाया जाता है और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल किया जाता है।
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भारत-ओमान व्यापार का स्वरूप
ओमान के राजदूत के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़ाना है। फिलहाल भारत, ओमान से जिन प्रमुख वस्तुओं का आयात करता है। इसमें पेट्रोलियम उत्पाद और यूरिया- कुल आयात का 70% से ज्याद, प्रोपलीन और एथिलीन पॉलिमर, पेट कोक, जिप्सम, रसायन, लोहा और इस्पात शामिल हैं। राजदूत अलशिबानी ने कहा, 'ओमान से भारत के लिए मुख्य निर्यात तेल और पेट्रोकेमिकल पर आधारित है। यह व्यापार तेल और पेट्रोकेमिकल की कीमतों पर निर्भर करता है। इसी वजह से यह सोच बनी कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नए उत्पादों और सेवाओं तक फैलाया जाए।'
भारत की स्थिति और निवेश
ओमान, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। भारत ने पहले ही यूएई के साथ मई 2022 में ऐसा ही सीईपीए समझौता किया था। 2024-25 में भारत और ओमान का द्विपक्षीय व्यापार 10.61 अरब डॉलर (लगभग 88 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।
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क्या है इस समझौते का महत्व?
इस सीईपीए से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और नए उत्पादों का निर्यात-आयात बढ़ेगा, सेवा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। राजदूत अलशिबानी ने कहा कि भारत ने पहले जिन देशों के साथ सीईपीए समझौते किए हैं, उनके अच्छे परिणाम मिले हैं और ओमान के साथ यह समझौता भी दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित होगा।