फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India-Oman maritime relations receive a new boost as INSV Kaundinya completes its historic 18-day voyage

India-Oman Ties: भारत-ओमान समुद्री रिश्तों को नई मजबूती, INSV कौण्डिन्य ने पूरी की 18 दिन की ऐतिहासिक यात्रा

Wed, 14 Jan 2026 04:54 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 14 Jan 2026 04:54 PM IST
सार

भारतीय नौसेना का हाथ से सिलकर तैयार आईएनएसवी कौंडिन्य ने अपनी साहसिक यात्रा पूरी कर ओमान के पोर्ट सुल्तान काबूस पर पहुंचा। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, भारतीय दूतावास और ओमान के अधिकारियों ने चालक दल का जोरदार स्वागत किया। पोरबंदर से रवाना हुए जहाज ने भारत के समुद्री इतिहास और शक्ति को प्रदर्शित किया और भारत-ओमान के सदियों पुराने संबंधों को और मजबूत किया।

विज्ञापन
India-Oman maritime relations receive a new boost as INSV Kaundinya completes its historic 18-day voyage
ओमान पहुंचा भारतीय नौसेना का स्वदेशी पोत आईएनएसवी कौंडिन्य - फोटो : PTI

विस्तार

भारत और ओमान के बीच समुद्री रिश्तों को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक पल सामने आया है। हाथ से सिलकर तैयार किया गया भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएसवी कौंडिन्य ने 18 दिनों की साहसिक और ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर बुधवार को ओमान पहुंचा। मस्कट के पोर्ट सुल्तान काबूस पर जहाज और चालक दल का पानी की बौछारों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मस्कट में भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी और ओमान के विरासत, पर्यटन मंत्रालय और रॉयल नेवी के अधिकारी मौजूद रहे।

विज्ञापन


आईएनएसवी कौंडिन्य 29 दिसंबर, 2025 को गुजरात के पोरबंदर से रवाना हुआ था। जहाज का नेतृत्व कमांडर विकास श्योराण ने किया। चालक दल में चार अधिकारी और 13 नौसैनिक शामिल थे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, इस अभियान ने समुद्री क्षेत्र में भारत के इतिहास, विरासत और शक्ति को याद दिलाया। चालक दल ने भारत को गौरवान्वित किया है। इस यात्रा ने ओमान के साथ हमारे सदियों पुराने संबंधों को भी मजबूत किया है। भारत-ओमान दोस्ती अमर रहे।
विज्ञापन


संजीव सान्याल ने दी जानकारी
इससे पहले, जहाज पर सवार प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया में जहाज के सफलतापूर्वक ओमान पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने कमांडर विकास श्योराण और अभियान प्रभारी कमांडर वाई हेमंत कुमार के साथ एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, इस पल का आनंद ले रहे हैं। हमने कर दिखाया। एक पोस्ट में हेमंत कुमार ने लिखा, जमीन दिखाई दे रही है! मस्कट दिख गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- Iran Unrest: 'ईरान को तुरंत छोड़ दें, जरूरी कागजात साथ रखें'; विदेश मंत्रालय की भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी

सान्याल ने बाद में यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह परियोजना बताती है प्राचीन भारत जोखिम लेने वालों का देश था और हम वास्तव में यहां उसी का जश्न मना रहे हैं। अभियान के प्रभारी अधिकारी कमांडर वाई हेमंत कुमार ने सेलिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा, पोरबंदर से मस्कट तक समुद्री यात्रा करना कोई आसान काम नहीं है लेकिन नौसेना ने हमें इस अभियान के लिए बहुत अच्छी तरह से ट्रेनिंग दी और यह एक अनोखा अनुभव था।

आईएनएसवी कौंडिन्य को लेकर क्या बोले सर्बानंद सोनोवाल
इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह जहाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह जहाज भारत की प्राचीन नौवहन कला और समुद्री परंपरा को विश्व के सामने पेश करता है। जहाज का नाम प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है और इसे अजंता की गुफाओं में दिखाए गए 5वीं सदी के जहाज से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है।

सोनोवाल ने बताया कि यह जहाज भारत की समुद्री विरासत और कौशल का प्रतीक है। इसे अजंता की गुफाओं में दिखाए गए 5वीं सदी के जहाज से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है और इसका नाम प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है। इसके साथ ही मंत्री सोनोवाल ने भारत और ओमान के रिश्ते पर भी जोर दिया।

मस्कट, ओमान से बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और ओमान के समुद्री रिश्ते हजारों साल पुराने हैं। हमारे पूर्वज जो इन जलमार्गों से गुजरते थे, वे आज भी दोनों देशों को जोड़ते हैं। सोनोवाल ने बताया कि हाल ही में भारत और ओमान के बीच सीईपीए, समुद्री विरासत पर सहमति पत्र और साझा दृष्टिकोण पर समझौते हुए हैं। इनसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।

जहाज पर न कोई कमरा, न बिजली
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज पर कोई कमरा नहीं बना था। चांद की रोशनी के अलावा प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं थी। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए सिर्फ हेडलैंप्स थे, जिन्हें चालक दल के सदस्य अपने सिर पर लगाकर रखते थे। गौर करने वाली बात यह है कि आईएनएसवी कौंडिन्य के चालक दल ने अपनी 17 दिन की यात्रा अचार, खिचड़ी खाकर पूरी की। इसके अलावा, मटकों में पीने का पानी रखा गया था।


ये भी पढ़ें:- Bengal ED Raids Row: कलकत्ता हाईकोर्ट ने की TMC की याचिका निस्तारित, अदालत से बोली ईडी- कुछ भी जब्त नहीं किया

जांच और मरम्मत के बाद होगी वापसी
नौसेना के कमोडोर अमित श्रीवास्तव ने इस यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, भारतीय नौसेना का प्रशिक्षित क्रू किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है...जरूरी जांच और मरम्मत के बाद, जहाज भारत के लिए अपनी वापसी की यात्रा शुरू करेगा।

यूटेलसैट के उपग्रह ने कौंडिन्य को दी कनेक्टिविटी
आईएनएसवी कौंडिन्य की इस ऐतिहासिक यात्रा की सफलता के पीछे यूटेलसैट का भी अहम योगदान है। सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदाता ने अपने वनवेब सैटेलाइट समूह के जरिये जहाज को कनेक्टिविटी प्रदान की, जिससे जहाज की स्थिति का वास्तविक समय में पता चलता रहा। यूटेलसैट ने एक बयान में कहा कि जहाज के डिजाइन और संचार की बुनियादी ढांचे की कमी को देखते हुए वनवेब के लियो उपग्रह नेटवर्क को एकमात्र संचार माध्यम के रूप में तैनात किया गया था। यह प्रणाली पूरी यात्रा के दौरान चालू रही।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed